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रशिया की सबसे ऊंची चोटी पर लहराएगा 'बेटी बचाओ' का झंडा

Tue, 25 Aug 2015 03:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 25 Aug 2015 03:14 PM IST
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beti bachao flag will hosted on mount elbrus hill

साउथ अफ्रीका की किलिमंजेरो के बाद अब रशिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रूस पर बेटी बचाओ का झंडा लहराएगा। हरियाणा की बहादुर बेटी रेखा चौकन पर अब यह सपना पूरा करने को तैयार हैं। वह हाल ही में साउथ अफ्रीका में मिली जीत से काफी उत्साहित हैं और आगे भी यह सफर जारी रखना चाहती हैं।

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जानकारी के अनुसार पढ़ाई लिखाई पूरी करने के बाद रेखा पिछले पांच साल से बंगलूरू की अल्टीसोस बिजनेस कंपनी में बतौर लीड प्रोडक्ट एनालिसिस के तौर पर कार्यरत हैं। 13 अगस्त की सुबह किलिमंजारो की चोटी फतह करने के बाद रेवाड़ी पहुंची रेखा चौकन अब फिर से बंगलूरू अपने काम पर लौट रही हैं।
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उन्होंने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि हरियाणा प्रदेश में लड़कियों की काफी कमी है। हाल ही में उनकी बड़ी बहन सुनीता को जिले का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। वह भी उनके इस कैंपेन को सपोर्ट करना चाहती थी, जिसके चलते वह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ संदेश लेकर किलिमंजेरो की चोटी का फतह करने साउथ अफ्रीका पहुंची थी। बड़ी बहन से चोटी पर चढ़ने के टिप्स न मिले होते तो शायद ही यह उपलब्धि हासिल कर पाती।
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रेखा ने साझा किए किलिमंजेरो के अनुभव

beti bachao flag will hosted on mount elbrus hill

रेखा ने बताया कि एक वक्त लगा जब मैं अपने साथियों के साथ अपनी मंजिल से केवल 500 मीटर ही दूर थी। एक एनआरआई साथी गौरी की रास्ते में तबियत खराब होने के कारण उसे बीच में ही अपना सफर छोड़ना पड़ा। वहीं पांच अन्य साथी भी दवाएं खाने के बावजूद काफी थकने के कारण आराम करने के लिए रास्ते में रुक गए थे।

मेरी भी हिम्मत जवाब दे रही थी, लग रहा था अब उससे यह नहीं होगा। 5895 मीटर की ऊंचाई पर बर्फीली हवाओं और माइनस 39 डिग्री तापमान पर ऑक्सीजन की कमी होने से सांस लेने में भी काफी दिक्कत हो रही थी। लेकिन मंजिल सामने दिखाई दे रही थी। शरीर थक चुका था, लेकिन थकने के बावजूद हौंसला नहीं छोड़ा और धीरे-धीरे मंजिल को पाने के लिए आगे की ओर बढ़ती चली गई।

13 अगस्त की रात बेस कैंप से चले और सुबह 7 बजे चोटी पर पहुंचे तो उस समय ऐसा लगा कि कोई बड़ा सपना पूरा हो गया हो। जीत की खुशी का अहसास था। इस उपलब्धि को पाने के लिए 121 घंटे माइनस 7 से माइनस 39 डिग्री तापमान के बीच चढ़ाई की थी। यह वाकई आसान नहीं था, लेकिन हौंसले व बहन के द्वारा दिए गए टिप्स मेरी इस चढ़ाई में मेरे काम आए।

खाने से लेकर कपड़े पहनने तक के दिए थे टिप्स

रेखा बताती हैं कि बड़ी बहन सुनीता ने उसे अपने तजुर्बे के आधार पर खाने से लेकर कपड़े पहनने तक के टिप्स दिए थे। चढ़ाई के दौरान 4-5 लीटर पानी पीना है। खाने का मन न भी हो तो भी खाना जरूर खाना है। योजना के अनुसार किस समय किस तरह के कपडे पहनने हैं, यह भी बताया था।

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