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मनरेगा घोटाला : 4 आईएएस अफसरों के खिलाफ दर्ज होगी FIR, जानिए पूरा मामला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 30 May 2017 05:57 PM IST
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मनरेगा घोटाला
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हरियाणा के बहुचर्चित मनरेगा घोटाले में अब चार कार्यरत आईएएस अफसरों पर गाज गिरी है। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। 25.13 करोड़ रुपये के घोटाले में लोकायुक्त सेवानिवृत्त जस्टिस एनके अग्रवाल ने चारों आईएएस के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
साथ ही सरकार को इनके विरुद्घ उचित कार्रवाई करने के लिए भी लिखा है। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर की शिकायत पर लोकायुक्त ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। इसके साथ ही उन्हें शिकायतकर्ता की शिकायत का भी निपटारा कर दिया।
जस्टिस एनके अग्रवाल ने तीन महीने के भीतर सरकार से फैसले में की गई सिफारिशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। इस घोटाले में वन विभाग के वन मंडल अधिकारी अंबाला जगमोहन शर्मा सहित कुल नौ अधिकारियों पर पहले ही आपराधिक मामला दर्ज हो चुका है। वन विभाग के चार अधिकारी निलंबन झेल रहे हैं।
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साथ ही सरकार को इनके विरुद्घ उचित कार्रवाई करने के लिए भी लिखा है। आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर की शिकायत पर लोकायुक्त ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। इसके साथ ही उन्हें शिकायतकर्ता की शिकायत का भी निपटारा कर दिया।
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जस्टिस एनके अग्रवाल ने तीन महीने के भीतर सरकार से फैसले में की गई सिफारिशों पर कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। इस घोटाले में वन विभाग के वन मंडल अधिकारी अंबाला जगमोहन शर्मा सहित कुल नौ अधिकारियों पर पहले ही आपराधिक मामला दर्ज हो चुका है। वन विभाग के चार अधिकारी निलंबन झेल रहे हैं।
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सेवानिवृत्त आईएएस आरपी भारद्वाज जांच में शामिल नहीं
मनरेगा घोटाला
मामले में अब जिन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की सिफारिश की गई है, उनमें फरीदाबाद के वर्तमान डीसी समीरपाल सरो और तत्कालीन डीसी अंबाला, डीसी कुरुक्षेत्र सुमेधा कटारिया और तत्कालीन एडीसी अंबाला, अंबाला के तत्कालीन डीसी मोहम्मद शाईन व वर्तमान में को-ऑपरेटिव शुगर मिल्स के एमडी, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु फूलिया व तत्कालीन एडीसी अंबाला शामिल हैं।
वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस आरपी भारद्वाज को जांच में शामिल नहीं किया गया है। लेकिन आपराधिक केस विजिलेंस ब्यूरो की जांच के आधार पर दर्ज होना है, इसलिए वे भी लपेटे में आएंगे। चूंकि घोटाले के समय वह भी डीसी अंबाला के पद पर कार्यरत रहे हैं।
सरकार के पास फिलहाल विकल्प नहीं
सरकार को लोकायुक्त की सिफारिश पर चारों आईएएस के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराना ही होगा। चूंकि लोकायुक्त की नियुक्ति भाजपा सरकार ने ही की है। अगर नहीं कराते हैं तो सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े होंगे। मामला दर्ज न करने पर शिकायतकर्ता के पास हाईकोर्ट जाने का विकल्प खुला है। जहां से लोकायुक्त के फैसले पर मुहर लगना निश्चित है।
वहीं, सेवानिवृत्त आईएएस आरपी भारद्वाज को जांच में शामिल नहीं किया गया है। लेकिन आपराधिक केस विजिलेंस ब्यूरो की जांच के आधार पर दर्ज होना है, इसलिए वे भी लपेटे में आएंगे। चूंकि घोटाले के समय वह भी डीसी अंबाला के पद पर कार्यरत रहे हैं।
सरकार के पास फिलहाल विकल्प नहीं
सरकार को लोकायुक्त की सिफारिश पर चारों आईएएस के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराना ही होगा। चूंकि लोकायुक्त की नियुक्ति भाजपा सरकार ने ही की है। अगर नहीं कराते हैं तो सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े होंगे। मामला दर्ज न करने पर शिकायतकर्ता के पास हाईकोर्ट जाने का विकल्प खुला है। जहां से लोकायुक्त के फैसले पर मुहर लगना निश्चित है।
क्या है मामला
मनरेगा घोटाला
पानीपत के आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि वर्ष 2007-2010 के बीच अंबाला में करोड़ो रुपये की मनरेगा परियोजना में घोटाले को उजागर किया गया। उनके द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, अंबाला के तत्कालीन एडीसी संजीव वर्मा और वजीर सिंह गोयत ने जांच में घोटाला तथा गबन की रिपोर्ट मिलने के बावजूद अंबाला के तत्कालीन डीसी व अन्य अधिकारियों ने वन विभाग के अधिकारियों को 25.12 करोड़ के चेक वितरित कर दिए। लेकिन यह मामला काफी समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
फिर आरटीआई एक्टिविस्ट ने हरियाणा लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाकर कार्रवाई किए जाने की मांग की। लोकायुक्त ने मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी। विजिलेंस जांच में पाया गया कि अंबाला के तत्कालीन डीसी ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति व बिना किसी तकनीकी अनुमति के वन विभाग के अधिकारियों को चैक देकर भुगतान करवा दिया। घोटाले की विजिलेंस जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी विजिलेंस शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर 2012 को सौंप दी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कपूर के अनुसार, उन्होंने घोटाले के बारे में 12 जनवरी, 2015 को सीएम विंडो पर शिकायत दी तो मौजूदा प्रदेश सरकार ने वन विभाग के मुख्य आरोपी अधिकारी जगमोहन शर्मा, डीएफओ टी अंबाला मंडल, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मणदास, दीपक एलहाबादी, चंद्रमोहन व सुरेंद्र नागर के खिलाफ 27 जनवरी, 2015 को एफआईआर दर्ज करने आदेश दिए, लेकिन आरोपी चार आईएएस व एक एचसीएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते कपूर ने 30 जनवरी, 2015 को लोकायुक्त कोर्ट में यह मामला दाखिल किया।
फिर आरटीआई एक्टिविस्ट ने हरियाणा लोकायुक्त का दरवाजा खटखटाकर कार्रवाई किए जाने की मांग की। लोकायुक्त ने मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी। विजिलेंस जांच में पाया गया कि अंबाला के तत्कालीन डीसी ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति व बिना किसी तकनीकी अनुमति के वन विभाग के अधिकारियों को चैक देकर भुगतान करवा दिया। घोटाले की विजिलेंस जांच रिपोर्ट तत्कालीन डीजीपी विजिलेंस शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर 2012 को सौंप दी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कपूर के अनुसार, उन्होंने घोटाले के बारे में 12 जनवरी, 2015 को सीएम विंडो पर शिकायत दी तो मौजूदा प्रदेश सरकार ने वन विभाग के मुख्य आरोपी अधिकारी जगमोहन शर्मा, डीएफओ टी अंबाला मंडल, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मणदास, दीपक एलहाबादी, चंद्रमोहन व सुरेंद्र नागर के खिलाफ 27 जनवरी, 2015 को एफआईआर दर्ज करने आदेश दिए, लेकिन आरोपी चार आईएएस व एक एचसीएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते कपूर ने 30 जनवरी, 2015 को लोकायुक्त कोर्ट में यह मामला दाखिल किया।