हरियाणाः कृषि विश्वविद्यालय किसानों की फसल लागत से है अनजान, आरटीआई से हुआ खुलासा
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हरियाणा के हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय किसानों की फसलों पर आने वाला लागत मूल्य निकाल ही नहीं रहा है। विश्वविद्यालय ने आरटीआई के तहत दी जानकारी में यह खुद माना है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता राकेश बैंस ने आरटीआई के जरिए किसान की फसलों पर आने वाली लागत की जानकारी मांगी थी। जवाब संख्या एसपीआईओ/सीएएच/18-14768 में विश्वविद्यालय ने बताया है कि अर्थशास्त्र विभाग से प्राप्त सूचना को शून्य समझा जाए।
यानी कृषि विश्वविद्यालय ने फसलों की लागत निकालने का काम छोड़ ही दिया है। बैंस को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा की ओर से दी गई जानकारी में और भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कृषि विभाग के जनसूचना अधिकारी ने बताया है कि पिछले वर्षो के मुकाबले गेहूं की लागत में 24 रुपये प्रति क्विंटल, चना की लागत में 383 रुपये, जौ की लागत में 25 रुपये, सरसों-तोरिया की लागत में 26 रुपये, बाजरा की लागत मे 48 रुपये, मक्की की लागत में 15 रुपये और कपास की लागत में 530 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि हुई है, जबकि धान की लागत में 20 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है।
धान की लागत में कमी आने से भारतीय किसान यूनियन हरियाणा इत्तफाक नहीं रखती। यूनियन के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी का कहना है कि जब खाद, बीज, लेबर व डीजल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है तो धान की लागत कैसे कम हो सकती है।
लागत का तुलनात्मक वक्तव्य न भेजने से किसान नाखुश
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने बैंस को बताया है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग क्षेत्रीय स्तर पर राज्यों की बैठक राज्य में ही करवाता है। बैठक में आयोग किसानों एवं कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से विस्तारपूर्वक चर्चा करता है। इसमें राज्यों के किसान प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक व संबंधित विभाग के अधिकारी भाग लेते हैं।
इसके आधार पर आयोग केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिशें करता है। वर्ष 2016-17, 2017-18 व 2018-19 में कृषि विभाग ने अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य की कोई भी सिफारिश नहीं भेजी। चढ़ूनी व बैंस ने नाराजगी जताते हुए कहा, इससे स्पष्ट होता है कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को प्रदेश सरकार ने कोई तुलनात्मक वक्तव्य भेजा ही नहीं। 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकार धरातल पर कुछ भी नहीं कर रही।
राकेश ने इन तीन बिंदुओं पर मांगी थी आरटीआई
. वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 की हरियाणा में खरीफ व रबी की फसलों की कृषि लागत, कीमतों और एमएसपी के तुलनात्मक वक्तव्य की जानकारी।
. कृषि विश्वविद्यालय हरियाणा द्वारा निकली गई सभी फसलों की लागत की वर्ष 2017-18, 2018-19 की जानकारी।
. वर्ष 2016-17, 2017-18, 2018-19 की हरियाणा में खरीफ व रबी की फसलों की कृषि लागत, कीमतों व एमएसपी के तुलनात्मक वक्तव्य की केंद्र सरकार को लिखे पत्रों की प्रति।