चंडीगढ़: दीपावली पर आतिशबाजी से प्रदूषित हुई हवा, अब तक नहीं सुधरी, सेक्टर 22 में औसत से ज्यादा एक्यूआई
चंडीगढ़ प्रशासन ने इस साल शहर में पटाखों की बिक्री और चलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था लेकिन इस बार दीपावली पर खूब पटाखे चलाए गए। इसका असर ये हुआ कि प्रदूषण के स्तर ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
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चंडीगढ़ में दीपावली पर हुई आतिशबाजी की वजह से हवा अब भी खराब है। सेक्टर-22 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मंगलवार को 160 दर्ज किया गया, जो औसत से काफी ज्यादा है। हालांकि सेक्टर-25 में एक्यूआई संतोषजनक है।
यूटी प्रशासन ने शहर में पटाखों की बिक्री और चलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ था लेकिन बावजूद इसके इस बार दीपावली पर खूब पटाखे चलाए गए। इसका असर ये हुआ कि प्रदूषण के स्तर ने पिछले पांच वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। सेक्टर-25 में दीपावली की रात 10 से 11 बजे के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 465 की गंभीर श्रेणी में पहुंच गया, जबकि सेक्टर-22 में यह 409 दर्ज किया गया। इस इलाके में सुबह 7 से लेकर शाम 4 बजे तक एक्यूआई संतोषजनक रहा। इसके बाद ये मॉडरेट और शाम 7 बजे के बाद बहुत खराब व 9 से 10 बजे के बीच गंभीर स्थिति में पहुंच गया। रात 2 बजे के बाद ये फिर संतोषजनक होने लगा।
ध्वनि प्रदूषण में भी आम दिनों के मुकाबले बढ़ोतरी देखने को मिली। सेक्टर-17 में यह 58.4 डेसीबल था, जबकि सेक्टर-39 में ध्वनि प्रदूषण स्तर अधिकतम 78.2 डेसीबल दर्ज किया गया। अगर पिछले साल की बात की जाए तो ध्वनि प्रदूषण 66.6 डेसीबल दर्ज किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, रात के वक्त वातावरण में 35 डेसीबल और दिन में 45 डेसीबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए।
पंजाब में भी हालात खराब
वहीं दीपावली के पांच दिन बाद पंजाब में भी प्रदूषण नहीं सुधर पाया है। पांच जिलों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ओरेंज श्रेणी में दर्ज किया गया है। वहीं पटियाला में हालात बेहद खराब हैं। यहां का एक्यूआई 334 तक पहुंच गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अभी एक सप्ताह तक प्रदूषण में कोई सुधार नहीं होने वाला है।
पंजाब में अमृतसर में एक्यूआई 240, बठिंडा में 230, जालंधर में 217, लुधियाना में 282 दर्ज किया गया है। इन जिलों में प्रदूषण का स्तर ओरेंज श्रेणी में है। इस स्तर में लोगों को सांस लेने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। वहीं पटियाला में एक्यूआई 334 दर्ज किया गया है, जो रेड श्रेणी में आता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह स्तर बेहद खराब माना जाता है।