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Chandigarh: साथी को लगा करंट तो 50 बंदरों ने मचाया ऐसा उत्पात... कमरे में ही बंद हो गए डरे लोग

Mon, 15 Jul 2024 06:05 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 15 Jul 2024 06:05 AM IST
सार

लोगों ने बताया कि इलाके में बंदरों की समस्या इस कदर है कि घर के पीछे कोई कपड़े तक नहीं सुखा सकते। अगर कपड़े धोने के बाद पीछे सूखने के लिए टांग दिया जाए तो अगले दिन वह कपड़े या तो किसी और के घर पर मिलते हैं या फिर कपड़े फटे हुए होते हैं।

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Attack of 50 monkeys... House vandalized, AC wire cut, people locked in rooms out of fear
बंदरों का आतंक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रविवार को सेक्टर-15ए में करीब 50 बंदरों ने एक साथ एक घर पर हमला कर दिया। बंदरों ने घर की पिछली तरफ काफी तोड़फोड़ की और एसी की तार काट दी। बंदरों ने इस कदर उत्पात मचाया कि दीवार से ईंटे तक निकाल दी। घर में रहने वाले लोग खुद को कमरे में बंद कर नगर निगम में फोन मिलाते रहे, लेकिन अधिकतर नंबर बंद मिले। बाकी बिजी बताते रहे।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि रोजाना बंदरों का झुंड सेक्टर-15ए में मकान नंबर-500 वाली गली की पिछली तरफ से गुजरता है और सामानों को नुकसान पहुंचाता है। लेकिन रविवार को जो नजारा उन्होंने देखा वह डरा देने वाला था। बताया कि सुबह करीब 7.45 बजे ऐसा लगा कि एक छोटे बंदर को एसी से करंट लगा। इसके बाद बहुत सारे बंदर मकान नंबर-501 की पिछली तरफ इकट्ठे हो गए। वो हर तरफ तोड़फोड़ कर रहे थे। कोई खिड़कियों पर हाथ मार रहा था तो कोई एसी की तार काट रहा था। बंदरों ने दीवारों पर पंजे मार सीमेंट तक निकाल दिया। वह काफी देर तक वहीं बैठे रहे। घर के पीछे सरकारी दीवार है, उससे ईंटें तक निकाल कर नीचे गिरा दी। इस पूरे समय लोग घरों में बंद रहे। जो सामान बाहर थे, उसे हटाने भी नहीं जा पाए। 
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अरुण अग्रवाल ने बताया कि मदद के लिए उन्होंने नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर पर फोन किया, कोई नंबर नहीं लगा। वन विभाग का एक हेल्पलाइन नंबर लगा, जिस पर तुरंत टीम आई, लेकिन उन्होंने कहा कि बंदर को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। हालांकि फिर भी उन्होंने मदद की और बंदरों को भगाने की कोशिश की। बंदर उन्हें भी काटने को दौड़ रहे थे।

रविवार के दिन भी सुबह 8 बजे नगर निगम के हेल्पलाइन रहे बिजी
लोगों ने बताया कि इलाके में बंदरों की समस्या इस कदर है कि घर के पीछे कोई कपड़े तक नहीं सुखा सकते। अगर कपड़े धोने के बाद पीछे सूखने के लिए टांग दिया जाए तो अगले दिन वह कपड़े या तो किसी और के घर पर मिलते हैं या फिर कपड़े फटे हुए होते हैं। बंदर उन्हें फाड़ देते हैं या साथ ले जाते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि चंडीगढ़ में पटाखे बैन हैं लेकिन मजबूरी में बंदरों के आने पर उन्हें पटाखे फोड़ने पड़ते हैं ताकि वह डरकर भागें। सेक्टर-15 में लोग इन हालातों में रहने को मजबूर हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही। लोगों ने कहा कि बंदरों की जिम्मेदारी नगर निगम की है लेकिन वह नहीं आए जबकि दूसरा विभाग उनकी मदद के लिए आ गया।
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