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'हम बाइबल पढ़ते हैं पर हम हिंदू हैं, ईसाई नहीं'
ब्यूरो/अमर उजाला, नारनौंद
Updated Sat, 17 Jan 2015 04:30 PM IST
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गांव लोहारी राघो में पिछले काफी दिनों से कुछ लोगों द्वारा ईसाई धर्म की पुस्तक बाइबल का पाठ करने का मामला सामने आया है।
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बाइबल का पाठ करने वाले ग्रामीणों का मानना है कि इस पुस्तक को पढ़ने से आत्मिक शांति के अलावा शरीर के कष्ट भी दूर होते हैं। हालांकि लोगों ने यह साफ कर दिया है कि वो पुस्तक जरूर पढ़ रहे हैं लेकिन वो धर्म परिवर्तन के बिल्कुल खिलाफ हैं और आगे भी हिंदू धर्म में ही रहेंगे।
ग्रामीण सेवा सिंह, शिवकुमार, बिजेन्द्र, सोना राम, ओमप्रकाश इत्यादि ने बताया कि वो काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और मानसिक तनाव में थे। इसी बीच किसी ने उन्हें बाइबल पुस्तक का पाठ प्रतिदिन करने की सलाह दी।
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उन्होंने कहा कि उन्होंने सलाह को मानते हुए पुस्तक पढ़नी शुरू कर दी। धर्म परिवर्तन के बारे में बोलते हुए लोगों ने कहा कि कोई भी धर्म बुरा नहीं है और सब धर्म हमें यही शिक्षा देते हैं कि आपस में मिल जुलकर रहना चाहिए, लेकिन यह हमारी छोटी मानसिकता का ही उदाहरण है कि एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों को गलत निगाहों से देखते हैं।
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उन्होंने कहा कि धर्म तो हमें आपस में जोड़ने का काम करते हैं ना कि तोड़ने का। इसलिए वो अपना धर्म नहीं बदल रहे हैं। वो हिन्दू धर्म में विश्वास रखते हैं और हिन्दू ही रहेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी धर्म की पुस्तक पढ़ने से धर्म परिवर्तन नहीं होता। अच्छी पुस्तकें पढ़ने का अधिकार सबको है। इसलिए वो बाइबल पुस्तक पढ़ रहे हैं। कुछ लोग बेवजह से ही इस मामले को धर्म परिवर्तन का तूल दे रहे हैं, जोकि सरासर गलत है।