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खुशियां बांटते कलाकारों का दर्द: कोरोना के कारण डेढ़ साल से थिएटर बंद, अब पाई-पाई को मोहताज
Wed, 07 Jul 2021 10:26 AM IST
निवेदिता वर्मा
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़।
कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़।
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 07 Jul 2021 10:26 AM IST
सार
रंगमंच से जुड़े लोग हताश हो चुके हैं। नाटकों के जरिए समाज को आजादी की राह दिखाने वाले आज खुद आर्थिक तंगी में कैद हैं। थिएटर बंद होने से आय बंद हो गई है, वहीं सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही। ऐसे हालात में कुछ कलाकारों ने दूसरे काम करने शुरू कर दिए हैं।
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कोरोना के कारण बंद हैं थिएटर।
- फोटो : DEMO
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विस्तार
अपनी कला के बलबूते लोगों के दिलों पर राज करने वाले थिएटर कलाकार पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। इसका कारण है कोरोना के चलते पिछले डेढ़ साल से थिएटरों का बंद होना। इस वजह से नाटक नहीं हो रहे और जो कलाकार सिर्फ थिएटर पर निर्भर थे, उनकी हालत दयनीय है। कलाकारों को इस बात का मलाल है कि मनोरंजन के समय ही सरकार व लोगों को उनकी याद आती है। मुश्किल समय में कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा है। कई कलाकार अन्य काम तो करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी ने उन्हें बेबस कर दिया है।
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थिएटर पर ताला.. तो अक्तूबर में खोला स्टूडियो, दूसरी लहर में वह भी बंद
कोरोना की पहली लहर में थिएटर बंद होने के बाद मैंने अपनी जमा पूंजी से एक्टिंग डांस स्टूडियो बनाया। मुझे उम्मीद थी कि करीब एक साल तक घरों में कैद होने के बाद बच्चे उनके स्टूडियो में दिलचस्पी दिखाएंगे, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने मेरे सपनों पर पानी फेर दिया। अक्तूबर-2020 में जब स्कूल और कॉलेज खुलने की बात चली, तब खरड़ में 70-80 हजार रुपये की लागत से एक्टिंग-डांस स्टूडियो बनाया। इस स्टूडियो का हर महीने का किराया आठ हजार रुपये था। फरवरी तक कोई भी बच्चा नहीं आया। काफी मशक्कत के बाद फरवरी में एक बैच शुरू हुआ, जिसमें लगभग 7 बच्चे थे। एक महीने ही चला था, तभी दूसरी लहर आ गई। 31 मई को स्टूडियो बंद करना पड़ा। फेसबुक-व्हाट्सएप पर ऑनलाइन थिएटर वर्कशाप के लिए विज्ञापन दिया, लेकिन कोई सकारात्मक प्रक्रिया नहीं मिली। अब करीब 20 दिन पहले ही रियल एस्टेट का स्टार्टअप शुरू किया है। मैंने यह बात गांठ बांध ली है कि अगर थिएटर खुलते हैं तो अब उस पर निर्भर नहीं रहूंगा। अब सिर्फ खुद को खुश करने के लिए एक्टिंग करनी है। सरकार ने स्टेज-थिएटर तो बंद किए ही, अन्य कमाई के साधनों पर भी लॉकडाउन लगा दिया है। लॉकडाउन ने मुझे यह सीख दी है कि लोगों को कला की जरूरत है, कलाकारों की नहीं। मैं कई नाटकों का निर्देशन कर चुका हूं और दिल्ली संगीत नाटक अकादमी से थिएटर पर किए गए कार्यों के लिए अवार्ड मिला है। मैंने लगभग 12 वर्ष थिएटर को दिए, लेकिन यह सोचकर अब बहुत चोट पहुंचती है कि कला के प्रति मेरा जुनून मेरा पेट नहीं भर सकता है। इसलिए अब मैंने ठान लिया है कि मेरे पास हमेशा साइड बिजनेस रहेगा ताकि मैं अपने परिवार को सही से पालन-पोषण कर सकूं।
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- विजय मचल, थिएटर कलाकार
कमाई बंद.. घर चलाना मुश्किल, मनोदशा पर पड़ा असर
