आईएसआई की बड़ी साजिश, खालिस्तान समर्थकों के कश्मीर कनेक्शन ने उड़ाई पंजाब पुलिस की नींद
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बब्बर खालसा के पांच आतंकियों की गिरफ्तारी ने पंजाब पुलिस की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। क्योंकि एक बार फिर खालिस्तान समर्थकों का कश्मीर कनेक्शन सामने आया है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि उन्हें और उनसे जुड़ने वाले अन्य युवाओं को जम्मू-कश्मीर में ट्रेनिंग दी जानी थी। इस इनपुट ने इंटेलिजेंस एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।
पिछले कुछ समय से लगातार यह बात सामने आ रही है कि खालिस्तान समर्थकों और जम्मू-कश्मीर के कट्टरपंथियों के बीच गठजोड़ हो गया है और यह पंजाब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कुछ समय पहले खालिस्तान समर्थक, एक कट्टरपंथी संगठन की मैगजीन के कवर पर जम्मू-कश्मीर के कट्टरपंथियों के पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी की तस्वीर देखकर पंजाब के लोग हैरान रह गए थे।
तस्वीर के साथ लिखा था कि पंजाब और कश्मीर में आजादी की लड़ाई चल रही है। तब यह अंदाजा भी नहीं था कि दोनों राज्यों के कट्टरपंथियों के बीच किसी तरह का गठजोड़ हो सकता है। लेकिन इसमें अहम कड़ी बनी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई।
आईएसआई ही भारत में बिगाड़ रही माहौल
आईएसआई ही पंजाब और जम्मू-कश्मीर दोनों को परेशान करने के पीछे है। कश्मीर में लश्कर व जैश-ए-मोहम्मद और पंजाब में खालिस्तान समर्थकों को आईएसआई ही सारी मदद मुहैया करवाती है। पंजाब में गड़बड़ी फैलाने की मंशा रखने वाले विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थक पहले कश्मीरी कट्टरपंथियों के संपर्क में नहीं थे।
लेकिन जब पंजाब में आईएसआई की साजिश कामयाब नहीं हुई तो उसने इनका गठजोड़ कराया, ताकि पंजाब में किसी ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कश्मीरी कट्टरपंथियों के जरिए हथियार मुहैया करवाया जा सके और उनके नेटवर्क का भी फायदा यहां उठाया जा सके। कुछ समय पहले जालंधर के मकसूदां थाने में बमों से हमला हुआ था।
यह पंजाब में बमों से हमले का पहला मामला था जबकि, जम्मू-कश्मीर में हमले का यही पैटर्न कई सालों से चला आ रहा है। बाद में हमले के पीछे कश्मीरी ही निकले।
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी माना गठजोड़
2018 में पुलिस ने पटियाला से एक खालिस्तान समर्थक को गिरफ्तार किया था, उसके पास से भी बम मिला था। 2017 में पटियाला का युवक संदीप शर्मा जम्मू-कश्मीर जाकर आदिल बन गया था। उसने लश्कर ज्वाइन कर लिया था। तब पंजाब पुलिस को पहली बार आशंका हुई थी कि लश्कर जैसे संगठन कहीं खालिस्तानी स्लीपर सेल के संपर्क में तो नहीं हैं।
पिछले ही साल अमृतसर में निरंकारी भवन पर भी बम से हमला हुआ, हालांकि उसका पैटर्न टारगेट किलिंग जैसा था। लेकिन तब सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खुद माना था कि पंजाब और कश्मीर के चरमपंथियों के बीच गठजोड़ वाकई चिंता का विषय है क्योंकि किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार मुहैया कराने से लेकर ट्रेनिंग देने तक, सब कुछ आसानी से किया जा सकता है।