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10 प्रकार की बांसुरियों में पिरोकर सुनाईं लोक धुनें, खूब बजीं तालियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 23 Sep 2016 10:05 PM IST
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पंजाब कला भवन में बांसुरी वादन
- फोटो : अमर उजाला
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25 प्रकार की बांसुरियां बना चुके हैं और 10 प्रकार की बांसुरियों में पिरोकर लोक धुनें सुनाई तो श्रोताओं ने खूब वाहवाही की। पंजाब कला भवन में शुक्रवार को इंडियन कांउसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस,डिर्पाटमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स और पंजाब कला परिषद के सहयोग से म्यूजिकल इवनिंग का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली के प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित अजय प्रसन्ना और स्लोवाकिया के माइकल स्मेंटका ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में अजय ने राग सरस्वती पर आधारित धुनों को पेश किया वहीं माइकल ने विभिन्न प्रकार की बांसुरी में लोक धुनों को पेश करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें माइकल ने 10 प्रकार की बांसुरियों में लोक धुनों को पिरो कर सुनाया। ये सभी बांसुरियां माइकल की खुद की बनाई हुई है। इस बारे में उनका कहना है मेरा मकसद स्लोवाकिया के कल्चर को दुनिया के सामने लाना है। जिसके लिए मैं न केवल कार्यक्रम करता हूं बल्कि साज का निर्माण भी करता हूं।
कई प्रकार की बांसुरी का कर चुके हैं अविष्कार
माइकल ने अपने अब तक के सफर में 25 के करीब विभिन्न प्रकार की बांसुरियों का निर्माण किया है। जिसमें 2 इंच की बांसुरी से लेकर 5 फुट की बांसुरी जिसे फुजैरा कहा जाता है शामिल है। इसके अलावा एक वाद्ययंत्र का निर्माण सींग से किया गया है जिसमें आठ होल किए गए हैं। इन सब की खास बात यह है कि सभी बांसुरियों में स्लोवाकिया की सांस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
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कार्यक्रम में अजय ने राग सरस्वती पर आधारित धुनों को पेश किया वहीं माइकल ने विभिन्न प्रकार की बांसुरी में लोक धुनों को पेश करके सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें माइकल ने 10 प्रकार की बांसुरियों में लोक धुनों को पिरो कर सुनाया। ये सभी बांसुरियां माइकल की खुद की बनाई हुई है। इस बारे में उनका कहना है मेरा मकसद स्लोवाकिया के कल्चर को दुनिया के सामने लाना है। जिसके लिए मैं न केवल कार्यक्रम करता हूं बल्कि साज का निर्माण भी करता हूं।
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कई प्रकार की बांसुरी का कर चुके हैं अविष्कार
माइकल ने अपने अब तक के सफर में 25 के करीब विभिन्न प्रकार की बांसुरियों का निर्माण किया है। जिसमें 2 इंच की बांसुरी से लेकर 5 फुट की बांसुरी जिसे फुजैरा कहा जाता है शामिल है। इसके अलावा एक वाद्ययंत्र का निर्माण सींग से किया गया है जिसमें आठ होल किए गए हैं। इन सब की खास बात यह है कि सभी बांसुरियों में स्लोवाकिया की सांस्कृति की झलक देखने को मिलती है।
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