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चंडीगढ़ की हवा खराब: पड़ोसी राज्यों में पराली जलने से 272 पर पहुंचा एक्यूआई, चेतावनी-अभी और बिगड़ेंगे हालात
Mon, 06 Nov 2023 11:27 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 06 Nov 2023 11:27 AM IST
सार
पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के केस भी बढ़ते जा रहे हैं। हवा के खराब होने का यही प्रमुख कारण है। बता दें कि पिछले साल भी पड़ोसी राज्यों में पराली जलने का असर चंडीगढ़ में देखने को मिला था और नवंबर माह में एक दिन शहर का एक्यूआई 400 तक पहुंच गया था।कुछ इलाकों में यह 400 से ऊपर भी दर्ज किया गया था।
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चंडीगढ़ की हवा खराब
- फोटो : फाइल
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विस्तार
पड़ोसी राज्यों में जल रही पराली का असर चंडीगढ़ की हवा पर पड़ने लगा है। नवंबर माह के पहले दिन से ही शहर की हवा खराब स्थिति में चल रही है। रविवार को सीजन में पहली बार शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 272 के आंकड़े पर पहुंच गया। इससे माना जा रहा है कि हालात अभी और बिगड़ सकते हैं और आने वाले दिनों में एक्यूआई 300 तक जा सकता है।
रविवार को सेक्टर-53 के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र पर सुबह के समय एक्यूआई 272 के करीब भी दर्ज किया गया, जो सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है। अक्तूबर महीने की शुरुआत से ही शहर का एक्यूआई बढ़ना शुरु हो गया है और नवंबर महीने में तो ये ''खराब'' श्रेणी में चली गया। सितंबर माह में शहर की हवा साफ थी। रविवार को सेक्टर-22 में सुबह के समय शहर का एक्यूआई 248 के करीब दर्ज किया गया।
यह भी पढ़ें: Moga Accident: मोगा में फिर दर्दनाक हादसा, कार-ट्रक की भिड़ंत में पांच युवकों की मौत, नहीं हो सकी पहचान
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बढ़ रहे पराली जलाने के केस
जानकारों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के केस भी बढ़ते जा रहे हैं। हवा के खराब होने का यही प्रमुख कारण है। बता दें कि पिछले साल भी पड़ोसी राज्यों में पराली जलने का असर चंडीगढ़ में देखने को मिला था और नवंबर माह में एक दिन शहर का एक्यूआई 400 तक पहुंच गया था। कुछ इलाकों में यह 400 से ऊपर भी दर्ज किया गया था। तब सेक्टर-22 के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र पर शाम के समय एक्यूआई 410 के करीब दर्ज किया गया था। इसी तरह सेक्टर-53 के निगरानी केंद्र पर एक्यूआई 452 दर्ज किया गया था।
दिवाली पर भी सेक्टर-22 और इमटेक में सबसे अधिक वायु प्रदूषण दर्ज किया गया था। सेक्टर-22 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 320 और इमटेक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 307 तक दर्ज किया गया था। इस बार भी यूटी प्रशासन की तरफ से दिवाली पर ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है।
200 से ज्यादा एक्यूआई होने पर बढ़ जाती है चिंता
शहर में वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है। उनके चलने से जो धूल के जो कण हवा में उड़ते हैं वह भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ा रोल निभाते हैं। एक्यूआई को स्तर और रीडिंग के हिसाब से 6 श्रेणी में बांटा गया है। 0-50 के बीच एक्यूआई का मतलब वायु शुद्ध है। 51-100 के बीच मतलब वायु की शुद्धता संतोषजनक और 101-200 के बीच मध्यम है। 201-300 के बीच एक्यूआई खराब, 301-400 के बीच एक्यूआई बेहद खराब और 401 से 500 के बीच एक्यूआई गंभीर श्रेणी में आता है। दूसरी तरफ 8 प्रदूषण कारकों के आधार पर तय होते हैं। ये पीएम 10, पीएम 2.5, एनओ 2, एसओ 2, सीओ 2, ओ 3, और एनएच 3 पीबी होते हैं। 24 घंटे में इन कारकों की मात्रा से ही हवा की गुणवत्ता तय होती है।
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रविवार को सेक्टर-53 के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र पर सुबह के समय एक्यूआई 272 के करीब भी दर्ज किया गया, जो सांस के मरीजों के लिए खतरनाक है। अक्तूबर महीने की शुरुआत से ही शहर का एक्यूआई बढ़ना शुरु हो गया है और नवंबर महीने में तो ये ''खराब'' श्रेणी में चली गया। सितंबर माह में शहर की हवा साफ थी। रविवार को सेक्टर-22 में सुबह के समय शहर का एक्यूआई 248 के करीब दर्ज किया गया।
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यह भी पढ़ें: Moga Accident: मोगा में फिर दर्दनाक हादसा, कार-ट्रक की भिड़ंत में पांच युवकों की मौत, नहीं हो सकी पहचान
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बढ़ रहे पराली जलाने के केस
जानकारों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के केस भी बढ़ते जा रहे हैं। हवा के खराब होने का यही प्रमुख कारण है। बता दें कि पिछले साल भी पड़ोसी राज्यों में पराली जलने का असर चंडीगढ़ में देखने को मिला था और नवंबर माह में एक दिन शहर का एक्यूआई 400 तक पहुंच गया था। कुछ इलाकों में यह 400 से ऊपर भी दर्ज किया गया था। तब सेक्टर-22 के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र पर शाम के समय एक्यूआई 410 के करीब दर्ज किया गया था। इसी तरह सेक्टर-53 के निगरानी केंद्र पर एक्यूआई 452 दर्ज किया गया था।
दिवाली पर भी सेक्टर-22 और इमटेक में सबसे अधिक वायु प्रदूषण दर्ज किया गया था। सेक्टर-22 में वायु गुणवत्ता सूचकांक 320 और इमटेक में वायु गुणवत्ता सूचकांक 307 तक दर्ज किया गया था। इस बार भी यूटी प्रशासन की तरफ से दिवाली पर ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई है।
200 से ज्यादा एक्यूआई होने पर बढ़ जाती है चिंता
शहर में वाहनों की संख्या काफी ज्यादा है। उनके चलने से जो धूल के जो कण हवा में उड़ते हैं वह भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ा रोल निभाते हैं। एक्यूआई को स्तर और रीडिंग के हिसाब से 6 श्रेणी में बांटा गया है। 0-50 के बीच एक्यूआई का मतलब वायु शुद्ध है। 51-100 के बीच मतलब वायु की शुद्धता संतोषजनक और 101-200 के बीच मध्यम है। 201-300 के बीच एक्यूआई खराब, 301-400 के बीच एक्यूआई बेहद खराब और 401 से 500 के बीच एक्यूआई गंभीर श्रेणी में आता है। दूसरी तरफ 8 प्रदूषण कारकों के आधार पर तय होते हैं। ये पीएम 10, पीएम 2.5, एनओ 2, एसओ 2, सीओ 2, ओ 3, और एनएच 3 पीबी होते हैं। 24 घंटे में इन कारकों की मात्रा से ही हवा की गुणवत्ता तय होती है।