{"_id":"5842a6c74f1c1b0e1ede8d9e","slug":"amazing-success-story-of-ies-topper-amit-saini-son-of-labourer-working-in-toffee-factory","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिता मजदूर और बेटा बना IES टॉपर, सफलता की अनोखी कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिता मजदूर और बेटा बना IES टॉपर, सफलता की अनोखी कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी(हरियाणा)
Updated Sun, 04 Dec 2016 09:07 AM IST
विज्ञापन
आईईएस टॉपर अमित सैनी की सक्सेस स्टोरी
हौंसले बुलंद हो तो कोई मुश्किल आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। ऐसी की एक मिसाल पेश की मजदूर पिता के बेटे ने आईईएस में टॉप करके। विषम परिस्थितियों को पार करके आगे बढ़ा और सफलला हासिल की भिवानी रोड स्थित अजमेर बस्ती निवासी अमित सैनी ने। अमित ने इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस में 87वीं रैंक हासिल की है।
अमित के पिता शहर की एक टॉफी बनाने की फैक्टरी में मजदूर हैं। अमित की इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी की लहर है। अमित की प्रारंभिक पढ़ाई जींद के ही नवदुर्गा स्कूल में हुई। अमित के अनुसार, शुरू से ही उसका इंजीनियर बनने का सपना था। इसके लिए स्कूल के संचालक और परिवार के लोगों पूरा सहयोग उसे मिला।
फरीदाबाद के एक संस्थान से बीटेक मेकैनिकल करने के बाद अमित ने लगातार सफलता के पायदान पार किए। नेट परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की। इसके बाद रेलवे में कनिष्ठ अभियंता के तौर पर उनका चुनाव हुआ। लेकिन, अमित यहीं नहीं रुके। अमित ने लगातार प्रयास जारी रखे और इंडियन इंजीनियरिंग सेवा की परीक्षा दी। 30 नवंबर को घोषित परिणाम में अमित को देश भर में 87वीं रैंक हासिल हुई है।
विज्ञापन
पिता की मेहनत आई काम
अमित के अनुसार, उसके घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पिता उमेद सिंह टॉफी बनाने वाली एक फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। लेकिन उनके पिता ने कभी अपनी मेहनत की परवाह नहीं की और बच्चों की पढ़ाई के लिए हर वक्त तैयार रहे। अमित के अनुसार, उन्होंने आज जो मुकाम हासिल किया है, इसके पीछे उनके पिता की अथक मेहनत छिपी है।
बच्चों की शिक्षा ही सबसे बड़ी कमाई
अमित के पिता उमेद सिंह कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई ही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने अपनी एक बेटी को अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाई, जिसके बाद फिलहाल वह एसबीआई में सेवारत है। अमित के एक भाई और एक बहन अभी पढ़ रहे हैं।
दिल्ली में कोचिंग देकर की तैयारी
अमित ने बताया कि उनकी पढ़ाई से परिवार में आर्थिक संकट हो गया था। ऐसे में उसने दिल्ली के एक संस्थान में कोचिंग देने का काम किया और साथ ही आईईएस की तैयारी भी की। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला, वहीं उसकी परीक्षा में सफलता भी तय हो गई।
विज्ञापन
अमित के पिता शहर की एक टॉफी बनाने की फैक्टरी में मजदूर हैं। अमित की इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी की लहर है। अमित की प्रारंभिक पढ़ाई जींद के ही नवदुर्गा स्कूल में हुई। अमित के अनुसार, शुरू से ही उसका इंजीनियर बनने का सपना था। इसके लिए स्कूल के संचालक और परिवार के लोगों पूरा सहयोग उसे मिला।
विज्ञापन
फरीदाबाद के एक संस्थान से बीटेक मेकैनिकल करने के बाद अमित ने लगातार सफलता के पायदान पार किए। नेट परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की। इसके बाद रेलवे में कनिष्ठ अभियंता के तौर पर उनका चुनाव हुआ। लेकिन, अमित यहीं नहीं रुके। अमित ने लगातार प्रयास जारी रखे और इंडियन इंजीनियरिंग सेवा की परीक्षा दी। 30 नवंबर को घोषित परिणाम में अमित को देश भर में 87वीं रैंक हासिल हुई है।
विज्ञापन
पिता की मेहनत आई काम
अमित के अनुसार, उसके घर की माली हालत बहुत अच्छी नहीं थी। पिता उमेद सिंह टॉफी बनाने वाली एक फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। लेकिन उनके पिता ने कभी अपनी मेहनत की परवाह नहीं की और बच्चों की पढ़ाई के लिए हर वक्त तैयार रहे। अमित के अनुसार, उन्होंने आज जो मुकाम हासिल किया है, इसके पीछे उनके पिता की अथक मेहनत छिपी है।
बच्चों की शिक्षा ही सबसे बड़ी कमाई
अमित के पिता उमेद सिंह कहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई ही उनके लिए सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने अपनी एक बेटी को अच्छी शिक्षा ग्रहण करवाई, जिसके बाद फिलहाल वह एसबीआई में सेवारत है। अमित के एक भाई और एक बहन अभी पढ़ रहे हैं।
दिल्ली में कोचिंग देकर की तैयारी
अमित ने बताया कि उनकी पढ़ाई से परिवार में आर्थिक संकट हो गया था। ऐसे में उसने दिल्ली के एक संस्थान में कोचिंग देने का काम किया और साथ ही आईईएस की तैयारी भी की। इससे परिवार को आर्थिक सहारा मिला, वहीं उसकी परीक्षा में सफलता भी तय हो गई।