लगभग छह वर्ष से मेरा घर थिएटर के माध्यम से ही चल रहा था। थिएटर ने मुझे मानसिक और दिमागी तौर पर सुकून दिया है। थिएटर बंद होने से मेरी मनोदशा पर काफी गहरा असर हुआ। हालत यह है कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया। जब कोई उम्मीद नहीं दिखी तो दिसंबर 2020 में मैंने स्टील फेब्रिकेशन का काम शुरू किया, ताकि परिवार को आर्थिक तंगी से दूर किया जा सके। सभी से यही कहूंगा कि इस दौर में एक काम के भरोसे पर न बैठें। दिसंबर तक थोड़ी उम्मीद थी कि शायद हालात सामान्य होंगे और कलाकार फिर से मंच पर आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इतने समय तक घर खाली बैठे रहने से बची हुई कमाई भी लगभग खत्म हो गई थी। फिल्म या शूटिंग आदि का कोई भी प्रोजेक्ट नहीं मिल रहा था। इसलिए काम बदलना पड़ा। -विवेक गक्खड़, थिएटर कलाकार
काम की तलाश में मुंबई गया, लॉकडाउन ने लौटा दिया
आर्थिक संकट के साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी है। बचपन से ही थिएटर से प्यार था, इसलिए इससे जुड़ गया। स्कूल में थिएटर करना शुरू किया और बाद में इसे ही अपना पेशा बनाया, लेकिन कोरोना ने मेरा सबकुछ छीन लिया है। महामारी के आते ही थिएटर का कामकाज ठप हो गया। काम की तलाश में मुंबई गया, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद वापस आना पड़ा। घर का खर्च चलाने के लिए भवन निर्माण साइट व हाउसकीपिंग आदि जगह पर डेलीवेज के तौर पर काम करना पड़ रहा है। कलाकारों के दर्द को अब सरकार को समझना ही पड़ेगा। आखिर कब तक हम घुट-घुट के जिएं। सरकार को तुरंत कलाकारों के हित में कदम उठाना चाहिए। कलाकारों को आर्थिक सहायता मुहैया करवाने के अलावा पेंशन की सुविधा भी लागू करनी चाहिए, ताकि परिवार की आजीविका सही से चल सके। मैं डेलीवेज पर काम करने के साथ-साथ फिल्मों, गानों, विज्ञापन आदि के भी छोटे-मोटे प्रोजेक्ट करता रहा हूं, पर ये प्रोजेक्ट भी नहीं मिल रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द थिएटर खुलेंगे और काम मिलने लगेगा। मैंने सीरियल के साथ कई फिल्मों में छोटे-रोल कर लोगों को मनोरंजन किया है। -अभिमन्यु, थिएटर कलाकार
काम की तलाश में मुंबई गया, लॉकडाउन ने लौटा दिया
आर्थिक संकट के साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी है। बचपन से ही थिएटर से प्यार था, इसलिए इससे जुड़ गया। स्कूल में थिएटर करना शुरू किया और बाद में इसे ही अपना पेशा बनाया, लेकिन कोरोना ने मेरा सबकुछ छीन लिया है। महामारी के आते ही थिएटर का कामकाज ठप हो गया। काम की तलाश में मुंबई गया, लेकिन लॉकडाउन लगने के बाद वापस आना पड़ा। घर का खर्च चलाने के लिए भवन निर्माण साइट व हाउसकीपिंग आदि जगह पर डेलीवेज के तौर पर काम करना पड़ रहा है। कलाकारों के दर्द को अब सरकार को समझना ही पड़ेगा। आखिर कब तक हम घुट-घुट के जिएं। सरकार को तुरंत कलाकारों के हित में कदम उठाना चाहिए। कलाकारों को आर्थिक सहायता मुहैया करवाने के अलावा पेंशन की सुविधा भी लागू करनी चाहिए, ताकि परिवार की आजीविका सही से चल सके। मैं डेलीवेज पर काम करने के साथ-साथ फिल्मों, गानों, विज्ञापन आदि के भी छोटे-मोटे प्रोजेक्ट करता रहा हूं, पर ये प्रोजेक्ट भी नहीं मिल रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द थिएटर खुलेंगे और काम मिलने लगेगा। मैंने सीरियल के साथ कई फिल्मों में छोटे-रोल कर लोगों को मनोरंजन किया है। -अभिमन्यु, थिएटर कलाकार
समाज को आजादी की राह दिखाने वाले खुद पिंजरे में कैद
