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निगम चुनाव रिजल्ट के बाद अब मेयर के लिए जंग शुरू, ये 3 दावेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 Dec 2016 06:37 PM IST
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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
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चुनाव परिणाम आने के बाद जीतने वाली महिला उम्मीदवारों में मेयर के लिए जंग शुरू हो गई है। तीन महिला उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं। पहले साल के कार्यकाल में महिला मेयर ही बनती है। ऐसे में भाजपा में पूर्व मेयर राज बाला मलिक, आशा जसवाल और हीरा नेगी मेयर पद के लिए दावेदार है। राज बाला मलिक केा पहले ही मेयर पद का अनुभव है जबकि आशा जसवाल पार्टी की सीनियर नेता है।
हीरा नेगी को भाजपा पहले भी कांग्रेस की पूनम शर्मा के खिलाफ मेयर का चुनाव लड़वा चुकी है लेकिन हीरा नेगी हार गई थी। पूनम शर्मा और रीतू छाबड़ा के चुनाव हारने से यह दोनो मेयर की रेस से बाहर हो गई है जबकि कांग्रेस गुरबख्श रावत को मेयर पद का दावेदार बना सकती है।
सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दावेदार
मेयर के साथ साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दावेदारों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सीनियर डिप्टी मेयर के तौर पर देवेश मोदगिल, सतीश कैंथ, शक्ति प्रकाश देवशाली , गुरप्रीत ढिल्लो को दावेदार बताया जा रहा है जबकि डिप्टी मेयर के लिए अकाली पार्षद हरदीप सिंह, चंद्रवती शुक्ला, कवरजीत सिंह, विनोद अग्रवाल का नाम की चर्चा चल रही है।
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हीरा नेगी को भाजपा पहले भी कांग्रेस की पूनम शर्मा के खिलाफ मेयर का चुनाव लड़वा चुकी है लेकिन हीरा नेगी हार गई थी। पूनम शर्मा और रीतू छाबड़ा के चुनाव हारने से यह दोनो मेयर की रेस से बाहर हो गई है जबकि कांग्रेस गुरबख्श रावत को मेयर पद का दावेदार बना सकती है।
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सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दावेदार
मेयर के साथ साथ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के दावेदारों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। सीनियर डिप्टी मेयर के तौर पर देवेश मोदगिल, सतीश कैंथ, शक्ति प्रकाश देवशाली , गुरप्रीत ढिल्लो को दावेदार बताया जा रहा है जबकि डिप्टी मेयर के लिए अकाली पार्षद हरदीप सिंह, चंद्रवती शुक्ला, कवरजीत सिंह, विनोद अग्रवाल का नाम की चर्चा चल रही है।
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कांग्रेस मुकाबला भी नहीं कर पाएगी
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
कांग्रेस की सिर्फ 4 सीट दर्ज होने से वह सदन में भाजपा का मुकाबला भी नहीं कर पाएगी क्योंकि भाजपा अकाली के 22 पार्षद कांग्रेस पर भारी पड़ेगे। कांग्रेस के सभी दिग्गज हार गए हैं। सदन में कांग्रेस द्वारा आवाज उठाने की जिम्मेवारी दवेंद्र बबला और गुरबख्श रावत को दी जा सकती है क्योकि जीतने वाले पार्षदों में रावत को ही अच्छी तरह से बात रखने का रखने का अनुभव है।
गुरबख्श रावत के अलावा शीला फूल सिंह सीनियर पार्षद है जबकि रविंदर कौर गुजराल पहली बार पार्षद बनी है। 4 में से तीन सीटे ऐसी थी जहां पर मुकाबले में अकाली दल के उम्मीदवार थे जबकि दवेंद्र सिंह बबला का जीत का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि वह वार्ड नंबर-17 के लोकल उम्मीदवार थे जबकि उनके मुकाबले में भाजपा के उम्मीदवार सौरभी जोशी बाहरी थे।
बसपा का खाता भी नहीं खुला
बसपा इस पर 18 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे लेकिन एक भी उम्मीदवार जीत नही दर्ज कर पाया। जबकि साल 2011 के हुए चुनाव में बसपा ने दो सीट पर दर्ज की थी। जबकि बसपा अध्यक्ष जगीर सिंह खुद भी वार्ड नंबर-7 से चुनाव हार गए हैं।
