इनाम के लालच में तीन दोस्तों ने लगाया था 'खालिस्तानी झंडा', वीडियो बनाने वाला आरोपी गिरफ्तार
स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले प्रबंधकीय कांप्लेक्स की चौथी मंजिल पर खालिस्तानी झंडा लगाने और राष्ट्रीय ध्वज उतारकर बेअदबी करने के मामले में पुलिस ने तीन युवकों को नामजद किया है। एसएसपी हरमनबीर सिंह गिल के अनुसार इस घटना में जसपाल सिंह, इंद्रजीत सिंह निवासी गांव रौली (मोगा) और आकाशदीप सिंह निवासी साधुवाला (फिरोजपुर) शामिल थे।
सिख फॉर जस्टिस के कानूनी सलाहकार आतंकी गुरपतवंत पन्नू द्वारा इनाम देने की घोषणा के बाद तीनों युवकों ने इस वारदात को अंजाम दिया। प्राथमिक जांच में पुलिस ने आरोपी आकाशदीप सिंह (19) को बठिंडा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने कबूल किया कि वारदात को अंजाम जसपाल और इंद्रजीत ने दिया था, जबकि झंडा लगाने और उतारने का वीडियो उसी ने प्रबंधकीय कांप्लेक्स के बाहर खड़े होकर बनाया था। फिलहाल थाना सिटी वन में पुलिस ने तीनों आरोपियों को नामजद कर जसपाल और इंद्रजीत की तलाश शुरू कर दी है।
वारदात से पहले की थी रेकी
प्रबंधकीय कांप्लेक्स में लगे सीसीटीवी की फुटेज और पुलिस पूछताछ के दौरान आकाशदीप द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 14 अगस्त को वारदात से पहले जसपाल और इंद्रजीत 13 अगस्त को दोपहर प्रबंधकीय कांप्लेक्स की रेकी करने आए थे। इस दौरान डीसी कार्यालय की चौथी मंजिल तक जाने वाले रास्तों की रेकी कर योजना बनाई कि वारदात को किस तरह आसानी से अंजाम दिया जा सकता है। 14 अगस्त को सुबह तीनों दोस्त दो मोटरसाइकिलों (प्लेटिना और डिलेक्स) पर प्रबंधकीय कांप्लेक्स के बाहर पहुंचे थे।
तीनों आरोपियों पर लगा यूएपीए
एसएसपी हरमनबीर सिंह के मुताबिक एफआईआर नंबर 106 में पहले आईपीसी की धारा 115, 121, 121ए, 124ए, 153ए, 153बी, 506 समेत राष्ट्रीय ध्वज की बेअदबी करने की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था लेकिन अब तीनों आरोपियों पर यूएपीए भी लगा दी गई है। बता दें कि यूएपीए (अनलाफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) की धारा आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वालों पर लगाई जाती है। इसके अलावा पुलिस कोर्ट से आरोपियों का 30 दिन तक का रिमांड हासिल कर सकती है और इस धारा के तहत अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती।
थानेदार है जसपाल का पिता
केस में नामजद जसपाल सिंह निवासी गांव रौली, जो गांव में फोटोस्टेट की दुकान चलाता है, का पिता मुक्तसर साहिब में बतौर सब इंस्पेक्टर तैनात है। जानकारी के अनुसार जसपाल और इंद्रजीत एक ही गांव के होने के कारण दोनों दोस्त थे, जबकि गांव रौली में हीं आकाशदीप सिंह का ननिहाल है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक इंद्रजीत और जसपाल पहले भी कई आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रह चुके हैं और उनके खिलाफ पहले भी केस दर्ज हैं।
इंद्रजीत की बहन व भाई को पुलिस ने उठाया
लुधियाना में शादीशुदा आरोपी इंद्रजीत सिंह की बहन और एक नाबालिग भाई को मोगा पुलिस ने हिरासत में लिया था, ताकि दबाव बनाकर इंद्रजीत सिंह को गिरफ्तार किया जा सके। इसी प्रकार जसपाल के परिवार वालों को भी पुलिस लगातार पूछताछ के लिए हिरासत में ले रही थी। यह देख इंद्रजीत का परिवार उन्हें पुलिस से रिहा करवाने के लिए शिरोमणि अकाली दल मान के प्रमुख सिमरजीत की शरण में जा पहुंचा।
इस दौरान मान के कहने पर परिवार को साथ लेकर प्रबंधकीय कांप्लेक्स मोगा के बाहर पुलिस के खिलाफ धरना लगाने की योजना बनाई गई। गुरुवार को दोपहर जैसे ही मान ग्रुप जसकरन सिंह काहन सिंह वाला और खालसा दल ने प्रबंधकीय कांप्लेक्स के बाहर धरना दिया तो पुलिस को इसकी भनक लगते ही इंद्रजीत की बहन और भाई को रिहा कर दिया। इसके बाद जत्थेबंदियों ने धरना समाप्त कर दिया।
तीन एएसआई भी हो चुके हैं सस्पेंड
14 अगस्त को घटना के बाद मामले की प्राथमिक जांच के दौरान प्रबंधकीय कांप्लेक्स में तीन एएसआई धलविंदर सिंह, निर्मल सिंह और मक्खन सिंह की लापरवाही सामने आने पर एसएसपी ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार वारदात के समय और उससे एक दिन पहले आरोपियों द्वारा रेकी करते समय भी सुरक्षाकर्मी वहां पर तैनात नहीं थे।
जसपाल ने भेजी थी आतंकी पन्नू को वीडियो
पुलिस पूछताछ में आरोपी आकाशदीप ने बताया कि वारदात को अंजाम देने के बाद वह तीनों गांव रौली चले गए। इस दौरान उसने व्हाट्सएप के जरिये जसपाल सिंह को खालिस्तानी झंडा लगाने और तिरंगे का अपमान करने वाली वीडियो भेजी, जो जसपाल ने विदेश में आतंकी पन्नू के व्हाट्सएप नंबर पर भेज दी। फिलहाल पुलिस आकाशदीप से पूछताछ कर रही है।