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ब्यास में शीरा डालने के मामले की जांच करेगी अर्जुनराम कमेटी, चंडीगढ़ में होगी बैठक
रघु आदित्य/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 31 May 2018 10:44 AM IST
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ब्यास दरिया
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में कीड़ी अफगाना स्थित चड्ढा शुगर मिल से ब्यास दरिया में शीरा डालने के मामले में राज्य सरकार की कार्रवाई से केंद्र संतुष्ट नहीं है। उसने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है। इसमें सीडब्ल्यूसी, इंडस बेसिन प्रोजेक्ट और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के जल संसाधन अधिकारी शामिल किए गए हैं। समिति की पहली बैठक चंडीगढ़ में इसी हफ्ते प्रस्तावित है।
चड्डा शुगर मिल से ब्यास दरिया में पहुंचे काले-जहरीले मोलासिस (शीरा) से तीन राज्यों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर छाए संकट, सैकड़ों मवेशियों, मछलियों, जल-जीवों की मौत और पानी को रोकने-निकालने के लिए हुई मशक्कत के बाद अब इस मामले की जांच केंद्र सरकार ने अर्जुनराम कमेटी को सौंपी है। जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने अमर उजाला को बताया कि कमेटी तकनीकी खामियों की पहचान करेगी। इसके साथ ही दरिया और इससे जुड़ी नहरों में लगातार हो रहे प्रदूषण को रोकने के उपायों पर भी विचार करेगी।
इसके लिए सभी पक्षों, विशेषज्ञों से बातचीत की जाएगी और उनके सुझाव लिए जाएंगे। ब्यास नदी में जहरीला शीरा फेंकने का मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने चड्ढा शुगर मिल को सील कर दिया और उसकी सिक्योरिटी जब्त कर ली। जबकि पंजाब सरकार ने मिल पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया दिया। अब यह मिल तब तक चालू नहीं हो सकेगी जब तक कि वह पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर लेती। बता दें कि यह फैसला राज्य सरकार को मिली रिपोर्ट के बाद सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिया है। लेकिन केंद्र इस कार्रवाई भर से संतुष्ट नहीं है। वह नदियों में लगातार डाले जा रहे जहरीले अवशिष्ट से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस नीति बनाना चाहता है।
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने इस मसले को काफी गंभीर माना है। इसी लिहाज से कमेटी बनाकर मुझे जिम्मेदारी दी गई है। मसले की पूरी गहराई में जाकर आइंदा ऐसी घटनाओं को रोकने, दोषियों को सजा दिलाने और दरिया में लगातार प्रदूषण की जो शिकायतें सामने आ रही हैं, उनका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
- अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री
सीएम ने ब्यास नदी को हुए नुकसान पर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मिल ने न केवल वॉटर एक्ट, 1974 का उल्लंघन किया, बल्कि फैक्ट्री एक्ट 1948 को भी नजरंदाज किया है। लिहाजा बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित अथॉरिटी को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
- काहन सिंह पन्नू, चेयरमैन, पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
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चड्डा शुगर मिल से ब्यास दरिया में पहुंचे काले-जहरीले मोलासिस (शीरा) से तीन राज्यों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर छाए संकट, सैकड़ों मवेशियों, मछलियों, जल-जीवों की मौत और पानी को रोकने-निकालने के लिए हुई मशक्कत के बाद अब इस मामले की जांच केंद्र सरकार ने अर्जुनराम कमेटी को सौंपी है। जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने अमर उजाला को बताया कि कमेटी तकनीकी खामियों की पहचान करेगी। इसके साथ ही दरिया और इससे जुड़ी नहरों में लगातार हो रहे प्रदूषण को रोकने के उपायों पर भी विचार करेगी।
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इसके लिए सभी पक्षों, विशेषज्ञों से बातचीत की जाएगी और उनके सुझाव लिए जाएंगे। ब्यास नदी में जहरीला शीरा फेंकने का मामला उजागर होने के बाद जिला प्रशासन ने चड्ढा शुगर मिल को सील कर दिया और उसकी सिक्योरिटी जब्त कर ली। जबकि पंजाब सरकार ने मिल पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया दिया। अब यह मिल तब तक चालू नहीं हो सकेगी जब तक कि वह पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की जरूरी शर्तें पूरी नहीं कर लेती। बता दें कि यह फैसला राज्य सरकार को मिली रिपोर्ट के बाद सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लिया है। लेकिन केंद्र इस कार्रवाई भर से संतुष्ट नहीं है। वह नदियों में लगातार डाले जा रहे जहरीले अवशिष्ट से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ठोस नीति बनाना चाहता है।
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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने इस मसले को काफी गंभीर माना है। इसी लिहाज से कमेटी बनाकर मुझे जिम्मेदारी दी गई है। मसले की पूरी गहराई में जाकर आइंदा ऐसी घटनाओं को रोकने, दोषियों को सजा दिलाने और दरिया में लगातार प्रदूषण की जो शिकायतें सामने आ रही हैं, उनका समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
- अर्जुनराम मेघवाल, केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री
सीएम ने ब्यास नदी को हुए नुकसान पर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। मिल ने न केवल वॉटर एक्ट, 1974 का उल्लंघन किया, बल्कि फैक्ट्री एक्ट 1948 को भी नजरंदाज किया है। लिहाजा बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में संबंधित अथॉरिटी को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार मिल अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
- काहन सिंह पन्नू, चेयरमैन, पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड