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गर्व की बात: पंजाब पुलिस के AIG ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी Mount Elbrus पर फहराया तिरंगा, बने पहले अधिकारी
Mon, 14 Aug 2023 01:35 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Aug 2023 01:35 AM IST
सार
यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतेह करने के इस सफर में एआईजी गुरजोत सिंह कलेर के साथ मोहाली निवासी पर्वतारोही तुरकंवल दास, रशिया निवासी अलेक्जेंड्रिया व नेपाल वासी चतुर तमांग साथ रहे। कलेर ने बताया कि चोटी का तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री के बीच रहता है।
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माउंट एल्ब्रस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
पंजाब पुलिस के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग में कार्यरत अतिरिक्त महानिरीक्षक (एआईजी) गुरजोत सिंह कलेर ने 76वें स्वतंत्रता दिवस से पहले यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रस (5642 मीटर) फतेह कर रिकॉर्ड बनाया। यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतेह कर वहां तिरंगा और पुलिस का झंडा फहराने वाले कलेर पंजाब पुलिस के पहले अधिकारी हैं।
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यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतेह करने के इस सफर में उनके साथ मोहाली निवासी पर्वतारोही तुरकंवल दास, रशिया निवासी अलेक्जेंड्रिया व नेपाल वासी चतुर तमांग साथ रहे। कलेर ने बताया कि चोटी का तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री के बीच रहता है और वहां ऑक्सीजन की भी बहुत कमी है। इस कारण अपने साथ ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर गए थे। रास्ते में खराब मौसम और तूफान के बावजूद वह वाहेगुरु का नाम लेकर लक्ष्य की ओर बढ़ते गए और आखिर मुकाम हासिल किया।
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कलेर ने चोटी को फतेह करने के बाद ग्लोबल वार्मिंग के प्रति सभी को जागरूक रहने का संदेश देते कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने और वन क्षेत्र घटने से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। इसके लिए वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
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यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतेह करने के इस सफर में उनके साथ मोहाली निवासी पर्वतारोही तुरकंवल दास, रशिया निवासी अलेक्जेंड्रिया व नेपाल वासी चतुर तमांग साथ रहे। कलेर ने बताया कि चोटी का तापमान माइनस 10 से 15 डिग्री के बीच रहता है और वहां ऑक्सीजन की भी बहुत कमी है। इस कारण अपने साथ ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर गए थे। रास्ते में खराब मौसम और तूफान के बावजूद वह वाहेगुरु का नाम लेकर लक्ष्य की ओर बढ़ते गए और आखिर मुकाम हासिल किया।
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कलेर ने चोटी को फतेह करने के बाद ग्लोबल वार्मिंग के प्रति सभी को जागरूक रहने का संदेश देते कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने और वन क्षेत्र घटने से पर्यावरण पर असर पड़ रहा है। इसके लिए वे लोगों को जागरूक कर रहे हैं।