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बरगाड़ी: सीबीआई बोली- पंजाब सरकार ने केस हमें सौंप दिया, अब दखल देने का अधिकार नहीं

Fri, 30 Aug 2019 12:34 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली/चंडीगढ़ (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली/चंडीगढ़ (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 30 Aug 2019 12:34 AM IST
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Bargari Sacrilege Case, Central Bureau of Investigation, Punjab Government
सीबीआई (फाइल फोटो)

बरगाड़ी बेअदबी मामले में सीबीआई ने फिर पंजाब सरकार के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है। पंजाब सरकार द्वारा सीबीआई अदालत में क्लोजर रिपोर्ट न देने के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। इसके जवाब में गुरुवार को सीबीआई ने अदालत में कहा कि उनकी तरफ से केस के बारे में समय-समय पर पंजाब सरकार को अगवत करवाया जाता रहा है। 

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इस मामले में अब राज्य पुलिस को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि पंजाब सरकार द्वारा केस सीबीआई को सौंप दिया गया है। ऐसे में इस मामले में सीबीआई ही जांच करेगी और कानूनी जंग लड़ेगी। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली तारीख 19 सितंबर तय कर दी है। 
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जानकारी के मुताबिक सीबीआई की विशेष अदालत में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका में कहा गया था कि सीबीआई ने उनके साथ केस नंबर आरसी-13, 14 और 15 की जांच संबंधी जानकारी साझा नहीं की जबकि ये बेअदबी के सबसे बड़े मामले थे। वहीं सीबीआई ने अदालत में सरकार के दावे का विरोध करते हुए कहा कि इन केसों के बारे में सरकार को विभिन्न माध्यमों से बताया गया। 
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ऐसी कोई बात नहीं है। सीबीआई ने अदालत में कहा कि इन केसों को सुलझाने के लिए सीबीआई ने कई पहलुओं पर जांच की। ये सारे मामले आपस में जुड़े हुए हैं इसलिए इनकी ज्वाइंट क्लोजर रिपोर्ट फाइल की गई थी। 

डीजीपी के सीबीआई को पत्र की गलत व्याख्या न करें : एजी

पंजाब पुलिस के डीजीपी द्वारा सीबीआई को लिखे पत्र से उपजे विवाद के संदर्भ में, गुरुवार को पंजाब के महाधिवक्ता अतुल नंदा ने पूरे प्रकरण में सीबीआई के आचरण पर कहा कि बरगाड़ी बेअदबी मामले की जांच को गलत तरीके से समझने की बजाय, मामले में सीबीआई की भूमिका से संबंधित तथ्यों की जांच करके ही उनके तार्किक निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। गौरतलब है कि पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए। 

एजी ने कहा कि पंजाब पुलिस के पत्र में सीबीआई को उसकी क्लोजर रिपोर्ट पर रोक लगाने के लिए कहा गया था। राज्य सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं किया गया, जो बारगाड़ी मामलों की जांच पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब पुलिस ने जाहिर तौर पर सिख समुदाय के विश्वास और मान्यताओं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में गहरी आस्था रखने वाले सभी संवेदनशील मामलों में जांच के भाग्य के बारे में गहरी चिंता की भावना से प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, क्योंकि सीबीआई ने बरगाड़ी मामलों से संबंधी फाइलें राज्य सरकार को वापस नहीं की थी, जिसके बगैर एसआईटी के हाथ पूरी तरह से बंधे थे।

 नंदा ने कहा कि पंजाब पुलिस के डीजीपी सीबीआई द्वारा की गई जांचों में विभिन्न गैप और कमियों के बारे में केंद्रीय एजेंसी को सूचित करना चाहते थे। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जिन महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई थी और जांच जिन कार्यों व मामले की वजह से अटकी हुई थी, का जिक्र करते हुए सीबीआई से कहा गया था कि सभी कोणों और पहलुओं की जांच करके इसके तार्किक अंत तक पहुंचा जाए।

एजी ने आगे कहा कि जांच बंद किए जाने के बाद राज्य की ओर से केस फाइलों की वापसी के लिए बार-बार औपचारिक अनुरोध किए जाने के बावजूद, सीबीआई ने फाइलें नहीं लौटाईं, जिसके चलते राज्य पुलिस को इस तरह से प्रतिक्रिया देनी पड़ी।

नंदा ने कहा, स्पष्ट रूप से, पूरे मामलों को लेकर अपनाए जा रहे तरीकों को गलत ढंग से नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि प्रयासों को कुशलतापूर्वक अपने तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना चाहिए। बरगाड़ी मामलों के संबंध में लोगों द्वारा दिए जा रहे विभिन्न बयानों और विचारों पर अन्यथा तर्क दिए बिना, नंदा ने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पंजाब के नागरिक सही तथ्यों से अवगत हों, जो रिकॉर्ड के जरिए सामने आए हैं।

खैरा ने यह कहा 
पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैरा ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि सीबीआई द्वारा मोहाली की सीबीआई कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट फाइल किए जाने के बाद पंजाब पुलिस के डीजीपी इन्वेस्टिगेशन प्रबोध कुमार ने सीबीआई निदेशक को जांच जारी रखने के लिए विवादित पत्र लिखा। प्रबोध कुमार सीधे तौर पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के अधीन काम कर रहे हैं, जिनके पास गृह विभाग भी है।

खैरा ने कहा कि मुख्यमंत्री की सहमति के बिना एक डीजीपी ऐसा पत्र नहीं लिख सकता जो प्रदेश सरकार के हितों के खिलाफ हो। खैरा ने आगे कहा कि कैप्टन जनता के बीच यह स्टैंड ले रहे हैं कि सीबीआई को केस फाइलें वापस कर देनी चाहिए, क्योंकि सीबीआई से जांच का काम वापस लेने के पंजाब विधानसभा में पारित प्रस्ताव के बाद सीबीआई को जांच का अधिकार नहीं रह जाता। खैरा ने आरोप लगाया कि डीजीपी के पत्र से साफ है कि सीबीआई को जांच जारी रखने की बात कहकर दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। 

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