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Chandigarh News: बिल्डिंग वॉयलेशन पर जुर्माने में संशोधन की तैयारी.. उद्योगपतियों-व्यापारियों को राहत की उम्मीद
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चंडीगढ़। शहर के हजारों उद्योगपतियों और व्यापारियों को भवन उल्लंघन मामलों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। प्रशासन ने बिल्डिंग वॉयलेशन पर लगाए जाने वाले जुर्मानों को तर्कसंगत बनाने के लिए कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव गृह मंत्रालय (एमएचए) को भेज दिया है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधन लागू किया जा सकेगा जिससे प्रशासन अपने स्तर पर बिल्डिंग वॉयलेशन के मामलों में जुर्माने को तर्कसंगत बना सकेगा। एस्टेट ऑफिस ने इस समय शहर में पांच हजार लोगों को बिल्डिंग वॉयलेशन और मिसयूज के नोटिस जारी किए हैं। इनमें उद्योगपतियों और कारोबारियों पर तो 6 से 9 करोड़ रुपये तक के पेनेल्टी के केस चल रहे हैं।
शहर में 5 हजार से अधिक बिल्डिंग वॉयलेशन के नोटिस लंबित हैं। ये नोटिस मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े हुए हैं। मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि भवन उल्लंघन मामलों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि मौजूदा कानून में बदलाव न होने के कारण कई गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो जुर्माने की राशि संपत्ति की कुल कीमत के बराबर या उससे भी अधिक हो चुकी है, जो पूरी तरह अव्यावहारिक है। ऐसे मामलों के स्थायी समाधान के लिए कानून में संशोधन आवश्यक हो गया है।
मुख्य सचिव के अनुसार एस्टेट ऑफिस द्वारा स्वीकृत नक्शे से अतिरिक्त निर्माण या तय सीमा से अधिक निर्माण पाए जाने पर बिल्डिंग वॉयलेशन का नोटिस जारी किया जाता है। यह कार्रवाई औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक इमारतों में समान रूप से की जाती है। कई बार मामूली उल्लंघन पर भी नोटिस जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन जुर्माने की गणना इतनी तेजी से बढ़ती है कि वह कुछ ही महीनों में करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है।
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10 से 500 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रतिदिन तक जुर्माना
वर्तमान व्यवस्था के तहत एस्टेट ऑफिस द्वारा नोटिस जारी होने के दिन से ही जुर्माना लगना शुरू हो जाता है। यह जुर्माना 10 रुपये से 500 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रति दिन की दर से लगाया जाता है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर जुर्माने की राशि इतनी बढ़ जाती है कि उसका भुगतान करना उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए संभव नहीं रह जाता। कई मामलों में उल्लंघन हटाने के बावजूद जुर्माना बना रहता है जिससे न केवल संबंधित पक्ष परेशान हैं बल्कि एसडीएम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। यदि इन मामलों का समाधान होता है तो अदालतों में लंबित केसों की संख्या भी कम होगी। उद्योगपतियों और व्यापारियों की ओर से जुर्मानों को तर्कसंगत बनाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही थी।
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शहर में 5 हजार से अधिक बिल्डिंग वॉयलेशन के नोटिस लंबित हैं। ये नोटिस मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े हुए हैं। मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद ने बताया कि भवन उल्लंघन मामलों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि मौजूदा कानून में बदलाव न होने के कारण कई गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो जुर्माने की राशि संपत्ति की कुल कीमत के बराबर या उससे भी अधिक हो चुकी है, जो पूरी तरह अव्यावहारिक है। ऐसे मामलों के स्थायी समाधान के लिए कानून में संशोधन आवश्यक हो गया है।
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मुख्य सचिव के अनुसार एस्टेट ऑफिस द्वारा स्वीकृत नक्शे से अतिरिक्त निर्माण या तय सीमा से अधिक निर्माण पाए जाने पर बिल्डिंग वॉयलेशन का नोटिस जारी किया जाता है। यह कार्रवाई औद्योगिक क्षेत्रों और व्यावसायिक इमारतों में समान रूप से की जाती है। कई बार मामूली उल्लंघन पर भी नोटिस जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन जुर्माने की गणना इतनी तेजी से बढ़ती है कि वह कुछ ही महीनों में करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है।
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10 से 500 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रतिदिन तक जुर्माना
वर्तमान व्यवस्था के तहत एस्टेट ऑफिस द्वारा नोटिस जारी होने के दिन से ही जुर्माना लगना शुरू हो जाता है। यह जुर्माना 10 रुपये से 500 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रति दिन की दर से लगाया जाता है। लंबे समय तक मामला लंबित रहने पर जुर्माने की राशि इतनी बढ़ जाती है कि उसका भुगतान करना उद्योगपतियों और व्यापारियों के लिए संभव नहीं रह जाता। कई मामलों में उल्लंघन हटाने के बावजूद जुर्माना बना रहता है जिससे न केवल संबंधित पक्ष परेशान हैं बल्कि एसडीएम कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ भी लगातार बढ़ रहा है। यदि इन मामलों का समाधान होता है तो अदालतों में लंबित केसों की संख्या भी कम होगी। उद्योगपतियों और व्यापारियों की ओर से जुर्मानों को तर्कसंगत बनाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही थी।