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Hindi News ›   Chandigarh ›   Amar Ujala interview of Chandigarh MP Manish Tiwari

MP Manish Tiwari: टूटी सड़कों से लेकर बढ़ते नशे तक, चंडीगढ़ की हर समस्या पर अमर उजाला के सवाल, सांसद के जवाब

Mon, 14 Jul 2025 10:38 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 14 Jul 2025 10:38 AM IST
सार

बतौर सांसद एक साल पूरे होने के मौके पर सांसद मनीष तिवारी चंडीगढ़ में अमर उजाला के कार्यालय में पहुंचे। तिवारी ने दावा किया कि अगर कलम की ताकत उनके हाथ में होती तो अब तक चंडीगढ़ की तस्वीर बदल चुकी होती। चुनावी वादों, विकास की दिशा और प्रशासनिक ढांचे की चुनौतियों पर उन्होंने बेबाकी से जवाब दिए।

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Amar Ujala interview of Chandigarh MP Manish Tiwari
सांसद मनीष तिवारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में हर साल केंद्र से करीब 20 हजार करोड़ रुपये आ रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदल रही है। शहर की जमीनी समस्याओं पर मंथन और उनके समाधान को लेकर सांसद मनीष तिवारी ने अमर उजाला कार्यालय में खुलकर अपनी बात रखी। इस बातचीत में उन्होंने अपने अब तक के अनुभव, चुनावी वादों की स्थिति, चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे की खामियां, और आने वाले समय की प्राथमिकताओं पर बात की।
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सवालः बतौर चंडीगढ़ के सांसद पिछले एक साल का अनुभव कैसा रहा
जवाबः
चंडीगढ़ का अनुभव काफी अलग रहा है। यहां जो सांसद है, वही विधायक भी है क्योंकि सांसद और पार्षदों के बीच में कुछ भी नहीं है। बहुत सारे छोटे-छोटे मसले जो आमतौर पर किसी सांसद के संज्ञान में नहीं आते, यहां पर उनको भी देखने का मौका मिलता है। यह बहुत अद्भुत अनुभव है।

सवालः कार्यकाल का 20 प्रतिशत समय खत्म, चुनाव के वादे कितने पूरे हुए 
जवाबः
कलम की ताकत मेरे हाथ में नहीं है। कलम की ताकत भाजपा के पास है। यही ताकत हमारे पास होती तो एक साल में शहर की नुहार बदली होती। हम घोषणापत्र से भाग नहीं नहीं रहे हैं। जिन लोगों के हाथों में सत्ता है, वह शहर की भलाई नहीं चाहते। शेयर वाइज प्रापर्टी, हाउसिंग बोर्ड की नीड बेस्ड चेंज, लाल डोरा से बाहर बने मकानों को नियमित करने, पुनर्वास योजना के तहत मिले मकानों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने, कोऑपरेटिव सोसाइटियों में रहने वाले लोगों की समस्याओं के लिए गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक से मिला। ये काम जब तक नहीं होंगे, मैं लगा रहूंगा।

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सवालः चंडीगढ़ में केंद्र के अधिकारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंजाब-हरियाणा का आरोप है कि उनका हक छीना जा रहा है
जवाबः
केंद्र के अधिकारियों की बढ़ती संख्या पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के विरुद्ध है। यह पंजाब और हरियाणा सरकार की कमी है कि वह अपने अधिकारों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। छुपे हुए तरीके से केंद्र सरकार चंडीगढ़ में अपने अफसर तैनात कर रही है। अगर यही करना है तो स्पष्ट तौर पर कहना चाहिए लेकिन आधार में लटका कर रखना ठीक नहीं है।

सवालः मेट्रो को लटके डेढ़ दशक हो चुका है। ये प्रोजेक्ट लागू भी होगा या नहीं
जवाबः
मैं 2019 में नितिन गडकरी से मिला था। कहा था कि अंबाला से चंडीगढ़ तक इस ओवर ग्राउंड रखा जाए, चंडीगढ़ में अंडरग्राउंड करना चाहिए। इसे कुराली तक ले जाना चाहिए। चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा से उम्मीद कर रहा है, जिनकी हालत खुद खराब है। मैंने सरकार के सबसे शीर्ष नेता को कहा है कि इसे सेंट्रल प्रोजेक्ट मानकर फंड करें। यह न सोचे कि यह कनेक्टिविटी के लिए है, बल्कि यह सोचे कि यह पूरे रीजन के लिए एक इकोनॉमी मल्टीप्लायर है।
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सवालः चंडीगढ़ को किस दिशा में लेकर जाना चाहते हैं
जवाबः
चंडीगढ़ को पूरे नॉर्थ के फाइनेंशियल सर्विसेज का हब बनाना होगा। चंडीगढ़ में ही यह संभव है, क्योंकि सभी सुविधाएं मौजूद है और यह कई राज्यों को कनेक्ट करता है। इस पर सरकार से बात हुई है। सरकार का कहना है कि गुजरात में जो गिफ्ट सिटी बन रही है, वह एक बार स्टेबल हो जाए, उसके बाद इस पर विचार किया जा सकता है।

