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पार्षद कैंथ पर केस दर्ज होते ही बाहर आया बूथ घोटाले का जिन्न
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 25 Mar 2016 10:15 AM IST
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भाजपा पार्षद सतीश कैंथ
- फोटो : file
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भाजपा पार्षद सतीश कैंथ पर मामला दर्ज होने के बाद अब भाजपा की ओर से कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान हुए घोटालों की परतें भी खुलने लगी हैं। आरोप -प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है।
कांग्रेस कार्यकाल में हुए बूथ घोटाले पर एक शिकायत डीसी आफिस में दर्ज करवाई गई है, जिसमे कहा गया है कि सेक्टर-41 के कृष्णा मार्केट के बूथ अलॉटमेंट में जो घोटाला हुआ है उसके आरोपियों पर कार्रवाई की जाए। शिकायत भेजने वाले ने अपना नाम मोहम्मद इमरान बताया है।
इस शिकायत की प्रति भाजपा पार्षद सतीश कैंथ की ओर से ही मीडिया को मेल के माध्यम से भेजी गई है। मालूम हो कि इस मामले में पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल ने प्रशासक के निर्देश पर जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कांग्रेस नेताओं पर भी मिलीभगत की बात आई थी। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने पूर्व एडीसी शेरगिल के खिलाफ मानहानि का दावा भी अदालत में ठोंका हुआ है जो विचाराधीन है। शेरगिल ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी कहा था कि प्रशासन चाहे तो सीबीआई से भी जांच करवा सकता है।
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शिवराज पाटिल ने कराई थी जांच
शिकायत में कहा गया है कि साल 2010 में पूर्व प्रशासक शिवराज पाटिल ने साल 2002 से 2008 के बीच बूथाें के अलाटमेंट में कई खामियां मिलने पर जांच के निर्देश दिए थे। जांच के बाद तत्कालीन एडीसी पीएस शेरगिल ने प्रशासक को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि आवंटन में घोटाला हुआ है और प्रशासन के उच्च अधिकारियों, कुछ कांग्रेस नेताओं और पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर आवंटन में दखलअंदाजी रही। शिकायत में कहा गया है कि राजनीतिक दबाव के कारण अभी तक किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कई बूथ हो चुके हैं रद्द
पूर्व डीसी मोहम्मद शाईन के कार्यकाल में इस मामले में सेक्टर-41 कृष्णा मार्केट के कई बूथ निरस्त हो चुके हैं जबकि बूथ घोटाले में जो शिकायतकर्ता था उस पर हमला भी किया गया था।
सदन में होगा जोरदार हंगामा
इस समय यह शिकायत आने के पीछे एक कारण यह भी है कि कांग्रेस यह घोषणा कर चुकी है कि भाजपा पार्षद कैंथ पर विधवा महिला के प्लाट कब्जाने का मामला आने वाले सदन की बैठक में उठाकर मेयर अरुण सूद को घेरा जाएगा। माना जा रहा है कि इसीलिए कांग्रेस के समय में हुए घोटाले को शिकायत दर्ज करवा कर हवा दी जा रही है। उधर भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस घोटाले से 209 लाइसेंस धारकों को बूथ नहीं मिले हैं।
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कांग्रेस कार्यकाल में हुए बूथ घोटाले पर एक शिकायत डीसी आफिस में दर्ज करवाई गई है, जिसमे कहा गया है कि सेक्टर-41 के कृष्णा मार्केट के बूथ अलॉटमेंट में जो घोटाला हुआ है उसके आरोपियों पर कार्रवाई की जाए। शिकायत भेजने वाले ने अपना नाम मोहम्मद इमरान बताया है।
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इस शिकायत की प्रति भाजपा पार्षद सतीश कैंथ की ओर से ही मीडिया को मेल के माध्यम से भेजी गई है। मालूम हो कि इस मामले में पूर्व एडीसी पीएस शेरगिल ने प्रशासक के निर्देश पर जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कांग्रेस नेताओं पर भी मिलीभगत की बात आई थी। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने पूर्व एडीसी शेरगिल के खिलाफ मानहानि का दावा भी अदालत में ठोंका हुआ है जो विचाराधीन है। शेरगिल ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी कहा था कि प्रशासन चाहे तो सीबीआई से भी जांच करवा सकता है।
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शिवराज पाटिल ने कराई थी जांच
शिकायत में कहा गया है कि साल 2010 में पूर्व प्रशासक शिवराज पाटिल ने साल 2002 से 2008 के बीच बूथाें के अलाटमेंट में कई खामियां मिलने पर जांच के निर्देश दिए थे। जांच के बाद तत्कालीन एडीसी पीएस शेरगिल ने प्रशासक को सौंपी रिपोर्ट में कहा था कि आवंटन में घोटाला हुआ है और प्रशासन के उच्च अधिकारियों, कुछ कांग्रेस नेताओं और पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर आवंटन में दखलअंदाजी रही। शिकायत में कहा गया है कि राजनीतिक दबाव के कारण अभी तक किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कई बूथ हो चुके हैं रद्द
पूर्व डीसी मोहम्मद शाईन के कार्यकाल में इस मामले में सेक्टर-41 कृष्णा मार्केट के कई बूथ निरस्त हो चुके हैं जबकि बूथ घोटाले में जो शिकायतकर्ता था उस पर हमला भी किया गया था।
सदन में होगा जोरदार हंगामा
इस समय यह शिकायत आने के पीछे एक कारण यह भी है कि कांग्रेस यह घोषणा कर चुकी है कि भाजपा पार्षद कैंथ पर विधवा महिला के प्लाट कब्जाने का मामला आने वाले सदन की बैठक में उठाकर मेयर अरुण सूद को घेरा जाएगा। माना जा रहा है कि इसीलिए कांग्रेस के समय में हुए घोटाले को शिकायत दर्ज करवा कर हवा दी जा रही है। उधर भाजपा पार्षद सतीश कैंथ का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस घोटाले से 209 लाइसेंस धारकों को बूथ नहीं मिले हैं।