लगभग डेढ़ साल से ही घर बैठकर ऑनलाइन थिएटर फेस्टिवल देख रहा हूं। अपनी फोटोग्राफी स्किल अच्छी करने के लिए एडिटिंग आदि सीख रहा हूं,। लॉकडाउन के कारण कोई काम नहीं चल रहा है। हम रंगकर्मी नाटकों के जरिए समाज को आजादी की राह दिखाते थे, लेकिन महामारी ने आज हमें ही बंद दीवारों के पिंजरे में कैद कर दिया है। मार्च 2020 में लॉकडाउन शुरू हुआ था। तब ठीकठाक जमापूंजी थी और ये मान कर चल रहे थे कि कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा। हमने अन्य कलाकारों के साथ मिलकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे अपने साथियों की मदद की। लेकिन लॉकडाउन एक बार लगा तो लगता ही चला गया। इसके कारण जमापूंजी भी खर्च हो गई। अब हम खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। मैं पिछले 30 साल से थिएटर से जुड़ा हूं। इसलिए इसके अलावा न तो कोई और काम जानता हूं, और अब न ही नया कारोबार शुरू करने का बजट है। इसलिए खर्चों में ही कटौती कर गुजारा कर रहा हूं। हमने कलाकारों की देखरेख और उनकी रोजी-रोटी का मुद्दा चंडीगढ़ प्रशासन के सामने भी रखा। अधिकारियों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद हम कलाकारों ने मिलकर अपनी एसोसिएशन बनाने की सोची, जिससे हम एक-दूसरे की आर्थिक सहायता कर सकें और अपने मुद्दों को खुद उठा सकें। अभी पंजीकरण का काम चल रहा है, पुलिस वेरिफिकेशन में फाइल अटकी हुई है। - प्रवीन जग्गी वरिष्ठ रंगकर्मी
आज हमारी ही आवाज बंद है..
हम बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं, जिनका शो में नाम नहीं लिया जाता। लेकिन हमारे बिना किसी भी कलाकार, नेता, नाटक व गायन शो की आवाज जनता तक नहीं पहुंच सकती। हमारी टीम मंच पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति को आवाज देती है, पर आज हमारी ही आवाज बंद है। फरवरी 2020 से काम बंद है। बेटा वकील है, लॉकडाउन में उसका काम भी बंद रहा। अब काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साउंड सिस्टम का सामान गोदाम में रखा हुआ है। बिना सहयोगियों के अभी कुछ इधर-उधर भी नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण बंद पड़े लकड़ी के डांस फ्लोर को दीमक खा गई है। वर्ष 2020 की शुरुआत में सीजन से पहले साढ़े छह लाख का साउंड मिक्सर खरीदा था, लेकिन डेढ़ साल हो गया, उससे अभी एक भी शो नहीं किया है।- अशोक बख्शी, लाइट एंड साउंड सर्विस
डेढ़ साल से काम बंद.. बिना कमाई के दे रहे 30,000 किराया
पिछले डेढ़ साल से सारा कामकाज ठप है। कलाग्राम, गायकों और नृत्य से जुड़े कार्यक्रम, शादी, स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रम, अभिनय इत्यादि से जुडे़ स्टेज पर हमारे साउंड सिस्टम ही आवाज देते थे। डेढ़ वर्ष से इन सब पर पाबंदियां लगने के कारण घर बैठने को मजबूर हो गए हैं। बिना कामकाज के हर महीने गोदाम का 30 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है। सरकार किसानों को सहायता प्रदान करती है, लेकिन मंच पर सरकार और कलाकारों की दर्शकों के बीच आवाज पहुंचाने वाले सदस्यों को भूल बैठी है। इस वर्ष की शुरुआत में काम दोबारा से शुरू होने की थोड़ी उम्मीद जगी थी, लेकिन सरकार ने शादियों में सिर्फ 20-30 लोगों की ही अनुमति प्रदान की। ऐसे में कोई भी शादी में साउंड-लाइट आदि शो के लिए रुपये खर्च करने के लिए राजी नहीं। हमने चंडीगढ़-ट्राइसिटी डीजे एंड लाइट एसोसिएशन भी बनाई है। इसके जरिए प्रशासक, प्रधानमंत्री आदि को अपनी परेशानी पत्र के जरिए जाहिर भी की, लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं मिला। इधर-उधर से कर्ज लेकर घर खर्च चला रहे हैं। साउंड सिस्टम के सामान आदि के लिए भी बैंकों का कर्ज बकाया पड़ा है, उसमें भी कोई छूट नहीं दी जा रही है। इस महामारी ने हमें ऐसा झटका दिया है, जिससे संभलने में हमें कई साल लग जाएंगे। - एसके सिंगला, रेडसन एंटरटेनमेंट सर्विस
आज हमारी ही आवाज बंद है..
