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'बेटा गंवाया, बहू छोड़ गई, पोती को ले गई, मुआवजे के पैसे भी ले गई...अब मैं रोटी कहां से खाऊंगी'
Tue, 25 Dec 2018 10:30 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Dec 2018 10:30 AM IST
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अमृतसर ट्रेन हादसा
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इस बूढ़ी मां की दर्दभरी आपबीती सुनेंगे तो दिल भर आएगा। अमृतसर ट्रेन हादसे ने इस मां को ऐसा जख्म दिया है, कि कोई इसे भर नहीं सकता। दर्द और बेबसी का आलम उसकी आंखों में नजर आता है। ये हैं अमृतसर निवासी स्वर्ण कौर। इनका बेटा दलबीर सिंह रामलीला में रावण का किरदार निभाता था। दशहरे वाले दिन हुए ट्रेन हादसे में उसने तीन लोगों की जान बचाई, लेकिन अपनी जान गंवा बैठा। हादसे को दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी इस मां की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे।
क्योंकि दलबीर की मौत के बाद उसकी पत्नी नवप्रीत कौर अपने दहेज का पूरा सामान और बेटी मनप्रीत को साथ लेकर मायके चली गई थी। साथ ही पंजाब सरकार द्वारा दी गई राशि के साथ कुछ अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा दी गई राहत की राशि भी ले गई है। आर्थिक मदद के लिए पैसा मिला, लेकिन उस पैसे से घरों में दरारें भी आ गई हैं। हादसे ने न केवल 59 लोगों की जिंदगी लील ली बल्कि रिश्तों के ताने-बाने भी तार-तार कर दिए। अब उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटे की अंतिम निशानी दलबीर की बेटी मनप्रीत (8 माह) को अपने पास रखने की है।
फिर मैं रोटी कहां से खाऊंगी
वे कहती हैं कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, पंजाब सरकार मेरे बड़े बेटे को नौकरी दे दे। कुछ पल खामोश रहने के बाद स्वर्ण कौर ने कहा कि पता नहीं मोदी सरकार ने दो लाख की राशि अभी तक क्यों नहीं भेजी। जब उन्हें कहा गया कि यह राशि भी बहू को मिलेगी, तो रोते-रोते बोली फिर मैं रोटी कहां से खाऊंगी।
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क्योंकि दलबीर की मौत के बाद उसकी पत्नी नवप्रीत कौर अपने दहेज का पूरा सामान और बेटी मनप्रीत को साथ लेकर मायके चली गई थी। साथ ही पंजाब सरकार द्वारा दी गई राशि के साथ कुछ अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा दी गई राहत की राशि भी ले गई है। आर्थिक मदद के लिए पैसा मिला, लेकिन उस पैसे से घरों में दरारें भी आ गई हैं। हादसे ने न केवल 59 लोगों की जिंदगी लील ली बल्कि रिश्तों के ताने-बाने भी तार-तार कर दिए। अब उनकी सबसे बड़ी चिंता बेटे की अंतिम निशानी दलबीर की बेटी मनप्रीत (8 माह) को अपने पास रखने की है।
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फिर मैं रोटी कहां से खाऊंगी
वे कहती हैं कि मुझे कुछ नहीं चाहिए, पंजाब सरकार मेरे बड़े बेटे को नौकरी दे दे। कुछ पल खामोश रहने के बाद स्वर्ण कौर ने कहा कि पता नहीं मोदी सरकार ने दो लाख की राशि अभी तक क्यों नहीं भेजी। जब उन्हें कहा गया कि यह राशि भी बहू को मिलेगी, तो रोते-रोते बोली फिर मैं रोटी कहां से खाऊंगी।
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बड़ा बेटा अब तक खुद को सदमे से निकाल नहीं पाया
स्वर्ण कौर कहती हैं कि बड़ा बेटा बलबीर काम पर जाता था, लेकिन जब से दलबीर की मौत हुई है, उसका मजदूरी करने में दिल नहीं लग रहा। भाई को याद करते ही रोना शुरू कर देता है। वाहेगुरु का शुक्र है कि दिल्ली से आए कुछ लोगों ने मेरी बात सुनकर पोती मनप्रीत कौर के नाम 10 लाख की राशि उसके 18 साल के होने तक के लिए जमा करवा दी। इसके बाद भी उन्हें संदेह है कि बहू के मायके वाले उस राशि को कही खुर्द-बुर्द न कर दें।
स्वर्ण कौर कहती हैं कि मेरी बहू ने मुझे फूटी कौड़ी नहीं दी। दलबीर की मौत के बाद उसके माता-पिता घर आए। कहने लगे कि इसकी उम्र छोटी है। जिंदगी अकेले नहीं जी जा सकती और नवप्रीत को अपने साथ ले गए। वे कहती हैं कि बहू बेशक अपना घर बसाए, लेकिन मुझे मेरे बेटे की निशानी दे जाए। जब बहू की शादी हो जाएगी तो क्या मुझे अपने पोती लेने का अधिकार नहीं है। खुद ही पूछे इस सवाल पर स्वर्ण कौर की आंखें छलकने लगी।
स्वर्ण कौर कहती हैं कि मेरी बहू ने मुझे फूटी कौड़ी नहीं दी। दलबीर की मौत के बाद उसके माता-पिता घर आए। कहने लगे कि इसकी उम्र छोटी है। जिंदगी अकेले नहीं जी जा सकती और नवप्रीत को अपने साथ ले गए। वे कहती हैं कि बहू बेशक अपना घर बसाए, लेकिन मुझे मेरे बेटे की निशानी दे जाए। जब बहू की शादी हो जाएगी तो क्या मुझे अपने पोती लेने का अधिकार नहीं है। खुद ही पूछे इस सवाल पर स्वर्ण कौर की आंखें छलकने लगी।