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महान लेखक खुशवंत सिंह के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी
मनमोहन वशिष्ठ/अमर उजाला, कसौली (सोलन)/चंडीगढ़
Updated Wed, 05 Oct 2016 09:50 PM IST
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खुशवंत सिंह
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सदी के महान लेखक खुशवंत सिंह के प्रशंसकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। उनके नाम को एक नई पहचान दी जा रही है।
दरअसल, खुशवंत सिंह जिस पगडंडी से पैदल सफर तय करके कालका से कसौली पहुंचते थे, उस पगडंडी कालका ओल्ड ट्रेल का नाम अब देशभर में खुशवंत सिंह ट्रेल के नाम से जाना जाएगा।
14 नवंबर को खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के आगाज के साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुशवंत सिंह ट्रेल का लोकार्पण करेंगे। यह जानकारी उनके बेटे राहुल सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में दी है।
उन्होंने कहा कि खूबसूरत कसौली में सिंह अकसर सुकून के पलों में इसी मार्ग पर चिंतन के साथ एडवेंचर करते हुए अपनी कोठी राजविला तक का सफर तय करते थे।
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दरअसल, खुशवंत सिंह जिस पगडंडी से पैदल सफर तय करके कालका से कसौली पहुंचते थे, उस पगडंडी कालका ओल्ड ट्रेल का नाम अब देशभर में खुशवंत सिंह ट्रेल के नाम से जाना जाएगा।
14 नवंबर को खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के आगाज के साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुशवंत सिंह ट्रेल का लोकार्पण करेंगे। यह जानकारी उनके बेटे राहुल सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत में दी है।
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उन्होंने कहा कि खूबसूरत कसौली में सिंह अकसर सुकून के पलों में इसी मार्ग पर चिंतन के साथ एडवेंचर करते हुए अपनी कोठी राजविला तक का सफर तय करते थे।
हर साल उनकी याद में होता है लिटफेस्ट
खुशवंत सिंह
खुशवंत सिंह कसौली से कालका जाने के लिए इसी रास्ते का प्रयोग करते थे। एक ओर हड़ाली पाकिस्तान में उनके प्राइमरी स्कूल की मरणोपरांत उनकी राख से मरम्मत हुई है, वहीं उनके नाम पर कालका ओल्ड ट्रेल का लोकार्पण होना गर्व की बात है।
खुशवंत सिंह ने ट्रेन टू पाकिस्तान जैसी कालजयी पुस्तक और अन्य ऐतिहासिक किताबें भी कसौली में ही लिखी हैं। यहां की आबोहवा से उन्हें बेहद प्यार था और कहीं न कहीं अपने लेखों में वे कसौली और वहां के अपने मित्रों का जिक्र भी करते थे।
उनके इस योगदान को देखते हुए उनके बेटे राहुल सिंह ने उनके नाम से ही लिटफेस्ट की शुरुआत उनके जिंदा रहते ही 2012 में कर दी थी और कसौली को इसके लिए चुना।
खुशवंत सिंह ने ट्रेन टू पाकिस्तान जैसी कालजयी पुस्तक और अन्य ऐतिहासिक किताबें भी कसौली में ही लिखी हैं। यहां की आबोहवा से उन्हें बेहद प्यार था और कहीं न कहीं अपने लेखों में वे कसौली और वहां के अपने मित्रों का जिक्र भी करते थे।
उनके इस योगदान को देखते हुए उनके बेटे राहुल सिंह ने उनके नाम से ही लिटफेस्ट की शुरुआत उनके जिंदा रहते ही 2012 में कर दी थी और कसौली को इसके लिए चुना।
नाइन मील के नाम से जाना जाता है मार्ग
खुशवंत सिंह
कालका से लेकर कसौली तक यह मार्ग नाइन मील के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि अंग्रेजों के भारत में आने के बाद इस मार्ग को तैयार किया गया था। 1857 के हिमाचल के विद्रोह में भी इसका जिक्र मिलता है। यह पगडंडी कई गांवों के पैदल रास्तों को जोड़ती है, जिसे अब खुशवंत सिंह के नाम से जाना जाएगा।
इनके प्रोग्राम फाइनल
लिटफेस्ट में जेएंडके के पूर्व सीएम अमर अब्दुल्ला सहित मोंटेक सिंह आहलुवालिया, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अभिनेता दलीप ताहिल, फिल्म मेकर विजय बेदी, जनरल केजे सिंह, लेखक राहुल पंडिता, पत्रकार हरिंद्र बवेजा, फिल्म मेकर शिव कुनाल वर्मा, युक्ति चौधरी, इतिहासकार दिलीप साइमन, अनिल धरकर जैसी हस्तियां शिरकत करने वाली हैं। बालीवुड अभिनेता दलीप ताहिल नुपुर पंत के साथ लाइव प्रस्तुति देंगे। संगीत महफिल में पंजाबी पोप सिंगर जसबीर जस्सी अपनी दमदार प्रस्तुतियां देंगे।
इनके प्रोग्राम फाइनल
लिटफेस्ट में जेएंडके के पूर्व सीएम अमर अब्दुल्ला सहित मोंटेक सिंह आहलुवालिया, फिल्मकार श्याम बेनेगल, अभिनेता दलीप ताहिल, फिल्म मेकर विजय बेदी, जनरल केजे सिंह, लेखक राहुल पंडिता, पत्रकार हरिंद्र बवेजा, फिल्म मेकर शिव कुनाल वर्मा, युक्ति चौधरी, इतिहासकार दिलीप साइमन, अनिल धरकर जैसी हस्तियां शिरकत करने वाली हैं। बालीवुड अभिनेता दलीप ताहिल नुपुर पंत के साथ लाइव प्रस्तुति देंगे। संगीत महफिल में पंजाबी पोप सिंगर जसबीर जस्सी अपनी दमदार प्रस्तुतियां देंगे।