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1.1 करोड़ रुपये के वेतन घोटाले में एक और हवलदार गिरफ्तार
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चंडीगढ़। अपराध शाखा की एसआईटी ने 1.1 करोड़ रुपये के वेतन घोटाले मामले में एक और हवलदार को गिरफ्तार किया है। वहीं सोमवार को गिरफ्तार किए हवलदार वरिंदर कुमार और सिपाही सविंदर को एसआईटी ने मंगलवार को जिला अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं पकड़े गए हवलदार योगेंद्र को पुलिस बुधवार को अदालत में पेश करेगी। एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इनके खातों में भी रुपये गए हैं। जिस समय वेतन विभाग में घोटाला हुआ, उस दौरान तीनों आरोपी वहीं तैनात थे।
एसआईटी के अधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपी घोटाले में शामिल हैं। जांच में आरोपियों के खिलाफ सबूत भी मिले हैं। इनके खातों में रुपयों की ट्रांजेक्शन भी हुई है। एसआईटी ने वरिंदर कुमार और सिपाही सविंदर सिंह को सोमवार को गिरफ्तार किया था। ज्ञात हो कि पुलिस विभाग ने वेतन घोटाले का खुलासा होने के बाद सभी कर्मचरियों को तुरंत पुलिस लाइन में ट्रांसफर कर पूरा स्टाफ बदल दिया था। इस मामले में अब तक वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी, चार हवलदार, सिपाही और होमगार्ड की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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ऑनलाइन बिलिंग का काम था हवलदार वरिंद्र के पास
सूत्रों ने बताया कि वरिंद्र कुमार वेतन विभाग में खरीदे जाने वाले सामान के लेन-देन को लेकर ऑनलाइन बिलिंग करता था। इसके अलावा वह पुलिसकर्मियों का एरियर भी बनाता था। सूत्रों ने बताया कि सैलेरी घोटाले का खुलासा होने के बाद वरिंद्र कुमार की प्रमोशन भी रुकी हुई थी। वरिंद्र कुमार ने हवलदार से एएसआई बनना था। वर्तमान में वरिंदर सीआईडी ब्रांच में तैनात था।
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सितंबर 2021 को वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी की हुई थी गिरफ्तारी
सितंबर 2021 को इस मामले में आरोपी होमगार्ड सुरजीत सिंह और वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी जूनियर असिस्टेंट बलविंदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी कैग से आई ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। पुलिस जांच में कई पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे। नवंबर 2021 में एसआईटी ने हवलदार नरेश कुमार को गिरफ्तार किया था। वहीं जांच के दौरान हवलदार वेद प्रकाश को गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में चारों आरोपी जेल में हैं।
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जांच में हुआ था खुलासा, तीन साल में किया 1.1 करोड़ का घोटाला
साल 2013 में पुलिस विभाग के वेतन विभाग में बलविंदर प्रभारी के रूप में तैनात था। वहीं, होमगार्ड सुरजीत सिंह उसका सहायक था। वर्ष 2019 में पुलिस को शिकायत मिली कि मुलाजिमों के खाते में अतिरिक्त रुपये डालकर घोटाला किया जा रहा है। इसके बाद दिसंबर 2019 में पुलिस ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर कैग से मामले की ऑडिट की मांग की। जांच रिपोर्ट में पता चला कि साढ़े तीन साल में 1.1 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके बाद मामले में एसआईटी गठित की गई और केस को क्राइम ब्रांच सौंप को दिया गया। जांच में पता चला कि 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के खाते में अतिरिक्त वेतन डालकर घोटाला किया है। सूत्रों के अनुसार आरोपी मुलाजिमों के खातों में ज्यादा सैलरी डालने के बाद उनसे बाकी की रकम अपने खातों में जमा करा लेते थे।
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एसआईटी के अधिकारी ने बताया कि तीनों आरोपी घोटाले में शामिल हैं। जांच में आरोपियों के खिलाफ सबूत भी मिले हैं। इनके खातों में रुपयों की ट्रांजेक्शन भी हुई है। एसआईटी ने वरिंदर कुमार और सिपाही सविंदर सिंह को सोमवार को गिरफ्तार किया था। ज्ञात हो कि पुलिस विभाग ने वेतन घोटाले का खुलासा होने के बाद सभी कर्मचरियों को तुरंत पुलिस लाइन में ट्रांसफर कर पूरा स्टाफ बदल दिया था। इस मामले में अब तक वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी, चार हवलदार, सिपाही और होमगार्ड की गिरफ्तारी हो चुकी है।
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ऑनलाइन बिलिंग का काम था हवलदार वरिंद्र के पास
सूत्रों ने बताया कि वरिंद्र कुमार वेतन विभाग में खरीदे जाने वाले सामान के लेन-देन को लेकर ऑनलाइन बिलिंग करता था। इसके अलावा वह पुलिसकर्मियों का एरियर भी बनाता था। सूत्रों ने बताया कि सैलेरी घोटाले का खुलासा होने के बाद वरिंद्र कुमार की प्रमोशन भी रुकी हुई थी। वरिंद्र कुमार ने हवलदार से एएसआई बनना था। वर्तमान में वरिंदर सीआईडी ब्रांच में तैनात था।
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सितंबर 2021 को वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी की हुई थी गिरफ्तारी
सितंबर 2021 को इस मामले में आरोपी होमगार्ड सुरजीत सिंह और वेतन विभाग के तत्कालीन प्रभारी जूनियर असिस्टेंट बलविंदर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सेक्टर-3 थाना पुलिस ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। इन दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी कैग से आई ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। पुलिस जांच में कई पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे। नवंबर 2021 में एसआईटी ने हवलदार नरेश कुमार को गिरफ्तार किया था। वहीं जांच के दौरान हवलदार वेद प्रकाश को गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में चारों आरोपी जेल में हैं।
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जांच में हुआ था खुलासा, तीन साल में किया 1.1 करोड़ का घोटाला
साल 2013 में पुलिस विभाग के वेतन विभाग में बलविंदर प्रभारी के रूप में तैनात था। वहीं, होमगार्ड सुरजीत सिंह उसका सहायक था। वर्ष 2019 में पुलिस को शिकायत मिली कि मुलाजिमों के खाते में अतिरिक्त रुपये डालकर घोटाला किया जा रहा है। इसके बाद दिसंबर 2019 में पुलिस ने मामले की आंतरिक जांच शुरू कर कैग से मामले की ऑडिट की मांग की। जांच रिपोर्ट में पता चला कि साढ़े तीन साल में 1.1 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। इसके बाद मामले में एसआईटी गठित की गई और केस को क्राइम ब्रांच सौंप को दिया गया। जांच में पता चला कि 200 से अधिक पुलिसकर्मियों के खाते में अतिरिक्त वेतन डालकर घोटाला किया है। सूत्रों के अनुसार आरोपी मुलाजिमों के खातों में ज्यादा सैलरी डालने के बाद उनसे बाकी की रकम अपने खातों में जमा करा लेते थे।