पूर्व मंत्री ग्रोवर को सीएम की क्लीन चिट, नाराज विधायक बलराज कुंडू ने समर्थन वापसी का किया एलान
- विधानसभा में जवाब देते हुए सीएम ने ग्रोवर पक्ष में ठोकी ताल, भ्रष्टाचार को सिरे से नकारा।
- कुंडू हुए आक्रामक , तो सीएम ने कहा कि दबाव में नहीं होगी जांच।
- सीएम ने कहा- मुझ पर भरोसा नहीं, तो और भी हैं विकल्प, कोर्ट जाइए।
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विस्तार
सहकारी शुगर मिलों में अनियमितताओं के मामले में घिरे पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सदन में क्लीन चिट दे दी है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर अपना जवाब देते हुए सीएम ने कहा कि इस संदर्भ में कोई भ्रष्टाचार सामने नहीं आया है। इसलिए दबाव में कोई जांच नहीं करवाई जाएगी। यदि आरोप लगाने वालों को मेरी बात पर भरोसा नहीं है, तो वे कोर्ट जाएं या अन्य विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन मैं ठीक को ठीक और गलत को गलत कहूंगा।
सीएम के इस जवाब पर आरोप लगाने वाले महम से आजाद विधायक बलराज कुंडू पहले तो सदन में ही सीएम से बार-बार बहस करते रहे। मगर जब सीएम ने साफ शब्दों में कह दिया कि वे मनीष ग्रोवर को क्लीन चिट देते हैं तो बलराज कुंडू ने सदन से बाहर आकर सरकार से अपने समर्थन वापसी का एलान कर दिया।
बलराज कुंडू ने कहा कि वे तो भ्रष्टाचार के छींटों से सीएम का दामन बचाना चाहते थे। वे नहीं चाहते कि ईमानदार मुख्यमंत्री की छवि पर भ्रष्टाचार के किसी मामले में अंगुली उठे। मगर शुगर मिल घोटाले में सीएम ने सदन में जो जवाब दिया है। वे उससे बहुत आहत है। मैंने इसी माह सीएम से उनके आवास पर मिलकर सुबूतों के साथ सारे घोटाले का 55 पेजों का पुलिंदा सौंपा था और उनसे ईमानदार अफसरों की एसआईटी गठित कर जांच करवाने की मांग की थी।
Independent Haryana MLA Balraj Kundu in Chandigarh: I had extended my support to an honest govt and Chief Minister ML Khattar. Now, I have realized that their display of honesty is a farce. I will hand over a letter to the Assembly Speaker to withdraw my support tomorrow. pic.twitter.com/ZV7yjg1FsC
— ANI (@ANI) February 27, 2020
Haryana CM Manohar Lal Khattar on MLA Balraj Kundu's announcement to withdraw support: We will speak to him. We are open to order a probe if there is credible primary evidence to believe his allegations. But if there is no evidence, there is no point in ordering any inquiry. https://t.co/GxIJFXVoMP pic.twitter.com/4vlYMydqOm
— ANI (@ANI) February 27, 2020
विधायक कुंडू ने कहा कि उन्होंने तो सदन तक में ये एलान कर दिया था कि यदि इस मामले में घोटाला साबित नहीं हुआ तो वे इस्तीफा देकर अपने घर चले जाएंगे। लेकिन मामले की गंभीरता को समझने और जांच का एलान करने की बजाय सीएम ने साफ कह दिया कि वे इस मामले में पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर को क्लीन चिट देते हैं।
कुंडू ने कहा कि सीएम को दिए उनके सबूतों का पुलिंदा ये साबित करने में पर्याप्त है कि शुगर मिलों के शीरे घोटाले में पूर्व मंत्री ग्रोवर की भूमिका रही है। कुंडू ने कहा कि वे बहुत ही आहत होकर सरकार से अपना समर्थन वापस ले रहे हैं। शुक्रवार सुबह वे राज्यपाल के पास जाकर और फिर स्पीकर महोदय के पास अपने समर्थन वापसी का पत्र सौंप देंगे।
सीएम ने सिरे से नकारा भ्रष्टाचार
सीएम ने जवाब देते हुए सदन में पिछले पांच वर्षों में सहकारी मिलों में शीरे खरीद के लिए टेंडर के न्यूनतम रेट की रिपोर्ट पेश करते हुए इस तरह के भ्रष्टाचार को सिरे से नकार दिया। सीएम ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में मार्केट में शीरे के रेटों में काफी अस्थिरता रही है। पिछले कुछ वर्षों में औसतन रेट 200 रुपये प्रति टन भी रहा, फिर उच्चतम रेट 510 से 673 रुपये प्रति टन तक भी पहुंचा और फिर 200 रुपये तक आ गया।
सीएम ने कहा कि यमुनानगर की निजी शुगर मिल के पांच साल के आंकड़े देख लो तो 2014-15 से लेकर वर्ष 2018-19 तक वहां भी शीरे के रेट क्रमश: 432, 342, 524, 195 व 251 रुपये प्रति टन तक पहुंचा। अब जैसा रेट मार्केट में चल रहा है, तो वही रेट टेंडर में आएगा। जबरदस्ती किसी बात को बड़ा मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। मेरे पास भ्रष्टाचार की आशंका के ठोस तथ्य होते तो वे जरूर जांच करवाते।
विधायक कुंडू के ये थे आरोप
इस मामले में महम से विधायक बलराज कुंडू ने आरोप लगाया था कि सहकारी चीनी मिलों में कई तरह की अनियमितताएं हैं। मिलों में चीनी के शीरे को लेकर बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। शीरा औने-पौने दाम पर अपने चहेतों को बेचा गया है। जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ है। सहकारी मिलों में नई मशीनरी इंस्टाल करने से लेकर उन मशीनों के ठप होने के बावजूद हर साल उनके मेंटेनेंस पर ढेरों खर्च होता हरा।
गन्ने से चीनी की रिकवरी में भी बड़ा खेल हुआ। कुंडू ने आरोप लगाया कि पानीपत चीनी मिल से पाइपलाइन के माध्यम से डिस्टलरी तक शीरा पहुंचाने में भी बड़ा गड़बड़झाला हुआ है। इन गड़बड़झालों में कुछ चहेते अफसरों का हाथ है, जिन पर प्रभावशाली लोगों का पूरा आशीर्वाद रहा। कुल मिलाकर इस मामले में सरकार को करीब 3300 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ।
विधायक कुंडू से बातचीत करेंगे। लेकिन किसी पर आरोप लगाने के बजाय विश्वसनीय सबूत उपलब्ध करवाने चाहिए। बिना ठोस सबूत के अनाप-शनाप और रंजिशन किसी पर भी आरोप नहीं लगाने चाहिए। लोकतंत्र में दबाव की राजनीति ठीक नहीं है। कुंडू के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया गया है। फिर भी वे नाराज हैं, तो कुंडू से बातचीत की जाएगी। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा।