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सीएम अमरिंदर सिंह ने कहा- पुलिस के इनपुट के बाद बादल की सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे पुख्ता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)
Updated Wed, 17 Oct 2018 01:10 AM IST
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
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खालिस्तानी समर्थकों के निशाने पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के आते ही राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी है। सरकार की तरफ से उन्हें पूर्ण सिक्योरिटी कवर मुहैया करवाया जा रहा है। यह बात राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को कहीं।
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वह इस दौरान सेक्टर-68 में बनाए गए विजिलेंस भवन का शुभारंभ करने पहुंचे थे। इस पर करीब 31.29 करोड़ की लागत आई है। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम और डिप्टी सीएम की जान पर बढ़े खतरे संबंधी हाल में आई रिपोर्ट के बारे में उन्हें जानकारी है। जिक्रयोग है कि सोमवार को यूपी पुलिस ने तीन गैंगस्टर्स को काबू किया था, जिन्होंने पूछताछ में खुलासा किया था कि पंजाब के पूर्व सीएम व डिप्टी सीएम उनके निशाने पर थे। इसलिए उन्होंने पुलिस की राइफल लूटी थी।
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किसानों से हमदर्दी, कार्रवाई कानून के दायरे में
मीडिया से पूछे गए सवाल के जवाब में कैप्टन ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की हिदायतों को तोड़कर पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसानों के प्रति पूरी हमदर्दी है, लेकिन उनकी सरकार कानून के घेरे से बाहर नहीं आ सकती है।
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वित्तीय संकट के चलते चालीस हजार लोगों का भविष्य अधर में
इसके अलावा अपनी मांग को लेकर धरने दे रहे अध्यापकों संबंधी शिरोमणि अकाली दल व आम आदमी पार्टी की तरफ से राज्यपाल को मांग पत्र सौंपे जाने के बारे में भी कैप्टन ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले के हल के लिए पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि करीब चालीस हजार मुलाजिमों को रेगुलर किया जाना है, लेकिन सरकार के सामने वित्तीय संकट है। इसके चलते इस काम में समय लग रहा है।
टीचरों के पास दोनों रास्ते खुले
संघर्ष पर चल रहे एसएसए व रमसा अध्यापकों के बारे में उन्होंने कहा कि टीचरों के पास दोनों विकल्प है। वह पंद्रह हजार तीन सौ पर रेगुलर सेवाएं ज्वाइन करें। तीन साल का समय पूरा करे या फिर अपने मौजूदा स्केल पर काम करे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस पे स्केल की बात की है। वह केंद्र सरकार के 13900 से अधिक है। अब इस संबंधी अध्यापकों को फैसला लेना है।