37 साल बाद सपना साकार, अब क्रिकेट की दुनिया में चमकेगा चंडीगढ़, बीसीसीआई ने दी मान्यता
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क्रिकेटरों के लिए शुक्रवार को ऐसी खबर आई, जिसका इंतजार 37 साल से था। बीसीसीआई ने चंडीगढ़ की क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता दे ही दी। अब सिटी की अपनी क्रिकेट टीम होगी। जैसे ही इसकी सूचना शहर में फैली, युवा क्रिकेटरों के चेहरे खिल उठे।
खिलाड़ियों ने लड्डू बांट कर खुशियां मनाईं। यूटी क्रिकेट एसोएिशन के प्रधान संजय टंडन ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। सिटी के हर क्रिकेटर और उनके परिवार के लिए यह सबसे बड़ा दिन है। बीसीसीआई से मान्यता मिलने का सपना कई साल से लोग देख रहे थे।
टंडन ने बताया मुझे बीसीसीआई की ओर से सिटी की क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता मिलने की सूचना दी गई। हमारे खिलाड़ी अब अपनी टीम से खेलेंगे। दूसरे राज्यों की टीमों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अब मुझे और एसोसिएशन को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
संजय टंडन ने कहा कि मान्यता मिलने के बाद हमारे लिए सबसे बड़ा चैलेंज यह होगा सिटी से ऐसे खिलाड़ी को उभारना, जो सीधे नेशनल टीम का हिस्सा बनें। इसके बाद ही बीसीसीआई को अहसास होगा कि उन्होंने सिटी को मान्यता देकर कोई गलती नहीं की। हमारे पास काफी क्रिकेट के मैदान हैं और अनुभवी कोच भी हैं।
आईपीएल, वनडे, रणजी की टीम
टंडन ने कहा कि अब चंडीगढ़ की अपनी टीम बनेगी। सिटी में क्रिकेट के लिए इतना बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है कि अब हमें इंडियन प्रीमियम लीग (आईपीएल) के मुकाबले कराने का मौका मिलेगा। अभी यूटी क्रिकेट एसोसिएशन को अंडर 23 की टीम बनाने को कहा गया है। कुछ दिनों में हमें रणजी टीम बनाने की अनुमति भी मिल जाएगी। अब तक चंडीगढ़ के खिलाड़ी अपने पड़ोसी राज्यों हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश की रणजी टीमों में खेलते आ रहे थे। अब खिलाड़ियों को चंडीगढ़ की रणजी टीम में खेलने का मौका मिलेगा।
नामी चेहरे दूसरे राज्यों से खेले
अब तक शहर के खिलाड़ी पंजाब, हरियाणा से लेकर हिमाचल की प्रथम श्रेणी टीमों में खेलने को मजबूर हैं। जूनियर टूर्नामेंट, रणजी ट्राफी, देवधर ट्रॉफी तक में शहर के खिलाड़ी चंडीगढ़ के बैनर तले खेलने से वंचित थे। कपिल देव, चेतन शर्मा, यशपाल शर्मा, अशोक मल्होत्रा, युवराज सिंह, दिनेश मोंगिया, प्रशांत चोपड़ा, वीआरवी सिंह, उदय कौल, सिद्धार्थ कौल, मनन वोहरा, गुरिंदर सिंह यह सभी नेशनल और इंटरनेशनल खिलाड़ी चंडीगढ़ की ही देन हैं। यह सभी चंडीगढ़ की टीम न बन पाने के कारण बाहरी राज्यों की टीमों से खेले। सिटी के करीब 200 क्रिकेटर पड़ोसी राज्यों की रणजी टीमों से खेले हैं।
मान्यता के लिए किया लंबा संघर्ष
टंडन ने बताया कि बीसीसीआई से मान्यता के लिए लगभग 37 साल तक संघर्ष किया गया। यूटी क्रिकेट एसोसिएशन 1982 में बनाई गई थी। सिटी के स्टार क्रिकेटर कपिल देव भी इससे जुड़े रहे। हमारी एसोसिएशन मान्यता पाने के लिए लगातार प्रयास कर रही थी।
पुडुचेरी भी यूनियन टेरिटेरी में आता है। जब उन्हें बीसीसीआई से मान्यता मिली तो हमने भी सुप्रीम कोर्ट में केस किया। वहां हमें कहा गया कि आप मान्यता पाने के लिए बीसीसीआई को बेहतरीन प्रस्ताव दें। इसके बाद हमने 90 पेजों का प्रस्ताव बीसीसीआाई को भेजी।
इस साल मार्च में बीसीसीआई ने अपनी दो सदस्यीय कमेटी को चंडीगढ़ भेजा। इसके मेंबर सबा करीम और अंशुमन गायकवाड़ थे। चंडीगढ़ की तीन एसोसिएशन सीसीए पंजाब, सीसीए हरियाणा और यूटी क्रिकेट एसोसिएशन ने मान्यता को लेकर दावा ठोका।
यहां से पूरी रिपोर्ट बनाने के बाद दो सदस्यीय कमेटी ने निर्देश दिए कि अगर सिटी की टीम बनाना चाहते हैं तो तीनों एसोसिएशन मिल जाएं। सीसीए पंजाब बुधवार को यूटी क्रिकेट एसोसिएशन से मिली, लेकिन सीसीए हरियाणा नहीं मिली। आखिर में बीसीसीआई ने सिटी के क्रिकेटरों के भले के लिए यूटी क्रिकेट एसोसिएशन का मान्यता दे ही दी।