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अफसर बदलते ही धड़ल्ले से शुरू हो गया पॉलिथीन का इस्तेमाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 16 Jun 2016 12:07 AM IST
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पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल
- फोटो : amar ujala
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प्रशासन में अफसर क्या बदले, शहर में दोबारा धड़ल्ले से पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल शुरू हो गया है। सामान देने के लिए मंडियों में बेरोक-टोक पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसको रोकने केलिए छापेमारी और चालान होने भी बंद हैं। पहले जहां अधिकारी रोज सुबह शाम मंडियों और दूसरे बाजारों में पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने के लिए रेड करते थे।
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अब नए अधिकारियों ने अपने दफ्तरों से निकलना ही बंद कर दिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने चंडीगढ़ में पॉलिथीन और प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास, प्लेट्स और चम्मच इत्यादि सामान पर पूर्ण पाबंदी लगा रखी है। अधिकारियों की लापरवाही के कारण एनजीटी के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
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उल्लेखनीय है कि एनजीटी के आदेशों के बाद पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव की अगुवाई में चंडीगढ़ पॉल्युशन कंट्रोल कमेटी (सीपीसीसी) के तत्कालीन मेंबर सेक्रेटरी दानिश अशरफ और एसडीएम कशिश मित्तल ने इन पर रोक लगा दी थी। रोज मंडियाें और बाजारों में रेड होती थी। 500 से 5 हजार रुपये के चालान होते थे। उस समय रेहड़ी-फड़ी वाले तो डरते थे ही ग्राहक भी पॉलिथीन मांगते हुए घबराते थे।
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सभी तरह का सामान पॉलिथीन में दे रहे बुधवार को अमर उजाला ने शहर की मुख्य फल एवं सब्जी मंडी सेक्टर-26 और सेक्टर-15 की अपनी मंडी का दौरा कर पॉलिथीन और प्लास्टिक बैन का हाल जाना। पहले जहां पॉलिथीन को छुपाकर रखा जाता था अब तो खुलेआम सामने ही पॉलिथीन सबकी रेहड़ियों पर रखा है। सभी तरह का सामान पॉलिथीन में ही दिया जा रहा है। मंडी में पहुंचने वाले ग्राहकों के हाथों में भी कपड़े के बैग नहीं दिखे।
जनवरी में बदले थे अधिकारी पूर्व एडवाइजर विजय देव, आईएएस दानिश अशरफ, कशिश मित्तल का जनवरी में चंडीगढ़ से ट्रांसफर हो गया। इन अधिकारियों ने व्यापारियों के जबरदस्त दबाव के बाद भी पॉलिथीन फ्री सिटी की नींव काफी मजबूत रखी थी। लेकिन इनके जाते ही प्रशासन ने इससे ध्यान हटा लिया है।
लेकिन इन अधिकारियों के जाते ही पॉलिथीन शहर में कहीं भी आसानी से देखा जा सकता है।