{"_id":"5d9ad3558ebc3e01451c23bc","slug":"ayushmaan-bharat-yojna-and-rashtriya-arogya-nidhi-not-beneficial-for-patients","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़: आयुष्मान और राष्ट्रीय आरोग्य निधि के बीच फंसे मरीज, एक के साथ दूसरे का नहीं मिलता लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़: आयुष्मान और राष्ट्रीय आरोग्य निधि के बीच फंसे मरीज, एक के साथ दूसरे का नहीं मिलता लाभ
Mon, 07 Oct 2019 11:26 AM IST
खुशबू गोयल
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 07 Oct 2019 11:26 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़ पीजीआई में आने वाले मरीज आयुष्मान और राष्ट्रीय आरोग्य निधि के बीच फंस गए हैं, क्योंकि एक के साथ दूसरे का लाभ नहीं मिलता। जयदीप ब्लड कैंसर मल्टीप्ल मायोलामा से पीड़ित हैं। उनका इलाज पीजीआई में चल रहा है। कीमोथैरेपी से उनका कैंसर कंट्रोल में आ चुका है। अब डाक्टरों ने एहतियात के तौर पर उन्हें बोनमैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है। इसमें करीब पांच लाख रुपये का खर्च आएगा। जयदीप के लिए इतना खर्च उठा पाना नामुमकिन है। मगर उन्हें इस बात का सुकून है कि वह आयुष्मान के लाभार्थी हैं।
इस योजना में कार्डधारक को पांच लाख रुपये तक के इलाज का प्रावधान है। लेकिन जब वह आयुष्मान की खिड़की पर गए तो उसकी यह उम्मीद भी पल भर में धूमिल हो गई। आयुष्मान में बोनमैरो ट्रांसप्लांट का प्रावधान ही नहीं है। इस बीच जयदीप को किसी ने राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना के बारे में बताया। इस योजना में भी गरीब व्यक्तियों के इलाज की सुविधा है। इसमें मरीज की 15 लाख रुपये तक की मदद की जा सकती है।
जयदीप व उनके परिजनों जब पीजीआई में पता किया तो पता चला कि वे वे इसका फायदा नहीं उठा सकते क्योंकि इस योजना में एक शर्त यह भी है कि आयुष्मान भारत के दायरे में आने वाली फैमिली को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। अब जयदीप काफी परेशान हैं। वह दोनों में से किसी भी योजना का फायदा नहीं उठा सकते। यह स्थिति सिर्फ जयदीप ही नहीं बल्कि ऐसे कई मरीज हैं, जो दोनों योजनाओं के बीच फंस कर रह गए हैं।
विज्ञापन
दरअसल, कुछ बीमारियों का इलाज आयुष्मान भारत में शामिल नहीं किया गया है जबकि उन बीमारियों के इलाज का प्रावधान आरएएन में रखा गया है। दिक्कत यह है कि आयुष्मान के लाभार्थी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। बताया जा रहा है कि इस संबंध में कई सारे सेंटरों को दिक्कतें आ रहीं हैं। इसमें नई दिल्ली का एम्स भी शामिल है। एम्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया। हालांकि अभी पीजीआई की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
विज्ञापन
इस योजना में कार्डधारक को पांच लाख रुपये तक के इलाज का प्रावधान है। लेकिन जब वह आयुष्मान की खिड़की पर गए तो उसकी यह उम्मीद भी पल भर में धूमिल हो गई। आयुष्मान में बोनमैरो ट्रांसप्लांट का प्रावधान ही नहीं है। इस बीच जयदीप को किसी ने राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) योजना के बारे में बताया। इस योजना में भी गरीब व्यक्तियों के इलाज की सुविधा है। इसमें मरीज की 15 लाख रुपये तक की मदद की जा सकती है।
विज्ञापन
जयदीप व उनके परिजनों जब पीजीआई में पता किया तो पता चला कि वे वे इसका फायदा नहीं उठा सकते क्योंकि इस योजना में एक शर्त यह भी है कि आयुष्मान भारत के दायरे में आने वाली फैमिली को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकता। अब जयदीप काफी परेशान हैं। वह दोनों में से किसी भी योजना का फायदा नहीं उठा सकते। यह स्थिति सिर्फ जयदीप ही नहीं बल्कि ऐसे कई मरीज हैं, जो दोनों योजनाओं के बीच फंस कर रह गए हैं।
विज्ञापन
दरअसल, कुछ बीमारियों का इलाज आयुष्मान भारत में शामिल नहीं किया गया है जबकि उन बीमारियों के इलाज का प्रावधान आरएएन में रखा गया है। दिक्कत यह है कि आयुष्मान के लाभार्थी इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते। बताया जा रहा है कि इस संबंध में कई सारे सेंटरों को दिक्कतें आ रहीं हैं। इसमें नई दिल्ली का एम्स भी शामिल है। एम्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया। हालांकि अभी पीजीआई की ओर से इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
देखिए, कौन सी बीमारी किस योजना में कवर होती है
बीमारी आयुष्मान आरएएन
हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हां
इंट्रा ओरेटिक बैलून पंप नहीं हां
बोन मैरो ट्रांसप्लांट नहीं हां
गुलियन-बारे सिंड्रोम नहीं हां
एक्यूट व क्रोनिक आटोइम्यून नहीं हां
मेटाबोलिक बोन डीसीज नहीं हां
किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हां
लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हां
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नहीं हां
आस्टियोपोरोसिस नहीं हां
ग्लाइकोजेन स्टोरेज डिसआर्डर नहीं हां
हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हां
इंट्रा ओरेटिक बैलून पंप नहीं हां
बोन मैरो ट्रांसप्लांट नहीं हां
गुलियन-बारे सिंड्रोम नहीं हां
एक्यूट व क्रोनिक आटोइम्यून नहीं हां
मेटाबोलिक बोन डीसीज नहीं हां
किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हां
लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हां
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट नहीं हां
आस्टियोपोरोसिस नहीं हां
ग्लाइकोजेन स्टोरेज डिसआर्डर नहीं हां
आरएएन का कौन है लाभार्थी
- व्यक्ति गंभीर बीमारी से पीड़ित और गरीबी रेखा से नीचे हो
- सहायता सिर्फ सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए लागू है
- केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी पात्र नहीं हैं
नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति आयुष्मान का लाभार्थी है, उसे आरएएन योजना का लाभ नहीं मिल सकता। आरएएन के लाभार्थी को पात्रता के हिसाब से लाभ दिया जाता है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
- सहायता सिर्फ सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए लागू है
- केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारी पात्र नहीं हैं
नियमों के मुताबिक जो व्यक्ति आयुष्मान का लाभार्थी है, उसे आरएएन योजना का लाभ नहीं मिल सकता। आरएएन के लाभार्थी को पात्रता के हिसाब से लाभ दिया जाता है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई