{"_id":"574b34094f1c1bd24c108b6f","slug":"after-6-hours-surgery-by-pgi-doctors-has-gave-new-life-to-patient","type":"story","status":"publish","title_hn":"6 घंटे सर्जरी के बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने दिया जीवनदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
6 घंटे सर्जरी के बाद पीजीआई के डॉक्टरों ने दिया जीवनदान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 30 May 2016 01:52 AM IST
विज्ञापन
पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : demo pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किडनी, लीवर और हार्ट की नली से चिपके ट्यूमर को पीजीआई ने निकालने में कामयाबी हासिल की है। यह आपरेशन इतना मुश्किल था कि जरा सी चूक में मरीज की जान जा सकती थी। कई प्राइवेट हास्पिटल ने इलाज करने से मना कर दिया था। बाद में मरीज को पीजीआई लेकर आए।
विज्ञापन
पीजीआई के तीन डिपार्टमेंट के डाक्टरों ने मिलकर उसका इलाज किया और ट्यूमर को बाहर निकाल लिया। डाक्टरों का दावा है कि इससे बड़ा ट्यूमर उन्होंने अब तक नहीं देखा है। ट्यूमर का वजन कम से कम तीन किलोग्राम था। आपरेशन के बाद मरीज ठीक है। अब वे चल-फिर भी रहे हैं। हालांकि उन्हें अभी पीजीआई से छुट्टी नहीं मिली है। डाक्टरों को दावा है कि इसी हफ्ते उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी।
विज्ञापन
एक महीने से नहीं उतर रहा था बुखार
मोहाली के सेक्टर 68 के रहने वाले उपेंद्र ने बताया कि उनके पिता मोहिंदर सिंह ढींगरा को एक महीने से बुखार था। प्राइवेट क्लीनिक में दिखाया तो उन्होंने पीजीआई रेफर कर दिया। उपेंद्र के मित्र अमित दीवान उन्हें पीजीआई ले गए। यूरोलाजी डिपार्टमेंट के डाक्टर संतोष कुमार ने सीटी स्कैन देखते हुए कहा कि काफी बड़ा ट्यूमर है। इसमें आपरेशन के सक्सेस रेट काफी कम है, क्योंकि तीन-तीन आर्गन इन्वाल्व थे। उन्होंने मरीज को कीमोथेरेपी देकर उसके ट्यूमर को कम करने की कोशिश की, लेकिन उससे कोई भी असर नहीं पड़ा। उसके बाद आपरेशन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उपेंद्र ने सोचा कि प्राइवेट हास्पिटल की भी राय ली जाए। वे दिल्ली से लेकर गुड़गांव व मोहाली के कई हास्पिटल गए, लेकिन सभी ने इलाज करने से मना कर दिया। उसके बाद वे अपने पिता को पीजीआई लेकर आ गए।
विज्ञापन
किडनी व लीवर का हिस्सा निकाला, आर्टिफिशियल ग्राफ्ट डाली
मोहिंदर सिंह ढींगरा के लीवर, किडनी और हृदय को ब्लड सप्लाई करने वाले मुख्य नस से ट्यूमर चिपका हुआ था। डाक्टरों के मुताबिक ट्यूमर इन आर्गन को प्रभावित तो कर रहा था, साथ नसों के जंक्शन पर भी था। इस पर जरा सी चूक होती तो शरीर का पूरा खून निकल आता। उसे संभालना मुश्किल होता, लेकिन यूरोलाजी, वस्कुलर और जनरल सर्जरी की टीम के बेहतरीन को-आर्डिनेशन की वजह से ट्यूमर को सफलता पूर्वक निकाल लिया गया। हालांकि मरीज की राइट साइड की किडनी, लीवर का कुछ हिस्सा निकाला गया। इसे अलावा जिस नली को प्रभावित कर रहा था, उसे काटकर आर्टिफिशियल नली डालकर ग्राफ्टिंग कर दी।
कारण कुछ भी हो सकते हैं, जांच के लिए भेजा
डाक्टरों का कहना है कि काफी एग्रेसिव ट्यूमर था। इसके कुछ भी कारण हो सकते हैं। म्यूटेशन, जेनरिक व इन्वायरमेंट फैक्टर या केमिकल भी हो सकते हैं। फिलहाल ट्यूमर को जांच के लिए भेज दिया गया है। इससे पहले इतना बड़ा ट्यूमर नहीं देखा है। ट्यूमर को निकालने में पूरे छह घंटे लगे। चार से पांच डाक्टरों की टीम भी जुटी हुई थी।