हम बैकग्राउंड से ताल्लुक रखते हैं, जिनका शो में नाम नहीं लिया जाता। लेकिन हमारे बिना किसी भी कलाकार, नेता, नाटक व गायन शो की आवाज जनता तक नहीं पहुंच सकती। हमारी टीम मंच पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति को आवाज देती है, पर आज हमारी ही आवाज बंद है। फरवरी 2020 से काम बंद है। बेटा वकील है, लॉकडाउन में उसका काम भी बंद रहा। अब काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साउंड सिस्टम का सामान गोदाम में रखा हुआ है। बिना सहयोगियों के अभी कुछ इधर-उधर भी नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण बंद पड़े लकड़ी के डांस फ्लोर को दीमक खा गई है। वर्ष 2020 की शुरुआत में सीजन से पहले साढ़े छह लाख का साउंड मिक्सर खरीदा था, लेकिन डेढ़ साल हो गया, उससे अभी एक भी शो नहीं किया है।- अशोक बख्शी, लाइट एंड साउंड सर्विस
डेढ़ साल से काम बंद.. बिना कमाई के दे रहे 30,000 किराया
पिछले डेढ़ साल से सारा कामकाज ठप है। कलाग्राम, गायकों और नृत्य से जुड़े कार्यक्रम, शादी, स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रम, अभिनय इत्यादि से जुडे़ स्टेज पर हमारे साउंड सिस्टम ही आवाज देते थे। डेढ़ वर्ष से इन सब पर पाबंदियां लगने के कारण घर बैठने को मजबूर हो गए हैं। बिना कामकाज के हर महीने गोदाम का 30 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है। सरकार किसानों को सहायता प्रदान करती है, लेकिन मंच पर सरकार और कलाकारों की दर्शकों के बीच आवाज पहुंचाने वाले सदस्यों को भूल बैठी है। इस वर्ष की शुरुआत में काम दोबारा से शुरू होने की थोड़ी उम्मीद जगी थी, लेकिन सरकार ने शादियों में सिर्फ 20-30 लोगों की ही अनुमति प्रदान की। ऐसे में कोई भी शादी में साउंड-लाइट आदि शो के लिए रुपये खर्च करने के लिए राजी नहीं। हमने चंडीगढ़-ट्राइसिटी डीजे एंड लाइट एसोसिएशन भी बनाई है। इसके जरिए प्रशासक, प्रधानमंत्री आदि को अपनी परेशानी पत्र के जरिए जाहिर भी की, लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं मिला। इधर-उधर से कर्ज लेकर घर खर्च चला रहे हैं। साउंड सिस्टम के सामान आदि के लिए भी बैंकों का कर्ज बकाया पड़ा है, उसमें भी कोई छूट नहीं दी जा रही है। इस महामारी ने हमें ऐसा झटका दिया है, जिससे संभलने में हमें कई साल लग जाएंगे। - एसके सिंगला, रेडसन एंटरटेनमेंट सर्विस
जिंदगी बेरंग हो गई..
