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बंसल-धवन ने उठाए सवाल, प्रशासन का जवाब- ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन होगा बेहतर
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चंडीगढ़। बिजली निजीकरण की घोषणा के बाद 10 फरवरी 2021 को हुई प्रशासकीय सलाहकार परिषद की बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल और हरमोहन धवन ने सवाल उठाए थे। बंसल ने यहां तक कह दिया था कि प्रशासन एक तरफ स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है, दूसरी ओर विभाग का निजीकरण भी कर रहा है। ये चंडीगढ़ के लिए अच्छा नहीं होगा। मंगलवार को हुई सलाहकार परिषद की बैठक में इस सवाल का जवाब दिया गया।
पिछली बैठक में उठे मुद्दों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट में प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि निजीकरण के बाद बिजली का ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिलिंग व्यवस्था बेहतर होगी। ये आत्मनिर्भर भारत योजना का हिस्सा है। पवन बंसल के सवाल का जवाब देते हुए प्रशासन की तरफ से कहा गया कि राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत भारत सरकार से मिले बजट से स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट का काम किया जा रहा है। इसमें लगभग 26,000 उपभोक्ताओं को कवर करने वाली पायलट परियोजना पूर्ण होने वाली है। इसके माध्यम से सभी वर्तमान बिजली के मीटरों को टू-वे कम्युनिकेटेड स्मार्ट मीटर में बदला जाएगा, जो सुपरवाइजरी कंट्रोल और डेटा एक्यूजेशन (स्काडा) से जुड़ा होगा। वहीं, बिजली विभाग को निजी हाथों में देने का फैसला भी भारत सरकार का ही है। निजीकरण से बिजली के ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन व बिलिंग की व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टीएंडडी) लॉस कम होगा। सिटी ब्यूटीफुल के उपभोक्ताओं को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कुशल, विश्वसनीय बिजली की आपूर्ति करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
बिजली विभाग लाभ में, फिर निजीकरण क्यों
बैठक में पूर्व सांसद हरमोहन धवन ने भी बिजली के निजीकरण पर चिंता व्यक्त की। धवन ने कहा कि बिजली विभाग करीब 250 करोड़ के मुनाफे में है। धवन ने निजीकरण नहीं करने का अनुरोध किया था। इस पर प्रशासन की तरफ से जवाब दिया गया है कि भारत सरकार ने मई 2020 में संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा की। जिन प्रमुख उपायों की योजना बनाई गई, उनमें से एक था केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण को निजी हाथों में देना, ताकि रिटेल सप्लाई में सुधार हो। निजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, परिचालन में सुधार, वितरण में वित्तीय दक्षता सुनिश्चित करना और अन्य के लिए एक मॉडल प्रदान करना है।
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पिछली बैठक में उठे मुद्दों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट में प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि निजीकरण के बाद बिजली का ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिलिंग व्यवस्था बेहतर होगी। ये आत्मनिर्भर भारत योजना का हिस्सा है। पवन बंसल के सवाल का जवाब देते हुए प्रशासन की तरफ से कहा गया कि राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन के तहत भारत सरकार से मिले बजट से स्मार्ट ग्रिड पायलट प्रोजेक्ट का काम किया जा रहा है। इसमें लगभग 26,000 उपभोक्ताओं को कवर करने वाली पायलट परियोजना पूर्ण होने वाली है। इसके माध्यम से सभी वर्तमान बिजली के मीटरों को टू-वे कम्युनिकेटेड स्मार्ट मीटर में बदला जाएगा, जो सुपरवाइजरी कंट्रोल और डेटा एक्यूजेशन (स्काडा) से जुड़ा होगा। वहीं, बिजली विभाग को निजी हाथों में देने का फैसला भी भारत सरकार का ही है। निजीकरण से बिजली के ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन व बिलिंग की व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टीएंडडी) लॉस कम होगा। सिटी ब्यूटीफुल के उपभोक्ताओं को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कुशल, विश्वसनीय बिजली की आपूर्ति करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
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बिजली विभाग लाभ में, फिर निजीकरण क्यों
बैठक में पूर्व सांसद हरमोहन धवन ने भी बिजली के निजीकरण पर चिंता व्यक्त की। धवन ने कहा कि बिजली विभाग करीब 250 करोड़ के मुनाफे में है। धवन ने निजीकरण नहीं करने का अनुरोध किया था। इस पर प्रशासन की तरफ से जवाब दिया गया है कि भारत सरकार ने मई 2020 में संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान की घोषणा की। जिन प्रमुख उपायों की योजना बनाई गई, उनमें से एक था केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली वितरण को निजी हाथों में देना, ताकि रिटेल सप्लाई में सुधार हो। निजीकरण प्रक्रिया का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, परिचालन में सुधार, वितरण में वित्तीय दक्षता सुनिश्चित करना और अन्य के लिए एक मॉडल प्रदान करना है।
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