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अब आंगनवाड़ी, क्रेच और प्ले स्कूल रहेंगे नजर में, बड़ी कवायद

Fri, 22 Jul 2016 09:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Updated Fri, 22 Jul 2016 09:24 PM IST
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सभी आंगनवाड़ी और क्रेच सेंटरों में अब हेराफेरी नहीं की जा सकेगी। अब इनकी निगरानी सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट के अधिकारियों के साथ अलग से बनाई गई कमेटी भी करेगी। यह कमेटी बच्चों को दिए जाने वाले मिल से लेकर सुविधाओं का पूरा ध्यान रखेगी और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देगी। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने निगरानी के लिए कम्यूनिटी इनवाल्वमेंट कमेटी का गठन किया है। एरिया काउंसलर या सरपंच, आंगनवाड़ी सुपरवाइजर, एनएनएम और आंगनवाड़ी में आने वाले बच्चों के अभिभावक इस कमेटी के सदस्य बनाए गए हैं।
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डिपार्टमेंट की डायरेक्टर निशु सिंगल ने बताया कि शहर में इस समय 500 आंगनवाड़ी और क्रेच सेंटर संचालित किए जा रहे है। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी व क्रेच सेंटर से अभिभावकों की बार-बार शिकायत आती रही है। आंगनवाड़ी में बच्चों को दिया जाने वाला वाले खान-पान, बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए शुरू की गई योजनाओं को पूरी तरह लागू न करने जैसी शिकायतों को ध्यान में रखते हुए कमेटी गठित करने का फैसला लिया है। यह कमेटी इन आंगनवाड़ी व क्रेच सेंटर की पूरी तरह निगरानी करेगी। निगरानी के बाद कमेटी प्रतिमाह अपनी रिपोर्ट डिपार्टमेंट को देगी।
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डिपार्टमेंट ने केंद्र सरकार से मांगी 72 लाख की ग्रांट
सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट ने केंद्र सरकार से 72.45 लाख रुपए की ग्रांट मांगी है। इस ग्रांट के लिए डिपार्टमेंट ने दो एनजीओ द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत पर किए गए सर्वे रिपोर्ट का हवाला दिया है। भारत प्रकाश फाउंडेशन और वत्सल छाया एनजीओ ने यह सर्वे रिपोर्ट सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट को सौंपी है। दोनों एनजीओ ने अपनी रिपोर्ट में यह बताया है कि आंगनवाड़ी के लिए कमरा किराए पर लेने केलिए जो 750 रुपये दिए जाते हैं वह नाकाफी हैं। इतने पैसों में चंडीगढ़ के अंदर कहीं भी कोई उपयुक्त जगह मिलना मुश्किल है। रैंट की इस सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। एनजीओ ने बताया कि बहुत सी आंगनवाड़ी बरामदों में चल रही हैं। कुछ तो बिल्कुल छोटे-छोटे स्थानों पर हैं। जिनकी हालत खराब है।
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