सवालः सड़कों में गड्ढे, गंदगी फैली है। शहर बुरे दौर से गुजर रहा। क्या वह जन आंदोलन करेंगे।
जवाबः
ये बात सही है कि सड़कों का बहुत बुरा हाल है। शहर को बेहतर बनाने के लिए प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव है। हालांकि सांसद का मुख्य काम संसद में देश के लिए कानून बनाना और केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करना होता है। बाकी कामों के लिए विधानसभा और नगर निगम है। मैं चंडीगढ़ की समस्याओं से वाकिफ हूं और उनके लिए आवाज उठाता भी रहा हूं लेकिन यह काम पार्षदों के हैं और उनके काम में दखल नहीं देना चाहिए।

सवालः नगर निगम का वित्तीय संकट कैसे दूर होगा
जवाबः
नगर निगम को पैसा कम मिल रहा है। चंडीगढ़ को करीब 5500 करोड़ का बजट मिलता था, उसमें 1700 करोड़ रुपये तक का बजट आना चाहिए। निगम को कितना पैसा मिलना चाहिए इसको लेकर कोई फॉर्मूला नहीं है। नगर निगम को बहुत संयोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। मोहाली का बजट 195 करोड़, पंचकूला का भी बजट चंडीगढ़ से ज्यादा नहीं है। दोनों ही जगह सड़क की स्थिति यहां से कोई खराब नहीं है। ऐसे में यह भी देखना होगा कि हम काम कैसे कर रहे है।

सवालः भाजपा कहती है कि आप सिर्फ संसद में सवाल पूछते हैं।
जवाबः
इसलिए सवाल उठाता हूं ताकि अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके। पिछले एक साल में 29 सवाल पूछकर संसद में चंडीगढ़ के लोगों की आवाज बुलंद की है। अधिकारी हरकत में आए हैं। मनीमाजरा 24 घंटे पानी का पायलट प्रोजेक्ट फेल हो गया। गृहमंत्री ने उद्घाटन किया था, उनके लिए भी चंडीगढ़ के अधिकारियों ने अटपटी स्थिति पैदा कर दी है कि जिसका उद्घाटन वह करके गए, वह फेल हो गया। इसलिए मैं कहता हूं कि चंडीगढ़ के राजनीतिक भविष्य का फैसला होना चाहिए, अगर वह फैसला जटिल है तो प्रशासनिक ढांचे पर नए सिरे से पुनर्विचार की जरूरत है।

सवालः नशा-अपराध बढ़ रहा, पुलिस रोक क्यों नहीं पा रही 
जवाबः
शहर में पुलिस अफसर बाहर से आते हैं। कुछ समय बाद चले जाते हैं। इच्छाशक्ति का अभाव नजर आता है। ड्रग्स का कारोबार बहुत ज्यादा हो रहा है। पहले पंजाब में था। अब चंडीगढ़ गढ़ बन गया है। मैंने एसएसपी से बात की है। एक प्लानिंग से काम करना होगा। बड़े मगरमच्छों को पकड़ना जरूरी है। मैं इन मामले निजी तौर पर देख रहा हूं।

सवालः क्या निगम चुनाव में आप-कांग्रेस का गठबंधन रहेगा
जवाबः
यह गठबंधन चलना चाहिए। आम आदमी पार्टी चंडीगढ़ की लोकल यूनिट का भी मानना है कि गठबंधन बना रहे। अगले नगर निगम चुनाव में अभी डेढ़ साल है, ऐसे में कोई जवाब देना जल्दबाजी होगी लेकिन मेरी तरफ से कोशिश होगी कि यह समन्वय बना रहे।
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लोगों के सवाल और सांसद के जवाब

सवालः कांग्रेस ने 8500 रुपये देने का वादा किया था, क्या हुआ
जवाबः
यह वादा इस पर निर्भर था कि कांग्रेस की सरकार आएगी तो देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस वजह से यह लागू नहीं हुआ।

सवालः सीएचबी कर्मचारियों को पेंशन दिलाने का वादा किया था, कब मिलेगी
जवाबः
मैंने प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की है। इस पर काम चल रहा है। आने वाली बोर्ड की मीटिंग में इस संबंध में एक एजेंडा भी आने वाला है।

सवालः स्मॉल फ्लैट के किराए पर ब्याज जायज नहीं है। ये बंद होना चाहिए।
जवाबः
इस पर मैंने 12 नवंबर 2024 को मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। ब्याज 12.50 फीसदी नहीं, सालाना 144 फीसदी है, जो नियमों का भी उल्लंघन है। मैं दोबारा मुख्य सचिव को पत्र लिखूंगा। इसे ठीक करवा कर रहेंगे।

सवालः यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के कर्मचारियों को घर कब मिलेगा
जवाबः
हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया था लेकिन फिर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट चला गया। मैंने प्रशासन के अधिकारियों को कहा था कि हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर कर्मचारियों को राहत दी जानी चाहिए। अधिकारी अगर केंद्र सरकार से अतिरिक्त फंड की मांग करेंगे तो उन्हें केंद्र मना नहीं करेगा। फिर भी इसको दोबारा टेकअप करेंगे।

सवालः सोसाइटियों के लोगों से कई तरह के टैक्स, जीएसटी वसूला जा रहा
जवाबः
हाउसिंग सोसाइटी के लोगों ने मुझे बताया है। इस संबंध में प्रशासन के अधिकारियां को कहा है। प्रशासक से भी बात की है। ऐसा नहीं होना चाहिए। सभी काम एस्टेट ऑफिस को ही करना चाहिए।
 
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