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अपनी ही डॉक्टर का शव भेजने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा पाया पीजीआई
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Jul 2016 01:44 AM IST
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एंबुलेंस
- फोटो : demo
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हिट एंड रन केस में मारी गई डॉक्टर धनश्री के मामले में पीजीआई के संवेदनहीन व्यवहार से जूनियर डॉक्टर काफी आहत हैं। पीडियाट्रिक्स की जूनियर डॉक्टर धनश्री को ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत मंगलवार को नारायणगढ़ के सरकारी अस्पताल जाना था। लेकिन किसी कारणवश उन्हें पीजीआई से ट्रांसपोर्ट नहीं मिल पाया और उन्हें अपनी एक्टिवा से नारायणगढ़ जाना पड़ा। इस बीच एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी और चालक फरार हो गया। एक्सीडेंट में उनकी मौत हो गई।
पीजीआई की एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर (एआरडी) ने बताया कि जब उनकी मौत की खबर पीजीआई पहुंची तो उनके साथी तुरंत स्पॉट पर पहुंचे और धनश्री के शव को पीजीआई ले आए। मोर्चरी में ही उनका शव रखा रहा। धनश्री के परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी गई। पीजीआई के डायरेक्टर वाईके चावला दो बार धनश्री को देखने आए। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया। लेकिन जब धनश्री के शव को अजमेर भेजना पड़ा तो पीजीआई उन्हें एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करा पाया।
एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने कहा कि रेजिडेंट 16 से 18 घंटे काम करते हैं। काम में कोई कोताही नहीं है। इसके बावजूद इतनी अनदेखी सहन नहीं होती। बाद में सभी रेजिडेंट ने प्राइवेट गाड़ी की व्यवस्था की और धनश्री के शव को अजमेर भिजवाया। एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि पीजीआई की डॉक्टर धनश्री के लिए कफन तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उसकी भी व्यवस्था करनी पड़ी। नाराज डॉक्टरों ने आंदोलन की धमकी दी तो पीजीआई प्रशासन नरम पड़ा और रेजिडेंट डॉक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया।
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एआरडी ने उठाए सवाल
एआरडी का कहना है कि आखिर दो दिन बाद पीजीआई प्रशासन क्यों जागा? दो दिन बाद क्यों जारी करना पड़ा प्रेस नोट। जबकि धनश्री की मौत तो मंगलवार को ही हो गई थी। वीरवार शाम को डायरेक्टर और रेजिडेंट डॉक्टरों की मीटिंग हुई। रेजिडेंट्स ने सवाल उठाया कि आखिर धनश्री के शव को भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इस पर पीजीआई ने कहा कि उनकी पालिसी है कि चंडीगढ़ के बाहर एंबुलेंस नहीं जा सकती। दूसरा, धनश्री की मौत पर मुआवजा मिलना चाहिए। इस पर भी पीजीआई ने कहा कि उनकी पॉलिसी नहीं है। तीसरे बाहर ट्रेनिंग जाने वाले डॉक्टरों को रोजाना ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराया जाए या फिर जहां पर ट्रेनिंग हो वहां पर रहने की व्यवस्था की जाए। इस पर डायरेक्टर ने कहा कि इस पर विचार कर रहे हैं। एआरडी ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है।
क्या कहा पीजीआई ने
पीजीआई ने कहा कि वह डॉ. धनश्री शर्मा की मौत से दुखी हैं। स्पॉट पर फैकल्टी मेंबर, सीनियर रेजिडेंट और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर मौके पर पहुंचे और शव को पीजीआई लेकर आए। सभी इंतजाम कर शव पेरेंट्स को सौंप दिया गया। पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट की ओर से श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया गया। पीजीआई डायरेक्टर ने भी श्रद्धांजलि सभा रखी।
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पीजीआई की एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर (एआरडी) ने बताया कि जब उनकी मौत की खबर पीजीआई पहुंची तो उनके साथी तुरंत स्पॉट पर पहुंचे और धनश्री के शव को पीजीआई ले आए। मोर्चरी में ही उनका शव रखा रहा। धनश्री के परिजनों को उनकी मौत की सूचना दी गई। पीजीआई के डायरेक्टर वाईके चावला दो बार धनश्री को देखने आए। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया। लेकिन जब धनश्री के शव को अजमेर भेजना पड़ा तो पीजीआई उन्हें एंबुलेंस तक मुहैया नहीं करा पाया।
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एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने कहा कि रेजिडेंट 16 से 18 घंटे काम करते हैं। काम में कोई कोताही नहीं है। इसके बावजूद इतनी अनदेखी सहन नहीं होती। बाद में सभी रेजिडेंट ने प्राइवेट गाड़ी की व्यवस्था की और धनश्री के शव को अजमेर भिजवाया। एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि पीजीआई की डॉक्टर धनश्री के लिए कफन तक उपलब्ध नहीं कराया गया। उसकी भी व्यवस्था करनी पड़ी। नाराज डॉक्टरों ने आंदोलन की धमकी दी तो पीजीआई प्रशासन नरम पड़ा और रेजिडेंट डॉक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया।
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एआरडी ने उठाए सवाल
एआरडी का कहना है कि आखिर दो दिन बाद पीजीआई प्रशासन क्यों जागा? दो दिन बाद क्यों जारी करना पड़ा प्रेस नोट। जबकि धनश्री की मौत तो मंगलवार को ही हो गई थी। वीरवार शाम को डायरेक्टर और रेजिडेंट डॉक्टरों की मीटिंग हुई। रेजिडेंट्स ने सवाल उठाया कि आखिर धनश्री के शव को भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इस पर पीजीआई ने कहा कि उनकी पालिसी है कि चंडीगढ़ के बाहर एंबुलेंस नहीं जा सकती। दूसरा, धनश्री की मौत पर मुआवजा मिलना चाहिए। इस पर भी पीजीआई ने कहा कि उनकी पॉलिसी नहीं है। तीसरे बाहर ट्रेनिंग जाने वाले डॉक्टरों को रोजाना ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराया जाए या फिर जहां पर ट्रेनिंग हो वहां पर रहने की व्यवस्था की जाए। इस पर डायरेक्टर ने कहा कि इस पर विचार कर रहे हैं। एआरडी ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है।
क्या कहा पीजीआई ने
पीजीआई ने कहा कि वह डॉ. धनश्री शर्मा की मौत से दुखी हैं। स्पॉट पर फैकल्टी मेंबर, सीनियर रेजिडेंट और चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर मौके पर पहुंचे और शव को पीजीआई लेकर आए। सभी इंतजाम कर शव पेरेंट्स को सौंप दिया गया। पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट की ओर से श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया गया। पीजीआई डायरेक्टर ने भी श्रद्धांजलि सभा रखी।