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अमर उजाला इंपेक्ट: डेढ़ महीने बाद PGI में एचएसवी टेस्ट फिर शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 24 Feb 2017 09:17 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : File Photo
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पिछले डेढ़ महीने से पीजीआई में बंद चल रहे एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) टेस्ट बुधवार से शुरू हो गए हैं। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के दो दिन बाद ही वायरोलाजी डिपार्टमेंट में किट रातों-रात पहुंच गई और टेस्ट शुरू कर दिए गए हैं।
सूत्रों ने बताया है कि डिपार्टमेंट में अभी दो किट पहुंची हैं। एक किट से करीब 90 सैंपल किए जा सकते हैं। विभाग के पास 150 से ज्यादा सैंपल पेंडिंग पड़े थे। इनमें करीब आधे सैंपल लगा दिए गए हैं।
मंगलवार को अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर बताया था कि गर्भावस्था के दौरान शिशु के संक्रमण को जांचने वाला टेस्ट ठप पड़ा है। मरीजों को प्राइवेट में जाकर टेस्ट करवाना पड़ रहा है।
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सूत्रों ने बताया है कि डिपार्टमेंट में अभी दो किट पहुंची हैं। एक किट से करीब 90 सैंपल किए जा सकते हैं। विभाग के पास 150 से ज्यादा सैंपल पेंडिंग पड़े थे। इनमें करीब आधे सैंपल लगा दिए गए हैं।
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मंगलवार को अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर बताया था कि गर्भावस्था के दौरान शिशु के संक्रमण को जांचने वाला टेस्ट ठप पड़ा है। मरीजों को प्राइवेट में जाकर टेस्ट करवाना पड़ रहा है।
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अब कैसे आ गई किट?
आखिर खबर प्रकाशित होने के बाद अचानक कैसे डिपार्टमेंट में किट पहुंच गई? जो टेस्ट पिछले डेढ़ महीने से बंद थे, अचानक दो दिन में किट कैसे पहुंच गई। इस बारे में जब डिपार्टमेंट से सवाल किया गया तो वहां से बात करने से इनकार कर दिया गया।
इतने दिन टेस्ट बंद रहे, इस पर किसकी जिम्मेदारी तय की जानी है, उस पर भी पीजीआई प्रशासन चुप है। करीब डेढ़ साल पहले रुबेला जांच के लिए एक्सपायर्ड किट का इस्तेमाल करने का आरोप डिपार्टमेंट पर लग चुका है और इस पर जांच के आदेश भी जारी हुए थे। जांच भी शुरू हुई, लेकिन नतीजों का पता अब तक नहीं चल पाया है।
संक्रमण से जान जा भी जा सकती है
एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) जांच गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और नवजात का किया जाता है। इस जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई संक्रमण तो नहीं है। यदि जन्म के समय संक्रमण का पता न चले तो नवजात की मौत भी हो सकती है या फिर उसे किसी शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।
इतने दिन टेस्ट बंद रहे, इस पर किसकी जिम्मेदारी तय की जानी है, उस पर भी पीजीआई प्रशासन चुप है। करीब डेढ़ साल पहले रुबेला जांच के लिए एक्सपायर्ड किट का इस्तेमाल करने का आरोप डिपार्टमेंट पर लग चुका है और इस पर जांच के आदेश भी जारी हुए थे। जांच भी शुरू हुई, लेकिन नतीजों का पता अब तक नहीं चल पाया है।
संक्रमण से जान जा भी जा सकती है
एचएसवी (हरपेस सिप्लेक्स वायरस) जांच गर्भावस्था के दौरान भ्रूण और नवजात का किया जाता है। इस जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को कोई संक्रमण तो नहीं है। यदि जन्म के समय संक्रमण का पता न चले तो नवजात की मौत भी हो सकती है या फिर उसे किसी शारीरिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।