{"_id":"68d405f02b5cd6b35e0d5933","slug":"authorities-take-strict-action-against-stubble-burning-38-cases-registered-in-amritsar-chandigarh-news-c-59-1-asr1001-114345-2025-09-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: पराली जलाने के खिलाफ प्रशासन सख्त<bha>;<\/bha> अमृतसर में 38 मामले, केस दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: पराली जलाने के खिलाफ प्रशासन सख्त<bha>;</bha> अमृतसर में 38 मामले, केस दर्ज
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर । बाढ़ के बाद अब अमृतसर जिले में धान की कटाई शुरू हो गई है। कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। अमृतसर में इस वर्ष पराली जलाने के 38 मामले सामने आए हैं। इनमें से 13 किसानों पर प्रशासन के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। उच्च अदालत की ओर से की गई टिप्पनी के बाद प्रशासन भी पराली जलाने के खिलाफ सख्त हो गया है। इस बार प्रशासन ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का फैसला ले लिया है। वहीं कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से बनाई गई टास्क फोर्स ने भी किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागृत करने का मोर्चा संभाल लिया है। प्रशासन ने 17 किसानों को रेड जोन श्रेणी में डाला है। कई किसानों को जुर्माना लगाया गया है।
शुरू से ही अमृतसर में पराली जलाने के सर्वाधिक मामले रिपोर्ट होते रहे हैं। पिछले वर्ष 765 मामले सामने आए थे। इस वर्ष अभी तक 38 मामले सामने आए है। किसान कटाई के बाद खेतों को अगली फसल के लिए जल्दी तैयार करने के मकसद से पराली को आग लगाते है और एक वर्ष में खेत से तीन या चार फसले लेते है। बासमती की किस्मों की जल्दी बुवाई के चलते किसान खेत खाली करने की होड़ में पराली जलाने को ही सबसे आसान मानते है।
डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाई गई है। जो मशीनरी खुद खरीदना चाहते है उनके 50 प्रतिशत से अधिक की सबडिसी दी जा रही है। जो किसान पर्यावरण को क्षति पहुंचाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, इस के लिए संबंधित पुलिस थानों को भी सख्त हिदायतें दे दी गई है।
विज्ञापन
वर्ष 2023 के सितंबर महीने में 15 से लेकर 21 सितंबर तक जिले में पराली को जलाने के मामले बिल्कुल शून्य थे जबकि साल 2024 में उक्त दोनों में 39 जगह पर पराली जलाने वाले केस सामने आए थे। वर्तमान साल 2025 में एक सप्ताह में 38 जगहों पर पराली को जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। केसों में फर्स्ट इंफ्रामेशन रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज हो चुकी है। सभी में 87 हजार रुपयों की इनवायर्नमेंट कंपनसेशन के रूप में लेनदारी है, जिसमें 36 हजार रुपयों की रिकवरी हो चुकी है। पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) के मुताबिक तरनतारन में भी एक जगह पर पराली को आग लगाने की घटना पाई गई है।
विज्ञापन
अमृतसर । बाढ़ के बाद अब अमृतसर जिले में धान की कटाई शुरू हो गई है। कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। अमृतसर में इस वर्ष पराली जलाने के 38 मामले सामने आए हैं। इनमें से 13 किसानों पर प्रशासन के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। उच्च अदालत की ओर से की गई टिप्पनी के बाद प्रशासन भी पराली जलाने के खिलाफ सख्त हो गया है। इस बार प्रशासन ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का फैसला ले लिया है। वहीं कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से बनाई गई टास्क फोर्स ने भी किसानों को पराली न जलाने को लेकर जागृत करने का मोर्चा संभाल लिया है। प्रशासन ने 17 किसानों को रेड जोन श्रेणी में डाला है। कई किसानों को जुर्माना लगाया गया है।
शुरू से ही अमृतसर में पराली जलाने के सर्वाधिक मामले रिपोर्ट होते रहे हैं। पिछले वर्ष 765 मामले सामने आए थे। इस वर्ष अभी तक 38 मामले सामने आए है। किसान कटाई के बाद खेतों को अगली फसल के लिए जल्दी तैयार करने के मकसद से पराली को आग लगाते है और एक वर्ष में खेत से तीन या चार फसले लेते है। बासमती की किस्मों की जल्दी बुवाई के चलते किसान खेत खाली करने की होड़ में पराली जलाने को ही सबसे आसान मानते है।
विज्ञापन
डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध करवाई गई है। जो मशीनरी खुद खरीदना चाहते है उनके 50 प्रतिशत से अधिक की सबडिसी दी जा रही है। जो किसान पर्यावरण को क्षति पहुंचाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, इस के लिए संबंधित पुलिस थानों को भी सख्त हिदायतें दे दी गई है।
विज्ञापन
वर्ष 2023 के सितंबर महीने में 15 से लेकर 21 सितंबर तक जिले में पराली को जलाने के मामले बिल्कुल शून्य थे जबकि साल 2024 में उक्त दोनों में 39 जगह पर पराली जलाने वाले केस सामने आए थे। वर्तमान साल 2025 में एक सप्ताह में 38 जगहों पर पराली को जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। केसों में फर्स्ट इंफ्रामेशन रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज हो चुकी है। सभी में 87 हजार रुपयों की इनवायर्नमेंट कंपनसेशन के रूप में लेनदारी है, जिसमें 36 हजार रुपयों की रिकवरी हो चुकी है। पंजाब पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (पीपीसीबी) की एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) के मुताबिक तरनतारन में भी एक जगह पर पराली को आग लगाने की घटना पाई गई है।