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चंडीगढ़ को मिलना था अलग प्रशासक, पंजाब के विरोध पर आदेश टला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 18 Aug 2016 03:20 PM IST
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Alphons Kannanthanam and chief minister badal
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केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को पहली बार अपना अलग प्रशासक मिलने जा रहा है। दिल्ली में ‘डेमोलिशन मैन’ के तौर पर मशहूर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी एवं बीजेपी नेता केजे अल्फोंस को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा है।
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक सुर में इसका विरोध किया है। बादल ने केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। सूत्रों के अनुसार इसके बाद फिलहाल केंद्र ने नियुक्ति आदेश टाल दिया है।
पंजाब में आतंकवाद के दौर से चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी सूबे के राज्यपाल को सौंपी जा रही थी। केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ का प्रशासक किसी अन्य को बनाने से हलचल मच गई है। राजनीतिक गलियारे में केंद्र के इस कदम से पंजाब का रुतबा घटने के रूप में देख रहे हैं। अब तक पंजाब चंडीगढ़ पर अपना दावा करता आ रहा है, लेकिन इस कदम से पंजाब को जोरदार झटका लगा है।
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मुख्यमंत्री बादल ने जहां केंद्र से फैसले पर दोबारा विचार के लिए कहा है वहीं, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र के फैसले को सिरे से खारिज किया है। कैप्टन ने कहा कि यह कदम अन्यायपूर्ण है और इसका उद्देश्य पंजाब से चंडीगढ़ छीनना है। उधर, विधानसभा चुनाव में जोर शोर से उतरी आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में अकाली दल और भाजपा को घेरे में लेते हुए चंडीगढ़ में राज्यपाल के स्थान पर किसी अन्य को प्रशासक तैनात करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
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पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पंजाब कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक सुर में इसका विरोध किया है। बादल ने केंद्र से फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। सूत्रों के अनुसार इसके बाद फिलहाल केंद्र ने नियुक्ति आदेश टाल दिया है।
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पंजाब में आतंकवाद के दौर से चंडीगढ़ प्रशासन की जिम्मेदारी सूबे के राज्यपाल को सौंपी जा रही थी। केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ का प्रशासक किसी अन्य को बनाने से हलचल मच गई है। राजनीतिक गलियारे में केंद्र के इस कदम से पंजाब का रुतबा घटने के रूप में देख रहे हैं। अब तक पंजाब चंडीगढ़ पर अपना दावा करता आ रहा है, लेकिन इस कदम से पंजाब को जोरदार झटका लगा है।
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मुख्यमंत्री बादल ने जहां केंद्र से फैसले पर दोबारा विचार के लिए कहा है वहीं, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र के फैसले को सिरे से खारिज किया है। कैप्टन ने कहा कि यह कदम अन्यायपूर्ण है और इसका उद्देश्य पंजाब से चंडीगढ़ छीनना है। उधर, विधानसभा चुनाव में जोर शोर से उतरी आम आदमी पार्टी ने भी इस मामले में अकाली दल और भाजपा को घेरे में लेते हुए चंडीगढ़ में राज्यपाल के स्थान पर किसी अन्य को प्रशासक तैनात करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है।
बादल ने कैप्टन के समक्ष रखे सवाल
CM Badal
- फोटो : amar ujala
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादन ने बुधवार को चंडीगढ़ यूटी के लिए अलग प्रशासक की नियुक्ति पर कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान को रद्द करते हुए कहा कि यह बयान घड़ियाली आंसू बहाने जैसा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या कैप्टन यह बताएंगे कि चंडीगढ़ और अन्य पंजाबी बोलते क्षेत्रों को पंजाब से बाहर किसने रखा? क्या वह यह भी बताएंगे कि क्या राजीव-लौंगोवाल समझौते के अनुसार 26 जनवरी 1986 को चंडीगढ़ पंजाब को क्यों नहीं दिया गया? क्या वह बताएंगे कि 25-26 जनवरी, 1986 की आधी रात को अंतिम मौके जब राजीव गांधी की सरकार ने पंजाब से गद्दारी की तो उन्होंने पंजाब सरकार में सीनियर मंत्री होते हुए त्यागपत्र क्यों नहीं दिया?
कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य किसी भी कांग्रेसी नेता को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़, पंजाब को देने के वायदे से भागने के साथ-साथ राज्य के खिलाफ किए गए अन्याय के असल आरोपी यह कांग्रेसी नेता हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्या कैप्टन यह बताएंगे कि चंडीगढ़ और अन्य पंजाबी बोलते क्षेत्रों को पंजाब से बाहर किसने रखा? क्या वह यह भी बताएंगे कि क्या राजीव-लौंगोवाल समझौते के अनुसार 26 जनवरी 1986 को चंडीगढ़ पंजाब को क्यों नहीं दिया गया? क्या वह बताएंगे कि 25-26 जनवरी, 1986 की आधी रात को अंतिम मौके जब राजीव गांधी की सरकार ने पंजाब से गद्दारी की तो उन्होंने पंजाब सरकार में सीनियर मंत्री होते हुए त्यागपत्र क्यों नहीं दिया?
कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य किसी भी कांग्रेसी नेता को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चंडीगढ़, पंजाब को देने के वायदे से भागने के साथ-साथ राज्य के खिलाफ किए गए अन्याय के असल आरोपी यह कांग्रेसी नेता हैं।