चंडीगढ़: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर नहीं मिला रहा मानदेय, केंद्रों के किराए पर लाखों उड़ा रहा विभाग
आंगनबाड़ी केंद्रों में मुख्य रूप से एक कार्यकर्ता और एक सहायिका होती हैं। बच्चों को संभालना, उनके लिए दैनिक पौष्टिक आहार की व्यवस्था, स्कूल में दाखिले के लिए बच्चों को मानसिक व शारीरिक तौर पर तैयार करना, उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता का ध्यान रखना और इसके साथ ही गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं को परामर्श देना, ये सभी काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं द्वारा किए जाते हैं। कोरोना काल और टीकाकरण अभियान में भी ये पूरी तत्परता से कार्य कर रही हैं।
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कोरोना काल में भी लगातार सेवा दे रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा लेकिन समाज कल्याण विभाग आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए के नाम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। हैरानी की बात है कि शहर में कुल 450 आंगनबाड़ी केंद्र हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 65 ही सरकारी इमारतों में चल रहे हैं। वो भी तब जब शहर में 117 सरकारी स्कूल हैं, लगभग हर सेक्टर में कम्यूनिटी सेंटर व अन्य सरकारी इमारतों की भरमार है।
समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2018-19 में आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए के रूप में 1.48 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उस वर्ष यह राशि आंगनबाड़ी सेवाओं के कुल बजट की 27 प्रतिशत थी। वर्ष 2019-20 में 1.44 करोड़ रुपये किराए के रूप में दिए गए जबकि कुल बजट का 19 प्रतिशत था। वहीं, वर्ष 2020-21 में 28.20 लाख रुपये चुकाए गए, जो बजट का पांच प्रतिशत है।
सवाल यह है कि पिछले कुछ वर्षों से चंडीगढ़ में एक भी आंगनबाड़ी केंद्र बंद नहीं हुआ तो फिर किराया राशि 1.48 करोड़ से दो साल में ही 28.20 लाख रुपये तक कैसे पहुंच गई। एक सवाल के जवाब में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा लोकसभा में ये आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इन आंकड़ों को देख कर यह सवाल भी उठा कि चंडीगढ़ में जब 117 सरकारी स्कूल, लगभग हर सेक्टर में कम्यूनिटी सेंटर व अन्य सैकड़ों सरकारी इमारतें हैं तो इतनी ज्यादा संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र निजी इमारतों में क्यों चलाए जा रहे हैं। उधर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
किस महीने का मानदेय आया-किस महीने का नहीं, पता नहीं चलता
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को केंद्र और प्रशासन की ओर से मानदेय जारी होता है। इनमें से 3600 प्रशासन जबकि 4500 रुपये केंद्र सरकार की ओर से मिलते हैं लेकिन लंबे समय से मानदेय महीनेवार न मिलने से कार्यकर्ता परेशान हैं। ये वो समय है जब अधिकांश कार्यकर्ता कोरोना जैसी महामारी में सेवा दे रहे हैं।
इसमें हर महीने जब कार्यकर्ता अपने खाते की पासबुक एंट्री करवाते हैं तो उसमें महीनेवार मानदेय का जिक्र नहीं होता, जिससे उन्हें यह पता नहीं चलता कि किस महीने का मानदेय मिल चुका है और किस महीने का लंबित है। बता दें कि शहर के कुल 450 आंगनबाड़ी केंद्रों में 950 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किस वित्तीय वर्ष में कितना किराया दिया गया
- वर्ष 2018-19 1.48 करोड़
- वर्ष 2019-20 1.44 करोड़
- वर्ष 2020-21 28.20 लाख
(नोट: लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़े)
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय के लिए कई महीनों का इंतजार करना पड़ता है। केंद्र और राज्य की राशि अलग-अलग आती है, इससे कर्मचारियों को कभी पता ही नहीं चलता कि किस महीने का मानदेय आया है। कार्यकर्ता कोरोना में बिना रुके कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद इन्हें न्यूनतम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है, जो शर्मनाक है। - कमलजीत सिंह, अध्यक्ष, एक्टू (चंडीगढ़)
प्रशासन की ओर से मानदेय का शेयर समय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते में भेज दिया जाता है। केंद्र की राशि आने में कुछ समय लगता है। इसे लेकर विभाग केंद्र के साथ संपर्क में बना हुआ है। किस महीने की राशि आई है, अगर कार्यकर्ताओं को ये नहीं पता चल पा रहा है तो इसके लिए हम हर बार राशि रिलीज करने के साथ मैसेज भेजने की व्यवस्था को शुरू कर सकते हैं। - नितिका पवार, सचिव, समाज कल्याण विभाग चंडीगढ़