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वीरभद्र सिंह के भतीजे अकांक्ष मर्डर केस में आया नया मोड़, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Dec 2017 09:24 AM IST
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Akansh Murder
- फोटो : File Photo
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हिमाचल के मुख्यमंत्री की पत्नी के भतीजे अकांक्ष हत्याकांड में शिकायतकर्ता, अहम गवाह और मृतक के कजन अदम्य सिंह राठौड़ का बुधवार को जिला अदालत में बचाव पक्ष ने दो सुनवाइयों के बाद क्रास एग्जामिनेशन पूरा किया। इस दौरान अदम्य की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत, मजिस्ट्रेट के सामने 164 के बयान और कोर्ट में दी गवाही में कई मतभेद सामने आए। वहीं क्रास एग्जामिनेशन के दौरान अदम्य ने स्वीकार किया कि उसने उस वक्त पुलिस को जानबूझकर पूरे तथ्य नहीं बताए थे।
बचाव पक्ष ने अदम्य के तीनों बयानों में यह साबित करने का प्रयास किया कि सभी शिकायतों में अदम्य ने पहले बलराज सिंह रंधावा का नाम लिया है। इसके बाद हरमेहताब सिंह उर्फ फरीद का। बचाव पक्ष के कई सवालों के दौरान अदम्य झुंझुला उठे तो अदालत में मौजूद जज को हस्तक्षेप करना पड़ा। साथ ही अदम्य को उत्तेजित न होते हुए प्रोटोकॉल के तहत सभी सवालों के जवाब जरूरी देने को कहा।
बुधवार को केस में अहम गवाह और शिकायतकर्ता अदम्य का बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट एएस सुखीजा ने क्रास एग्जामिनेशन किया। इस दौरान अदम्य बचाव पक्ष के सवालों के सामने कई बार असहज महसूस नजर आया। पुलिस शिकायत और गवाही में अंतर पर अदम्य ने कहा कि, उसका भाई उस वक्त अस्पताल में था और उसे याद नहीं कि उसने उस हालात में पुलिस को क्या शिकायत दी। अदम्य 9 फरवरी की रात घटित घटना को लेकर बचाव पक्ष के कई सवालों पर केवल यहीं जवाब दे सका कि ‘उसे कुछ याद नहीं है।’
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बचाव पक्ष ने अदम्य के तीनों बयानों में यह साबित करने का प्रयास किया कि सभी शिकायतों में अदम्य ने पहले बलराज सिंह रंधावा का नाम लिया है। इसके बाद हरमेहताब सिंह उर्फ फरीद का। बचाव पक्ष के कई सवालों के दौरान अदम्य झुंझुला उठे तो अदालत में मौजूद जज को हस्तक्षेप करना पड़ा। साथ ही अदम्य को उत्तेजित न होते हुए प्रोटोकॉल के तहत सभी सवालों के जवाब जरूरी देने को कहा।
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बुधवार को केस में अहम गवाह और शिकायतकर्ता अदम्य का बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट एएस सुखीजा ने क्रास एग्जामिनेशन किया। इस दौरान अदम्य बचाव पक्ष के सवालों के सामने कई बार असहज महसूस नजर आया। पुलिस शिकायत और गवाही में अंतर पर अदम्य ने कहा कि, उसका भाई उस वक्त अस्पताल में था और उसे याद नहीं कि उसने उस हालात में पुलिस को क्या शिकायत दी। अदम्य 9 फरवरी की रात घटित घटना को लेकर बचाव पक्ष के कई सवालों पर केवल यहीं जवाब दे सका कि ‘उसे कुछ याद नहीं है।’
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बचाव पक्ष के कई सवालों पर अदम्य ने स्वीकार किया कि उसने उस वक्त पुलिस को जानबूझकर पूरे तथ्य नहीं बताए थे। वहीं बचाव पक्ष ने बयानों में अंतर को साबित करते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि, अदम्य ने सभी जगह दिए बयानों में बलराज का नाम लिया है।
इनमें फरीद का नाम सिर्फ उसमें है जिसमें उसने कहा था कि, उसने ही बलराज को कहा था कि अकांक्ष अभी मरा नहीं है और उस पर फिर से गाड़ी चढ़ाओ। इसके अलावा कहीं भी फरीद का नाम नहीं लिया गया है। सभी जगह बलराज सिंह रंधावा का नाम है। बलराज के गिरफ्तार न होने पर उसने फरीद का नाम लिया है।
वहीं बचाव पक्ष के अनुसार अदम्य ने पूरे घटनाक्रम के दौरान खुद वहां मौजूद होने की बात कही थी, जबकि वह कई सवालों के जवाब नहीं दे सका। इससे कथित तौर पर ऐसा लगता है कि वह जब अकांक्ष को बीएमडब्ल्यू कार से रौंदे जाने का आरोप है, उस वक्त वह वहां था ही नहीं।
कोर्ट में खुलवाई सीलबंद धारा 164 के तहत दिए बयान की सील
बचाव पक्ष ने अदालत में अदम्य के धारा 164 के तहत दिए सीलबंद बयान को खुलवाया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अदम्य के मजिस्ट्रेट के समक्ष फरवरी में दिए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान को मंगाया गया। इसके बाद अदालत ने इन सीलबंद बयान को खुलवाया और इन्हें पढ़कर अदम्य ने अपने जवाब दिए। इन बयान और अदालत में दी गई गवाही में कई जगह मतभेद सामने आए।
इनमें फरीद का नाम सिर्फ उसमें है जिसमें उसने कहा था कि, उसने ही बलराज को कहा था कि अकांक्ष अभी मरा नहीं है और उस पर फिर से गाड़ी चढ़ाओ। इसके अलावा कहीं भी फरीद का नाम नहीं लिया गया है। सभी जगह बलराज सिंह रंधावा का नाम है। बलराज के गिरफ्तार न होने पर उसने फरीद का नाम लिया है।
वहीं बचाव पक्ष के अनुसार अदम्य ने पूरे घटनाक्रम के दौरान खुद वहां मौजूद होने की बात कही थी, जबकि वह कई सवालों के जवाब नहीं दे सका। इससे कथित तौर पर ऐसा लगता है कि वह जब अकांक्ष को बीएमडब्ल्यू कार से रौंदे जाने का आरोप है, उस वक्त वह वहां था ही नहीं।
कोर्ट में खुलवाई सीलबंद धारा 164 के तहत दिए बयान की सील
बचाव पक्ष ने अदालत में अदम्य के धारा 164 के तहत दिए सीलबंद बयान को खुलवाया। बचाव पक्ष की ओर से अदालत में अदम्य के मजिस्ट्रेट के समक्ष फरवरी में दिए सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान को मंगाया गया। इसके बाद अदालत ने इन सीलबंद बयान को खुलवाया और इन्हें पढ़कर अदम्य ने अपने जवाब दिए। इन बयान और अदालत में दी गई गवाही में कई जगह मतभेद सामने आए।