किसी वक्त बड़े नाटक कार्यक्रमों, फिल्मों और गानों के शूट में कलाकारों का मेकअप करता था। काफी काम और शोहरत थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने सबकुछ बेरंग कर दिया। महामारी के भयानक दौर में ज्यादातर शूटिंग बंद हैं, लेकिन जो प्रोजेक्ट हो भी रहे हैं, उनमें भी कम से कम क्रू सदस्यों के साथ काम करवाया जा रहा है। मैं फ्रीलांस मेकअप आर्टिस्ट हूं, इसलिए कभी किसी पार्लर या सैलून के साथ काम नहीं किया है। इस समय वे भी लगभग बंद ही हैं। पूरा परिवार मेरी कमाई पर ही निर्भर है, बजट कम होने पर कोई नया काम भी शुरू नहीं कर पा रहा हूं। हालात यह हैं कि कमाई कम होने के कारण मोहाली का बड़ा घर छोड़कर चंडीगढ़ के सेक्टर-45 में छोटा घर किराए पर लिया है। खर्चे कम करने के लिए बच्चे का ट्यूशन भी छुड़वाना पड़ा है। नया काम तलाशने निकलो तो मायूसी हाथ लगती है। जिस डायरेक्टर को फोन करो तो एक ही जवाब मिलता है, फिलहाल कोई प्रोजेक्ट नहीं चल रहा है। काम शुरू होगा तो जरूर संपर्क करेंगे। - सुधीर, मेकअप आर्टिस्ट
जैसे-तैसे हो रहा गुजारा, मेकअप के दाम भी गिरे
कोरोना महामारी ने हमारी जिंदगी बेरंग कर दी है। अपनी मेकअप कला से हम कलाकारों को नया रूप देते हैं। आज कोरोना के चलते काम छिन जाने से परिवार पालना मुश्किल हो गया है। मैं हमेशा ही फ्रीलांस शूट के प्रोजेक्ट करता आ रहा हूं। प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय मिलता है। जब से लॉकडाउन लगा है, तब से काम तो प्रभावित हुआ ही है, मानदेय में भी गिरावट आई है। बड़े बड़े कलाकारों, निर्माता, निर्देशकों से जो संबंध बनाए थे, उनके आधार पर ही इनडोर शूट के कुछ प्रोजेक्ट में काम कर रहा हूं। पता नहीं पुराने दिन कब लौटेंगे। काम को बढ़ाने के लिए मैंने लॉकडाउन में अपने घर पर कुछ महीने पहले ही स्टूडियो शुरू किया है। अब शादी और प्री-वेडिंग इत्यादि में मेकअप का काम भी लेना शुरू किया है। पहले लगभग आठ वर्ष बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में मेकअप किया। लगभग 16 वर्षों तक काम के बाद चंडीगढ़ में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में खुद की पहचान बनाई है, अब शूटिंग बंद होने से मेरा काम प्रभावित हो गया है। - जिम्मी, मेकअप आर्टिस्ट
जैसे-तैसे हो रहा गुजारा, मेकअप के दाम भी गिरे
कोरोना महामारी ने हमारी जिंदगी बेरंग कर दी है। अपनी मेकअप कला से हम कलाकारों को नया रूप देते हैं। आज कोरोना के चलते काम छिन जाने से परिवार पालना मुश्किल हो गया है। मैं हमेशा ही फ्रीलांस शूट के प्रोजेक्ट करता आ रहा हूं। प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय मिलता है। जब से लॉकडाउन लगा है, तब से काम तो प्रभावित हुआ ही है, मानदेय में भी गिरावट आई है। बड़े बड़े कलाकारों, निर्माता, निर्देशकों से जो संबंध बनाए थे, उनके आधार पर ही इनडोर शूट के कुछ प्रोजेक्ट में काम कर रहा हूं। पता नहीं पुराने दिन कब लौटेंगे। काम को बढ़ाने के लिए मैंने लॉकडाउन में अपने घर पर कुछ महीने पहले ही स्टूडियो शुरू किया है। अब शादी और प्री-वेडिंग इत्यादि में मेकअप का काम भी लेना शुरू किया है। पहले लगभग आठ वर्ष बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में मेकअप किया। लगभग 16 वर्षों तक काम के बाद चंडीगढ़ में पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में खुद की पहचान बनाई है, अब शूटिंग बंद होने से मेरा काम प्रभावित हो गया है। - जिम्मी, मेकअप आर्टिस्ट