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Hindi News ›   Chandigarh ›   Baroda bypoll result 2020: Yogeshwar Dutt loses Assembly elections for second time from Baroda

बरोदा उपचुनाव : कुश्ती में पहलवान योगेश्वर दत्त हिट, सियासी अखाड़े में अब तक 'अनफिट'

Wed, 11 Nov 2020 02:12 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Nov 2020 02:12 PM IST
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Baroda bypoll result 2020: Yogeshwar Dutt loses Assembly elections for second time from Baroda
कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक इंदुराज नरवाल और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। - फोटो : अमर उजाला

कुश्ती में प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाने वाले बरोदा के पहलवान योगेश्वर दत्त एक बार फिर चुनावी दंगल में चित हो गए। देश को ओलंपिक पदक तक दिला चुके योगेश्वर दत्त चुनावी राजनीति में फिट नहीं हो पाए। भाजपा विरोधी मतदाताओं की जुगलबंदी ने पहलवान को धोबी पछाड़ दे दी। लगातार दूसरा मौका है, जब योगेश्वर को हार का मुंह देखना पड़ा।

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वह 2019 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस के तत्कालीन विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा से हार गए थे। इस साल अप्रैल में श्रीकृष्ण की मृत्यु के कारण खाली हुई सीट पर भाजपा ने फिर पहलवान पर ही दांव खेला। पिछली बार भाजपा, जजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था लेकिन इस बार गठबंधन सरकार के दोनों दल साथ आकर भी कांग्रेस से यह सीट नहीं छीन पाए।
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कांग्रेस सातवीं बार इस सीट को जीतने में सफल रही। इनेलो, लोकदल ने इस सीट को छह बार जीता है। मगर, पार्टी व परिवार में टूट के बाद से इनेलो का खराब प्रदर्शन जारी है। इस उपचुनाव में इनेलो प्रत्याशी भले 5003 वोट लेने में सफल रहे हों पर न तो जमानत बची, न ही तीसरे नंबर पर आ पाए। इनेलो प्रत्याशी जोगेंद्र मलिक को 2019 विधानसभा चुनाव में 1000 से भी कम वोट मिले थे। इस चुनाव में वह पांच गुणा से ज्यादा वोट तो ले गए पर विरोधियों को कड़ी टक्कर नहीं दे पाए। उन्हें कुल वोट के 4.07 फीसदी मत ही मिले हैं।

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लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी सुप्रीमो राजकुमार सैनी 5611 वोट लेकर तीसरा स्थान झटकने में सफल रहे, हालांकि जमानत उनकी भी जब्त हो गई है। सैनी को 4.56 प्रतिशत मत मिले हैं। सैनी ने बरोदा में भाजपा को खासा नुकसान पहुंचाया। सैनी मतदाताओं के साथ अन्य वोट झटककर उन्होंने योगेश्वर को मिलने वाले मतों में अच्छी-खासी सेंध लगाई। सैनी ने भाजपा से बागी होकर ही अपनी अलग पार्टी बनाई है। 2014 में वह कुरुक्षेत्र सीट से भाजपा की टिकट पर ही लोकसभा सांसद बने थे लेकिन इसके बाद सैनी के शीर्ष नेतृत्व से मतभेद बढ़ते गए और आखिर में उन्होंने पार्टी छोड़ दी।

किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी
जाट आरक्षण आंदोलन के समय से जाट समुदाय और भाजपा के रिश्तों में चली आ रही खटास अभी तक मिठास में नहीं बदल पाई है। जाट नेता अब भी आंदोलन के समय किए गए वादे पूरा न करने के आरोप लगाते हैं। 2019 विधानसभा चुनाव में भी जाट समुदाय ने भाजपा के दिग्गज मंत्रियों कैप्टन अभिमन्यु, ओपी धनखड़ व उस समय के भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला को हार का स्वाद चखा दिया था। उस चुनाव में भाजपा के कुछ जाट प्रत्याशी जीते भी, जिसके पीछे उनका गैर विवादित होना व समुदाय में अच्छी पकड़ काम आई। बरोदा उपचुनाव से कुछ समय पहले ही तीन नए कृषि कानूनों का बनना भी भाजपा के लिए नुकसानदेह रहा। बरोदा किसान बहुल क्षेत्र है, इसलिए किसानों ने जमकर भाजपा की खिलाफत की। वह कृषि कानूनों को अपने हित में बिल्कुल नहीं मान रहे। 

जींद उपचुनाव का इतिहास दोहराने में नाकाम
भाजपा ने जींद में 52 साल बाद 2018 उपचुनाव में कमल खिलाया था। इनेलो के वयोवृद्ध विधायक हरिचंद मिड्ढा की मृत्यु से यह सीट खाली हुई थी। भाजपा ने यहां कृष्ण मिड्ढा को इनेलो से अपने पाले में लाकर चुनाव लड़वाया व बड़े अंतर से सीट जीती थी। उस समय भाजपा ने जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला व कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला को पराजित किया था। जाटलैंड में यह भाजपा की बड़ी जीत थी। भाजपा बरोदा में भी यही करिश्मा करना चाह रही थी लेकिन सफल नहीं हो पाई।

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