गुरबख्श रावत के अलावा शीला फूल सिंह सीनियर पार्षद है जबकि रविंदर कौर गुजराल पहली बार पार्षद बनी है। 4 में से तीन सीटे ऐसी थी जहां पर मुकाबले में अकाली दल के उम्मीदवार थे जबकि दवेंद्र सिंह बबला का जीत का एक बड़ा कारण यह भी रहा कि वह वार्ड नंबर-17 के लोकल उम्मीदवार थे जबकि उनके मुकाबले में भाजपा के उम्मीदवार सौरभी जोशी बाहरी थे।
बसपा का खाता भी नहीं खुला
बसपा इस पर 18 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे लेकिन एक भी उम्मीदवार जीत नही दर्ज कर पाया। जबकि साल 2011 के हुए चुनाव में बसपा ने दो सीट पर दर्ज की थी। जबकि बसपा अध्यक्ष जगीर सिंह खुद भी वार्ड नंबर-7 से चुनाव हार गए हैं।
कई सालों से चली आ रही रस्म टूट गई
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव
इस चुनाव के परिणाम से पिछले कई सालों से चली आ रही रस्म भी टूट गई है। पिछले चुनाव में यह देखा गया है कि जो भी 5 साल के कार्यकाल में अंतिम साल में मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर बनता है या उसे पार्टी टिकट नहीं देती थी या फिर वह चुनाव में हार जाते थे लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार मेयर अरुण सूद और सीनियर डिप्टी मेयर देवेश मोदगिल जीत गए हैं जबकि डिप्टी मेयर हरदीप सिंह भी जीत गए हैं।
सबसे ज्यादा मार्जन से जीते दूबे
सबसे ज्यादा मार्जन से भाजपा के अनिल दूबे वार्ड नंबर-24 से चुनाव जीते हैं जबकि इस वार्ड में भाजपा के कई विरोधी उनके खिलाफ काम कर रहे थे दूबे ने इस सीट पर कांग्रेस के नसरूला खान को 9 हजार 421 मत से हराया। जबकि मतदान भी सबसे ज्यादा इस सीट पर ही हुआ था।
जबकि वार्ड नंबर-15 से कांग्रेस की रविंदर कौर गुजराल सबसे कम मार्जन 71 वोट से जीती है। गुजराल ने अकाली दल की उम्मीदवार बलविंदर कौर को हराया है। जबकि 21 से भाजपा के गुरप्रीत सिंह सिर्फ 262 मार्जन से जीते हैं उन्होंने कांग्रेस के सीनियर जितेंद्र भाटिया को हराया है। भाटिया साल 2011 का चुनाव भी हार गए थे।
सबसे ज्यादा मार्जन से जीते दूबे
सबसे ज्यादा मार्जन से भाजपा के अनिल दूबे वार्ड नंबर-24 से चुनाव जीते हैं जबकि इस वार्ड में भाजपा के कई विरोधी उनके खिलाफ काम कर रहे थे दूबे ने इस सीट पर कांग्रेस के नसरूला खान को 9 हजार 421 मत से हराया। जबकि मतदान भी सबसे ज्यादा इस सीट पर ही हुआ था।
जबकि वार्ड नंबर-15 से कांग्रेस की रविंदर कौर गुजराल सबसे कम मार्जन 71 वोट से जीती है। गुजराल ने अकाली दल की उम्मीदवार बलविंदर कौर को हराया है। जबकि 21 से भाजपा के गुरप्रीत सिंह सिर्फ 262 मार्जन से जीते हैं उन्होंने कांग्रेस के सीनियर जितेंद्र भाटिया को हराया है। भाटिया साल 2011 का चुनाव भी हार गए थे।
शीला फूल सिंह लगातार तीसरी बार जीती
एमसी चुनाव परिणाम
- फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस में जहां उनके दिग्गज नेता हार गए हैं लेकिन कांग्रेस की शीला फूल सिंह ऐसी है जो कि लगातार तीसरी बार जीती है। इससे पहले वह दो बार पार्षद का चुनाव जीत चुकी है। शीला फूल सिंह एक मात्र कांग्रेस में ऐसी उम्मीदवार थी जो सबसे कम पढ़ी लिखी थी। ऐसे में शीला फूल सिंह का पार्टी में कद बढ़ गया है। इसके बाद कांग्रेस गुरबख्श रावत है जो कि लगातार दूसरी बार जीतकर आई है।
5 वकील पहुंचे नगर निगम
5 वकील उम्मीदवार चुनाव जीते हैं जो कि नगर निगम में पहुंचे है। यह सभी उम्मीदवार भाजपा के ही है। मेयर अरुण सूद, आशा जसवाल, राज बाला मलिक, देवेश मोदगिल और महेंद्र इंद्र सिद्ध वकील है। इनमे सिर्फ सिद्धू ऐसे है जो कि पहली बार चुनाव जीते हैं जबकि कांग्रेस के सभी वकील उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं।
5 वकील पहुंचे नगर निगम
5 वकील उम्मीदवार चुनाव जीते हैं जो कि नगर निगम में पहुंचे है। यह सभी उम्मीदवार भाजपा के ही है। मेयर अरुण सूद, आशा जसवाल, राज बाला मलिक, देवेश मोदगिल और महेंद्र इंद्र सिद्ध वकील है। इनमे सिर्फ सिद्धू ऐसे है जो कि पहली बार चुनाव जीते हैं जबकि कांग्रेस के सभी वकील उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं।