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हरियाणा विधानसभा विशेष सत्र: अनिल विज ने छेड़ा नई राजधानी का राग, कुलदीप बिश्नोई का मिला साथ, मगर अभय चौटाला ने किया कटाक्ष

Tue, 05 Apr 2022 09:44 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 05 Apr 2022 09:44 PM IST
सार

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा के विशेष सत्र में सरकारी संकल्प चर्चा के दौरान चंडीगढ़ के प्रशासक पद पर हरियाणा का दावा भी ठोका। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के प्रशासक, पंजाब के ही राज्यपाल क्यों बनाए जाते हैं।

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Anil Vij raised issue of new capital during special session of Haryana Assembly
हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में चंडीगढ़ के मुद्दे पर पंजाब को जवाब देने के लिए लाए गए सरकारी संकल्प पर चर्चा के दौरान पक्ष, विपक्ष के विधायक एक-दूसरे पर निशाना साधने से नहीं चूके। गृहमंत्री अनिल विज ने चर्चा के दौरान नई राजधानी बनाने की बात छेड़ी तो अभय चौटाला ने उन पर तुरंत कटाक्ष कर डाला। हालांकि, विज की बात का चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई ने समर्थन किया।

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हरियाणा के मेहनतकश लोगों ने पंजाब से बड़ा बनकर दिखाया है। अभय चौटाला ने कहा कि सत्ता पक्ष के लोगों को सलाह कर लेनी चाहिए थी कि सदन में क्या बोलना है, क्या नहीं। गृहमंत्री ने तो मुद्दा ही खत्म कर दिया। एसवाईएल का पानी, हिंदी भाषी क्षेत्र और नई राजधानी के लिए पैसे दे दो और चंडीगढ़ ले लो, ये कोई बात बनती है। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि एसवाईएल का पानी, हिंदी भाषी क्षेत्र और वित्तीय मदद पर नई राजधानी कहीं भी बना सकते हैं। नए भवन बनाने में परहेज नहीं होना चाहिए। भवनों से नहीं, हरियाणा के हित से मतलब है। 
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भूपेंद्र हुड्डा ने चंडीगढ़ के प्रशासक पद पर ठोका हरियाणा का दावा
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा के विशेष सत्र में सरकारी संकल्प चर्चा के दौरान चंडीगढ़ के प्रशासक पद पर हरियाणा का दावा भी ठोका। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ के प्रशासक, पंजाब के ही राज्यपाल क्यों बनाए जाते हैं। रोटेशन प्रणाली में हरियाणा के राज्यपाल को भी प्रशासक नियुक्त किया जाए। 

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एक-एक साल कार्यकाल रखना चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता तो केंद्र सरकार स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति करे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का प्रस्ताव असांविधानिक है। हरियाणा के सभी राजनीतिक दलों को ऐसी प्रदेश विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध एकजुटता से खड़ा होना चाहिए, क्योंकि, इससे पहले भी पंजाब सरकारें हरियाणा के हितों का अतिक्रमण करने की कोशिश की है। 

चंडीगढ़ और एसवाईएल के साथ ही प्रदेश सरकार भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में हरियाणा की स्थायी सदस्यता खत्म करने का मसला भी केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाए। भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में पहले सदस्य (पावर) पंजाब से और सदस्य (सिंचाई) हरियाणा से होते थे लेकिन नए नियमों में यह अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। नए नियमों से हरियाणा के हित सुरक्षित नहीं रह पाएंगे। हरियाणा सरकार को इसका भी विरोध करना चाहिए।

कांग्रेस-भाजपा ने एसवाईएल निर्माण के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए: अभय
चंडीगढ़ के मुद्दे पर लाए गए प्रस्ताव का इनेलो ने समर्थन किया। ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि हम शुरू से ही चंडीगढ़ के समर्थन में हैं। इनेलो एकमात्र पार्टी है, जिसने एसवाईएल को लेकर पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाए और गंभीरता से लड़ाई लड़ी। मगर कांग्रेस और भाजपा सरकारों ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किए। अगर वर्तमान और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री साफ नीयत से प्रयास करते तो हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल गया होता।

उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्री रहते 2002 में एसवाईएल पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हरियाणा के हक में आया था लेकिन पंजाब की कांग्रेस सरकार ने उसे नहीं माना। जितने भी अंतरराज्यीय जल समझौते थे, उन्हें एक विधेयक पारित कर रद्द कर दिया। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब द्वारा पारित उक्त विधेयक को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया। 

मुख्यमंत्री ने 2016 में सर्वदलीय बैठक बुलाकर प्रधानमंत्री से मिलने का समय लेने की बात कही थी लेकिन छह साल में नहीं ले पाए। हरियाणा के पंजाब से अलग होने पर दोनों प्रदेशों की सीमाएं निर्धारित करने के लिए 23 अप्रैल 1966 को न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में हिसार, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, रोहतक, करनाल, नरवाना और जींद तहसील, खरड़ व चंडीगढ़ कैपिटल प्रोजेक्ट, नारायणगढ़, अंबाला और जगाधरी क्षेत्र हरियाणा को दिए लेकिन यह फैसला लागू नहीं हो सका। चंडीगढ़ को हरियाणा और पंजाब दोनों की राजधानी बना दिया गया।

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