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हादसा: नौकरी दांव पर लगा बचा लीं जिंदगियां

Sun, 15 Mar 2015 06:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल(हरियाणा) Updated Sun, 15 Mar 2015 06:58 PM IST
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bloody accident in karnal: save lives job on stake

चंडीगढ़ से सोनीपत जा रहे 7 दोस्तों में से एक ही दिन एक साथ 5 दोस्तों की दर्दनाक मौत ने हिमाचल के साथ साथ हरियाणा के लोगों को झकझोर दिया, जिसे भी इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिली सन रह गया।

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कर्णनगरी सहित सोनीपत मानों मातम के माहौल में डूब गया। मौत के इसी तांडव के बीच एक ऐसा फरिश्ता भी था, जिसने अपनी नौकरी को दाव पर लगाकर मौत से लड़ते हुए दो जिंदगियों को बचा लिया।
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इनमें सोनीपत का रहने वाला तरुण व हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) की रहने वाली रूबी शामिल हैं। जब घटनास्थल पर मौजूद सभी लोगों की संवेदनाएं दम तोड़ चुकी थी, इन दोनों को उस समय इसी युवक ने बचाया। इसका नाम है विक्रांत। हादसे में मारे गए अमन के परिजन सनत जैन ने विलाप करते हुए कहा कि विक्रांत न होता तो शायद हादसे में एक साथ मौके पर ही सातों दोस्तों की जान चली जाती।
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सनत ने नम आंखों के बावजूद इस शख्स का तहे दिल से शुक्रिया भी किया। दरअसल विक्रांत सोमा कंपनी के प्रोजेक्ट पर बतौर सिक्योरेटी गार्ड कार्यरत है। हादसे के समय विक्रांत मौके पर ही मौजूद था, जैसे ही हादसा हुआ विक्रांत ने गाड़ी में से लोगों को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया।

जल्दबाजी न करते तो बच जाती पांचों जानें

bloody accident in karnal: save lives job on stake

इस बीच कंपनी के कुछ लोगों ने उसे ऐसा करने से रोका, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी और अपनी नौकरी दांव पर लगाकर दो जानों को क्रेन के माध्यम से जिंदा ‘काल के मुंह’ से निकाल लिया।

इतना ही नहीं इन दोनों जानों को बचाने के बाद घायलावस्था में दोनों को अस्पताल तक पहुंचने में विक्रांत ने सहायता की। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक दोनों की हालत गंभीर थी। दोनों घायलों को करनाल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया।

जिस गाड़ी में हादसा हुआ उस गाड़ी में एयर बैग की सुविधा मौजूद थी। हादसे के समय किसी भी युवक ने सीट बैल्ट नहीं पहनी हुई थी। यदि सीट बैल्ट पहनी होती तो शायद मौत के इस ताडंव को रोका जा सकता था।

डस्टर गाड़ी, जिसमें हादसा हुआ उसमें भी यह सुविधा थी, लेकिन इस सुविधा का लाभ तभी मिल सकता है, जब गाड़ी चलाते समय सीट बैल्ट लगाई गई हो। लेकिन दुर्भाग्य से किसी ने भी मौके पर सीट बैल्ट नहीं लगाई थी। सीट बैल्ट लगी होती तो एयर बैग खुल जाते और सभी की जान बच जाती।

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