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6 साल में ही खस्ता हो गए टैगोर थियेटर के हॉल
रूबी सिंह /अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 14 Mar 2014 04:47 PM IST
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सिटी के रंगमंच की जान टैगोर थियेटर की नींव मात्र छह साल में ही कमजोर पड़ गई है। आलम यह है कि थियेटर की छत हल्की बारिश होने पर भी टपक पड़ती है।
बीते दो दिन पहले हुई बारिश के बाद भी थियेटर के अंदर अभी तक बारिश का पानी भरा हुआ है। आठ महीने पहले थियेटर प्रबंधन ने रिपेयर की मांग की थी और अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
रेनोवेट होने के बाद टैगोर थियेटर की नींव 29 अक्टूबर 2008 को तत्कालीन यूटी प्रशासक एसएफ रोड्रिग्स ने रखी थी। अभी छह साल बीते हैं और हालात सामने हैं। हाल की कुर्सियां टूट गई हैं और ग्रीन रूम की हालत भी खस्ता है।
थियेटर की बालकनी और हाल की करीब 50 से अधिक कुर्सियां टूट चुकी हैं। इसके अलावा पुरुष ग्रीन रूम में वॉटर कूलर भी टूटा हुआ है। आइना इतना गंदा है कि सूरत भी स्पष्ट नहीं दिखती।
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बैक स्टेज पर लगे अग्निशमक यंत्र के नीचे मैट उखड़े और टूटे हैं। पानी के लगातार टपकने से थियेटर में लगे लाखों रुपये की लाइटिंग और म्यूजिक सिस्टम खराब होने लगा है। इसकी परवाह यूटी प्रशासन को नहीं लग रही है।
पिछले आठ महीने से रिपेयर की मांग कर रहा हूं : निदेशक
छत से पानी टपकने की समस्या और इसे रिपेयर करने के लिए यूटी प्रशासन को लिखित में कई बार निवेदन कर चुका हूं और पिछले आठ महीने से लगातार यह मांग जारी है। इस संबंध में पिछले महीने इंजीनियरिंग विभाग के चीफ इंजीनियर, एक्सईएन और जेई से बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
कुलदीप शर्मा, निदेशक, टैगोर थियेटर
रिपेयर का काम अंडर प्रोसेस : चीफ इंजीनियर
रिपेयर का काम अंडर प्रोसेस है। मई और जून तक इसे पूरी तरह से ठीक कर दिया जाएगा। अभी इस संबंध में योजना बनाई जा रही है।
एसके चड्ढा, चीफ इंजीनियरिंग यूटी
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बीते दो दिन पहले हुई बारिश के बाद भी थियेटर के अंदर अभी तक बारिश का पानी भरा हुआ है। आठ महीने पहले थियेटर प्रबंधन ने रिपेयर की मांग की थी और अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
रेनोवेट होने के बाद टैगोर थियेटर की नींव 29 अक्टूबर 2008 को तत्कालीन यूटी प्रशासक एसएफ रोड्रिग्स ने रखी थी। अभी छह साल बीते हैं और हालात सामने हैं। हाल की कुर्सियां टूट गई हैं और ग्रीन रूम की हालत भी खस्ता है।
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थियेटर की बालकनी और हाल की करीब 50 से अधिक कुर्सियां टूट चुकी हैं। इसके अलावा पुरुष ग्रीन रूम में वॉटर कूलर भी टूटा हुआ है। आइना इतना गंदा है कि सूरत भी स्पष्ट नहीं दिखती।
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बैक स्टेज पर लगे अग्निशमक यंत्र के नीचे मैट उखड़े और टूटे हैं। पानी के लगातार टपकने से थियेटर में लगे लाखों रुपये की लाइटिंग और म्यूजिक सिस्टम खराब होने लगा है। इसकी परवाह यूटी प्रशासन को नहीं लग रही है।
पिछले आठ महीने से रिपेयर की मांग कर रहा हूं : निदेशक
छत से पानी टपकने की समस्या और इसे रिपेयर करने के लिए यूटी प्रशासन को लिखित में कई बार निवेदन कर चुका हूं और पिछले आठ महीने से लगातार यह मांग जारी है। इस संबंध में पिछले महीने इंजीनियरिंग विभाग के चीफ इंजीनियर, एक्सईएन और जेई से बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।
कुलदीप शर्मा, निदेशक, टैगोर थियेटर
रिपेयर का काम अंडर प्रोसेस : चीफ इंजीनियर
रिपेयर का काम अंडर प्रोसेस है। मई और जून तक इसे पूरी तरह से ठीक कर दिया जाएगा। अभी इस संबंध में योजना बनाई जा रही है।
एसके चड्ढा, चीफ इंजीनियरिंग यूटी