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कला भवन में बंदा सिंह बहादुर के जीवन पर बने 'सिख राज' का मंचन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 17 Sep 2016 04:29 PM IST
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पंजाब कला भवन में बंदा सिंह बहादुर के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब कला भवन चंडीगढ़ में बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन पर आधारित नाटक 'सिख राज' का शानदार मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने यह दिखाने का प्रयास किया कि कोई भी मजहब जुल्म नहीं करता है। यह इंसान की फितरत है जो उसे शैतान बनने पर मजबूर कर देती है। धर्म, मजहब और जाति के नाम पर वह दूसरे इंसान की जान तक ले लेता है।
यह नाटक पंजाबी थिएटर अकादमी यूके और पंजाबी नाटक अकादमी चंडीगढ़ ने सिटी एंटरटेनमेंट नेटवर्क के सहयोग से पेश किया। यह नाटक माधो दास बैरागी (जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बंदा सिंह बहादुर नाम दिया था) के जीवन पर आधारित था। नाटक में दिखाया गया कि कैसे बंदा सिंह बहादुर ने बहादुरी के साथ मुगलों से युद्ध किया और अंत में शहीदी प्राप्त की।
नाटक का अंत बाबा बंदा सिंह बहादुर के इन शब्दों से होता है- ‘किसका क्या मुकदूर था जो मुझको मारता, यह तो जज्बा है सिखी में कुरबानी देने का’। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक का निर्देशन तजिंदर सिंह सिंद्रा ने किया। इस नाटक का मंचन चरनजीत संधू, अर्जुन, बलविंदर, नाहर सिंह, सन्नी गिल, बलकार सिद्धू, अनिल मसीह, आशीष, नीतू और जरनैल सिंह ने किया।
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यह नाटक पंजाबी थिएटर अकादमी यूके और पंजाबी नाटक अकादमी चंडीगढ़ ने सिटी एंटरटेनमेंट नेटवर्क के सहयोग से पेश किया। यह नाटक माधो दास बैरागी (जिन्हें गुरु गोबिंद सिंह जी ने बंदा सिंह बहादुर नाम दिया था) के जीवन पर आधारित था। नाटक में दिखाया गया कि कैसे बंदा सिंह बहादुर ने बहादुरी के साथ मुगलों से युद्ध किया और अंत में शहीदी प्राप्त की।
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नाटक का अंत बाबा बंदा सिंह बहादुर के इन शब्दों से होता है- ‘किसका क्या मुकदूर था जो मुझको मारता, यह तो जज्बा है सिखी में कुरबानी देने का’। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस नाटक का निर्देशन तजिंदर सिंह सिंद्रा ने किया। इस नाटक का मंचन चरनजीत संधू, अर्जुन, बलविंदर, नाहर सिंह, सन्नी गिल, बलकार सिद्धू, अनिल मसीह, आशीष, नीतू और जरनैल सिंह ने किया।
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