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परिजन गिड़गिड़ाए, नहीं मिली एंबुलेंस, मरीज को ऑटो में ले जाना पड़ा
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Jun 2016 01:18 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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पीजीआई में फर्जी एंबुलेंस रैकेट के पर्दाफाश होने के बाद एक नई तरह की समस्या देखने को मिल रही है। पेशेंट को अब एंबुलेंस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। रायपुर खुर्द के एक पेशेंट को जब पीजीआई से जीएमसीएच 32 रेफर किया गया तो उसे एंबुलेंस नहीं मिली। इमरजेंसी में लिखे नंबर पर जब फोन किया गया तो एंबुलेंस संचालक ने कहा कि वह दो घंटे बाद आएगा। पीड़ित ने सिक्योरिटी गार्ड से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था।
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बाद में परिजन अपने मरीज को ऑटो में लेकर गए। ऑटो में न तो ऑक्सीजन थी और न ही कोई दूसरे सुरक्षा उपकरण, जबकि मरीज की हालत काफी गंभीर। दरअसल प्राइवेट ट्रांसपोर्ट्स के फर्जी एंबुलेंस रैकेट का खुलासा होने के बाद सिर्फ एनजीओ की एंबुलेंस को पीजीआई से मरीज ले जाने की अनुमति मिली है। इसके विपरीत एनजीओ के पास एंबुलेंस नाम मात्र की हैं। अब इन एनजीओ के पास इतने फोन आ रहे हैं कि एंबुलेंस की कमी पड़ने लगी है। इसलिए समय पर एंबुलेंस का मिलना मुश्किल हो रहा है।
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मोहन ने बताई आपबीती मोहन के पिता की अचानक तबियत खराब हो गई। जीएमएसएच 16 लेकर गए, वहां से पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई इमरजेंसी पहुंचे तो जीएमसीएच 32 लेकर जाने को कह दिया गया। जब उसने एंबुलेंस के बारे में पूछा तो सिक्योरिटी गार्ड ने कहा कि नंबर लिखे हैं, उस पर कॉल कर लो। कॉल करने पर एंबुलेंस का ड्राइवर बोला कि मुझे आने में कम से कम दो घंटे लगेगा। उधर, मरीज की हालत बिगड़ती जा रही थी। बाद में मोहन ने ऑटो किया और मरीज को जीएमसीएच 32 लेकर गए।
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एक दिन में कम से कम 60 गाड़ियों की जरूरत पुलिस जांच सामने आया था कि एक दिन में 60 से ज्यादा गाड़ियों के चक्कर लगते हैं। इस हिसाब से कम से कम 60 एंबुलेंस की जरूरत पड़ती है। फिलहाल मौजूदा समय में माता मनसा देवी सेवक दल की दो, लाइफ लाइन की छह, रेडक्रास यूटी की चार और पंजाब व हरियाणा रेडक्रास की दो - दो एंबुलेंस है। यानी जरूरत से आधी से भी कम। ऐसे में मरीजों को तो परेशानी आएगी। एनजीओ का कहना है कि जब से रैकेट की गाड़ियां बंद हुई हैं तब से उनकी सभी एंबुलेंस दिन रात बुक हैं। ड्राइवरों को छुट्टी तक नहीं मिल पा रही है। जल्द ही एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जाएगी।
मोबाइल मिलने पर नौ सिक्योरिटी गार्ड को मिली सजा एंबुलेंस रैकेट मिलने के बाद आदेश दिए गए थे कि ड्यूटी के दौरान सिक्योरिटी गार्ड मोबाइल फोन नहीं रखेंगे। जांच के दौरान नौ सिक्योरिटी गार्ड्स के पास से मोबाइल फोन मिले हैं। आदेश का उल्लंघन होने पर सजा के तौर पर उनकी एक दिन की हाजिरी नहीं लगाई गई है। उनकी एक दिन की सैलरी काट ली जाएगी। ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले सिक्योरिटी गार्ड्स को अपने सुपरवाइजर के पास मोबाइल फोन जमा करवाना होता है।