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पूरे पैसे लेकर भेजा अधूरा सामान, अब हर्जाना
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 05 Nov 2013 03:53 PM IST
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एक बाथ फिटिंग सप्लायर ने हिमाचल प्रदेश निवासी एक व्यक्ति से ज्यादा कीमत और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूले। केस की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता अदालत ने सप्लायर को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को बीस हजार रुपये मुआवजा दे। साथ ही उसके 1.33 लाख रुपये नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाए।
कुल्लू निवासी श्याम सुंदर सूद ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि उसने फेज-नौ स्थित ग्लैमर बाथ इंप्रेशन को कुछ बाथरूम फिटिंग का ऑर्डर दिया था।
इसकी कीमत 2.32 लाख रुपये बनती थी। सूद ने 1.10 लाख रुपये एडवांस दे दिया, बाकी रकम माल भेजने के समय दी जानी थी। परंतु बाद में उससे कहा गया कि पेमेंट पहले दो।
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सूद ने सितंबर-11 में बाकी रकम भी चुका दी। उसके बाद चार महीने तक डिलिवरी नहीं दी गई। जब डिलिवरी मिली तो सामान ऑर्डर के मुताबिक नहीं था। क्रीम रंग के बाथ एन्क्लोजर ऑर्डर किए गए थे, सफेद भेज दिए गए।
दो शॉवर की जगह एक ही भेजा गया। प्रेशर पंप काम नहीं कर रहा था, उसे भी बदला नहीं गया। शिकायतकर्ता सूद ने आरोप लगाया कि 2.32 लाख रुपये की पेमेंट लेकर उसे 98,053 रुपये का बिल दिया गया, जो 1.24 लाख कम था।
सप्लायर ने अपने जवाब में ज्यादा रकम वसूलने के आरोप को नकारा। साथ ही कहा कि उपभोक्ता ने प्रेशर पंप की खराबी के बारे में कुछ नहीं बताया। शॉवर कम भेजने के आरोप को भी नकारा।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सप्लायर को 1.24 लाख रुपये कम रकम का बिल बनाने और 9050 रुपये ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने का दोषी पाया। साथ ही यह सारी रकम उपभोक्ता को दस जनवरी-12 से नौ फीसदी ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया।
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कुल्लू निवासी श्याम सुंदर सूद ने उपभोक्ता अदालत में शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया था कि उसने फेज-नौ स्थित ग्लैमर बाथ इंप्रेशन को कुछ बाथरूम फिटिंग का ऑर्डर दिया था।
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इसकी कीमत 2.32 लाख रुपये बनती थी। सूद ने 1.10 लाख रुपये एडवांस दे दिया, बाकी रकम माल भेजने के समय दी जानी थी। परंतु बाद में उससे कहा गया कि पेमेंट पहले दो।
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सूद ने सितंबर-11 में बाकी रकम भी चुका दी। उसके बाद चार महीने तक डिलिवरी नहीं दी गई। जब डिलिवरी मिली तो सामान ऑर्डर के मुताबिक नहीं था। क्रीम रंग के बाथ एन्क्लोजर ऑर्डर किए गए थे, सफेद भेज दिए गए।
दो शॉवर की जगह एक ही भेजा गया। प्रेशर पंप काम नहीं कर रहा था, उसे भी बदला नहीं गया। शिकायतकर्ता सूद ने आरोप लगाया कि 2.32 लाख रुपये की पेमेंट लेकर उसे 98,053 रुपये का बिल दिया गया, जो 1.24 लाख कम था।
सप्लायर ने अपने जवाब में ज्यादा रकम वसूलने के आरोप को नकारा। साथ ही कहा कि उपभोक्ता ने प्रेशर पंप की खराबी के बारे में कुछ नहीं बताया। शॉवर कम भेजने के आरोप को भी नकारा।
अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए सप्लायर को 1.24 लाख रुपये कम रकम का बिल बनाने और 9050 रुपये ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन चार्ज वसूलने का दोषी पाया। साथ ही यह सारी रकम उपभोक्ता को दस जनवरी-12 से नौ फीसदी ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया।