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काली दिवाली मनाएंगे पीआरटीसी के पेंशनर
ब्यूरो, अमर उजाला/पटियाला
Updated Fri, 17 Oct 2014 10:30 PM IST
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लगातार आंदोलन और प्रशासन के वादों के बावजूद पीआरटीसी के पेंशनरों को अब तक पेंशन नहीं मिल सकी है। जिसके चलते पेंशनर इस बार काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर हैं। पीआरटीसी पेंशनर्स एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को पेंशनरों की भूख हड़ताल 28वें दिन में शामिल हो गई। शुक्रवार को भूख हड़ताल पर बरनाला डिपो के करनैल सिंह, देसराज, जाति राम, हरनेक सिंह और शिव लाल बैठे। इस मौके पर बस स्टैंड पर रोष रैली करके सरकार व मैनेजमेंट के खिलाफ नारेबाजी की गई।
रैली को संबोधित करते हुए पीआरटीसी पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान भगवंत सिंह, महासचिव हरी सिंह चमक ने कहा कि सरकार व मैनेजमेंट की गलत नीतियों के कारण पीआरटीसी अपाहिज हो चुकी है, इसका कोई वारिस नहीं है। जब भी दफ्तर जाओ, अफसर ही नहीं मिलते। पेंशनों पर निर्भर बुजुर्गों के घर की आर्थिक हालत बहुत खराब हो गई है। उनके लिए दो वक्त की रोटी खाना भी मुश्किल है। लेकिन न तो सरकार और न ही मैनेजमेंट उनकी कोई सुध ले रही है।
एसोसिएशन ओहदेदारों ने कहा कि वादे के मुताबिक अगर 21 अक्तूबर तक पेंशनरों को पेंशन न दी गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। जिसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदार सरकार खुद होगी। तंग आकर पेंशनर आत्मदाह जैसा कदम भी उठा सकते हैं। पेंशनर इस बार काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर हैं। रैली में भीम सिंह, बलविंदर सिंह सिद्धू, शिव कुमार, जोगिंदर सिंह और गुरचरन सिंह चौहान भी मौजूद रहे।
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रैली को संबोधित करते हुए पीआरटीसी पेंशनर्स एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान भगवंत सिंह, महासचिव हरी सिंह चमक ने कहा कि सरकार व मैनेजमेंट की गलत नीतियों के कारण पीआरटीसी अपाहिज हो चुकी है, इसका कोई वारिस नहीं है। जब भी दफ्तर जाओ, अफसर ही नहीं मिलते। पेंशनों पर निर्भर बुजुर्गों के घर की आर्थिक हालत बहुत खराब हो गई है। उनके लिए दो वक्त की रोटी खाना भी मुश्किल है। लेकिन न तो सरकार और न ही मैनेजमेंट उनकी कोई सुध ले रही है।
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एसोसिएशन ओहदेदारों ने कहा कि वादे के मुताबिक अगर 21 अक्तूबर तक पेंशनरों को पेंशन न दी गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। जिसके गंभीर परिणामों की जिम्मेदार सरकार खुद होगी। तंग आकर पेंशनर आत्मदाह जैसा कदम भी उठा सकते हैं। पेंशनर इस बार काली दिवाली मनाने के लिए मजबूर हैं। रैली में भीम सिंह, बलविंदर सिंह सिद्धू, शिव कुमार, जोगिंदर सिंह और गुरचरन सिंह चौहान भी मौजूद रहे।
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