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आस्ट्रेलिया की 40 यूनिवर्सिटियों में आसानी से दाखिला ले सकेंगे भारतीय विद्यार्थी, जानिए क्यों?

Wed, 04 Oct 2017 09:09 AM IST
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Wed, 04 Oct 2017 09:09 AM IST
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Australian Government has included India in the Low Risk category
ऑस्ट्रेलिया - फोटो : File Photo
आस्ट्रेलिया सरकार ने भारत को लो रिस्क कैटेगरी (कैटेगरी-2) में शामिल कर दिया है। इससे भारतीय विद्यार्थियों को काफी राहत मिलेगी। अब उनके लिए आस्ट्रेलिया की 40 यूनिवर्सिटियों में दाखिला लेना आसान हो जाएगा। भारतीय विद्यार्थियों के वीजा नियम भी सरल हो गए हैं। भारत के साथ इस श्रेणी में नेपाल और श्रीलंका भी हैं।
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2008 में भारत को हाई रिस्क कैटेगरी में शामिल किया गया था। इस वजह से देश के विद्यार्थियों को कई तरह के दस्तावेजों के अलावा कड़े नियम से गुजरना पड़ता था। हालात ये थे कि भारत के विद्यार्थी सिर्फ 8-10 यूनिवर्सिटी में आसानी से दाखिला लेने के बाद वीजा ले सकते थे। इन संस्थानों में डैकेन यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी, मेलबोर्न यूनिवर्सिटी, रायल मेलबोर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मोनाश यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल भी शामिल थे।
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वहीं बाकी संस्थानों में वीजा लेना काफी मुश्किल था। विद्यार्थियों का हर दस्तावेज न केवल क्रास चेक होता था, बल्कि नियम काफी सख्त और कड़े थे। अगर इन यूनिवर्सिटी के अलावा भारतीय विद्यार्थी किसी अन्य संस्थान या कॉलेज में दाखिला लेते तो अधिकतर का वीजा स्वीकार नहीं किया जाता था। 
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विद्यार्थी अंग्रेजी में ठीक हो तो आईलेट्स की भी जरूरत नहीं 

Australian Government has included India in the Low Risk category
ऑस्ट्रेलिया वीजा - फोटो : DEMO Pics
विद्यार्थी अंग्रेजी में ठीक हो तो आईलेट्स की भी जरूरत नहीं 
आस्ट्रेलिया का स्टडी वीजा हासिल करने के लिए आवेदनकर्ता को बैंक में 25 लाख जमा राशि दिखानी पड़ती थी। बैंक का पूरा ब्योरा वीजा आवेदन फाइल के साथ लगता था और दूतावास बाकायदा बैंक से क्रास चेक करता था। अब इस नियम से छुटकारा मिल गया है।

वीजा अधिकारी विद्यार्थी से मौखिक पूछ सकता है। अब दस्तावेजों की जरूरत नहीं है। इसके अलावा आईलेट्स का झंझट भी कम हो गया है। अब शिक्षा संस्थान अगर इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि आवेदनकर्ता विद्यार्थी अंग्रेजी में ठीक ठाक है तो आईलेट्स की जरूरत नहीं है, वीजा का सीधा आवेदन किया जा सकता है। वीजा अधिकारी इंटरव्यू में क्रास चेक कर सकता है कि वाकई में विद्यार्थी अंग्रेजी में माहिर है या नहीं। अपनी संतुष्टि के बाद ही वह वीजा जारी करेगा। 

हर साल 40 हजार भारतीय जाते हैं आस्ट्रेलिया 
हर साल भारत से 40 हजार विद्यार्थी आस्ट्रेलिया शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। इसमें 25 हजार पंजाबी हैं। आस्ट्रेलिया की ओर से सख्ती के बाद पंजाबी मूल के विद्यार्थियों ने कनाडा का रुख कर लिया था। बीते एक साल का ब्योरा देखकर आस्ट्रेलिया ने भारत के विद्यार्थियों को कैटेगरी टू में शामिल कर लिया है। 

विश्वास को कायम रखना हमारा फर्ज : सुकांत 
आस्ट्रेलियन दूतावास के अधिकृत एजेंट व एसोसिएशन ऑफ ओवरसीज एजुकेशन कंसलटेंट के प्रधान सुकांत त्रिवेदी ने कहा कि यह हमारे लिए खुशी की बात है। अगर आस्ट्रेलिया सरकार ने भारत पर विश्वास किया तो इसको आगे कायम रखना हमारा फर्ज है। अगर विद्यार्थी को अंग्रेजी न आती हो और हम उसका आवेदन बिना आईलेट्स के कर दें तो बदनामी ही होगी। ऐसे में हमारी संस्था जागरूकता लाने का प्रयास करेगी, ताकि एजेेंट नाजायज फायदा न उठाएं। साथ ही विद्यार्थियों के लिए नियम दोबारा सख्त न हो जाएं। अगर हमने हेरफेर किया तो फिर से हमें कैटेगरी थ्री में धकेला जा सकता है। 
 
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