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जाट आंदोलनः मांगी गई सेना की 56 कंपनियां, सरकार और पुलिस अलर्ट

Wed, 15 Feb 2017 11:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 15 Feb 2017 11:06 AM IST
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bjp govt seeks 56 company of army to face haryana jat reservation protest
जाट आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में जाट आंदोलन के चलते तनाव बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए सरकार और पुलिस ने कमर कस ली है और सेना की 56 टुकड़ियां मांगी गई हैं। हरियाणा में जारी जाट आंदोलन और बढ़ते तनाव से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने केंद्र से अर्धसैनिक बल के 5600 जवान देने की मांग की है। हरियाणा सरकार ने केंद्रीय गृहमंत्री को एक विज्ञप्ति भेजकर कहा है कि प्रदेश में जाट आंदोलन को देखते हुए कई इलाकों में तनाव का माहौल है।
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इसलिए वहां कानून-व्यवस्था की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अर्धसैनिक बल के जवानों की जरूरत है। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि हरियाणा सरकार ने अर्धसैनिक बल की 56 कंपनियां मांगी हैं और गृह मंत्रालय उनके अनुरोध पर विचार कर रहा है। अर्धसैनिक बल की एक कंपनी में 100 जवान होते हैं।
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हालांकि धरना अब तक शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है, लेकिन मांगें नहीं मानी जाने पर जाट नेताओं ने 19 फरवरी के बाद आंदोलन तेज करने की धमकी दी है। गौरतलब है कि पिछले साल जाट आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था और विभिन्न स्थानों पर 30 लोगों की मौत हो गई थी और संपत्ति का नुकसान हुआ था।
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जाट-गैर जाट में अटका आरक्षण आंदोलन

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जाट आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के जल्दी सिमटने के आसार कम दिखाई दे रहे हैं। जाट आंदोलनकारियों की सात मांगों पर सरकार के नरम रुख दिखाने से भाजपा के गैर जाट नेताओं ने तल्ख तेवर अख्तियार कर लिए हैं। जाटों की सभी मांगों को मानने के लिए गैर जाट मंत्री और विधायक भी एकमत नहीं हैं। इससे सरकार असमजंस की स्थिति में है और आरक्षण आंदोलन जाट बनाम गैर जाट का रूप लेता दिख रहा है। सरकार के लिए पूर्व विधायक रोशन लाल आर्य के तीखे तेवर भी समस्या बने हुए हैं। सरकार के लिए अब दुविधा यह है कि वे गैर जाट नेताओं की सहमति के बिना जाटों की सभी मांगों को माने तो कैसे।

ढेसी कमेटी की अगली बैठक जल्द
मंगलवार को फरीदाबाद में हालांकि पांच सदस्यीय अधिकारियों की कमेटी की रिपोर्ट चर्चा के लिए रखी गई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो पाया। इससे जाट नेता आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब के जाट किसी भी समय अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के इशारे पर हरियाणा का रुख कर सकते हैं।

सरकार ने जाटों के धरनों पर बढ़ती आंदोलनकारियों की संख्या और 19 फरवरी के बलिदान दिवस के मद्देनजर अपनी तैयारियां भी तेज कर दी हैं। सरकार किसी सूरत में शांति भंग नहीं होने देना चाहती। मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति जल्दी ही जाट नेताओं के साथ दूसरे दौर की वार्ता करेगी।

मांगें नहीं मानीं तो दिल्ली बार्डर करेंगे सील : मलिक
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि आंदोलन में अन्य बिरादरियों का भी समर्थन मिल रहा है। अगर हमारी मांगों को लेकर हरियाणा में कोई भी गड़बड़ होती है तो दिल्ली के सभी बार्डर सील कर धरने शुरू कर दिए जाएंगे। पहले दौर की वार्ता के बाद उन्हें जल्दी मांगों के समाधान की उम्मीद है। सरकार उनके सात सूत्रीय मांग पत्र को गंभीरता से ले।

सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार

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जाट आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को पूरे दिन हरियाणा सरकार सूरजकुंड में रही। होटल राजहंस में दिनभर बैठकों का दौर चलता रहा लेकिन अंत तक जाट आरक्षण आंदोलन को खत्म करने की रणनीति सरकार नहीं बना पाई। कैबिनेट की बैठक में मुख्य सचिव डीएस ढेसी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय कमेटी को भी बुलाया गया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी।

पत्रकारों से वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में जो भी करना होगा, कानून के दायरे में रहकर किया जाएगा। उम्मीद है कि मामला जल्द ही सुलझ जाएगा। इसके बावजूद सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन को खत्म करने के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें मुख्य सचिव डीएस ढेसी, गृह सचिव राम निवास, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर मो. अकील समेत दो अन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जाट समाज की ओर से जो मांगें रखी गई हैं उन पर कानून के दायरे में रखकर सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। सभी मुद्दों का निपटारा बातचीत के जरिए ही किया जा सकता  है। केबिनेट की बैठक में अहम मुद्दा जाट आंदोलन ही बताया जा रहा है। इस मुद्दे पर चर्चा के लिए कैबिनेट के मंत्रियों के साथ विधायकों को भी बुलाया गया था।
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