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Chandigarh News: आंत के कैंसर से बचाव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक कारगर, 40 की उम्र के बाद नियमित कराएं जांच

Mon, 13 Mar 2023 01:33 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 13 Mar 2023 01:33 AM IST
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Artificial intelligence technology is effective in preventing bowel cancer, get regular checkup done after the age of 40
चंडीगढ़। आंत में होने वाले कैंसर (कोलन कैंसर) से बचाव के लिए जरूरी है कि 40 की उम्र के बाद से नियमित जांच कराई जाए। वहीं इस बीमारी पर काबू पाने के लिए विशेषज्ञों ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद लेनी शुरू कर दी है। इस तकनीक से कैंसर पॉलिप्स का समय रहते पता लगाकर इलाज किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक इस कैंसर से बचाव में इस लिए बेहद कारगर साबित हो रही है, क्योंकि इसके मरीजों में बीमारी का लक्षण आने में 10 से 15 साल का समय लग जाता है जिससे इलाज संभव नहीं हो पाता। ऐसे में शुरुआती दौर में ही लक्षणों व आंत में होने वाले बदलाव की तरफ संकेत देकर यह तकनीक डॉक्टर को अलर्ट कर देती है जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है।
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पीजीआई के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. उषा दत्ता ने बताया कि पहले इसे पश्चिमी देशों की बीमारी माना जाता था। लेकिन अब भारत में भी कोलन कैंसर के मरीज काफी संख्या में सामने आ रहे हैं। प्रो. उषा ने बताया कि शुरुआती दौर में इसके लक्षणों की जानकारी नहीं होती है। इसलिए खून की कमी, शौच में खून आने, वजन कम होने, भूख कम लगने, पेट में दर्द होने और पेट फूलने जैसे शिकायतों के आधार पर मरीज की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि कहीं उसे कोलन कैंसर तो नहीं। इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से मरीज की कोलोनोस्कोपी कर संक्रमण के शुरुआती चरण की जानकारी ली जाती है।
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स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी जांच जरूरी
सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी ऑफ इंडिया के सदस्य डॉ. मोहिनिष छाबड़ा ने बताया कि कोलोनोस्कोपी जांच 40 साल से ज्यादा उम्र के स्वस्थ व्यक्तियों को भी करवाना आवश्यक है। स्क्रीनिंग द्वारा उनमें बीमारियों का पता लगाया जा सकता है जो बाहरी तौर पर स्वस्थ है और जिन्हें बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं। एक असामान्य कोशिका को कोलोरेक्टल कैंसर में विकसित होने में 10-15 साल लगते हैं। हम उन्हें एक पॉलीप के चरण में भी निकाल सकते हैं और कैंसर को होने से रोक सकते हैं।
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इनको ज्यादा खतरा
- यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है
- यदि परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स के मरीज पहले सामने आ चुके हों
-जिन्हें कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स पहले हो चुका है।
- यदि इंफ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोन्स रोग) से पीड़ित हैं।
- यदि परिवार में वंशानुगत कोलोरेक्टल कैंसर सिंड्रोम है।
- यदि कैंसर के इलाज के लिए पेट (पेट) या पेल्विक क्षेत्र में रेडियोथेरेपी करवाया है।
बचाव के लिए यह करें
-अपना वजन नियंत्रण में रखें
-नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करें
-भोजन में रेशेदार फल, सब्जियों और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं
-धूम्रपान, तंबाकू, शराब का सेवन न करें
-कैल्शियम और विटामिन डी युक्त आहार लें

ऐसे काम करती है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बीमारियों के बारे में समय पर संकेत मिल जाते हैं- जैसे कि सांस लेने का अनियमित पैटर्न, रक्तचाप के पैटर्न में बदलाव, वजन में तेजी से कमी, हृदय, मधुमेह और कुछ मामलों में कैंसर से संबंधित बीमारी के संकेतों का भी पता लगाया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के कैंसर के रोगियों की डायग्नोसिस के ऐतिहासिक डेटा का उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया जा सकता है।इसकी मदद से पूर्व-चरणों में कोशिकाओं या ऊतकों में कैंसर के संकेत को इंगित कर सकते हैं। इस तरह से कैंसर को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है।
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