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अयोध्या फैसला: जानिए केस में कैसे जुटाए गए थे सुबूत, इस महिला वकील ने निभाई अहम भूमिका
Sun, 10 Nov 2019 11:00 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनीपत(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 10 Nov 2019 11:00 AM IST
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वकील शिवानी तुषीर
- फोटो : अमर उजाला
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करीब पांच सदी पुराना विवाद सुलझाने के लिए सुबूत कैसे जुटाए गए थे, इसके बारे में बता रही हैं वो महिला वकील, जिन्होंने केस में अहम भूमिका निभाई। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के सोनीपत की वकील शिवानी तुषीर की। राम मंदिर केस में रामलला पक्ष की तरफ से सोनीपत की अधिवक्ता शिवानी तुषीर ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कोर्ट में पेश सुबूत को लेकर शिवानी ने रिसर्च किया था। फैसले को उन्होंने इलेक्ट्रानिक मोड में तैयार किया था।
शिवानी ने अदालत के फैसले को संतुलित बताया है। हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और के पाराशरन की सहयोगी रही सोनीपत के गढ़ी ब्राह्मणान की अधिवक्ता शिवानी तुषीर का कहना है कि उन्होंने अपने सीनियर अधिवक्ताओं के निर्देश पर अयोध्या विवाद के संबंध में कई पुराने केसों का रिसर्च किया। शिवानी ने माना कि इस केस के लिए लाखों रुपये की किताबें खरीदी गईं। सैकड़ों किताबों का बारीकी से अध्ययन किया गया। धार्मिक मामलों से जुड़ी किताबों को गहनता से पढ़ा गया।
उन्होंने माना कि वह रिसर्च के लिए पुराने मामलों की किताब पढ़ती थीं। उनके पक्ष के अधिवक्ताओं ने बाबरनामा, आईने अकबरी, पवित्र कुरान तक पढ़ी। छोटे-छोटे बिंदुओं को सारबद्ध किया। शिवानी मुख्य रूप से पुराने मामले ही सर्च करती थीं, जिनसे केस की सुनवाई के दौरान मदद मिली। उन्होंने कहा कि 2 अगस्त को मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 6 अगस्त से प्रतिदिन मामले की सुनवाई की जाएगी। इसके बाद से पूरी टीम के लिए कोर्ट और ऑफिस में केस की तैयारी ही प्राथमिकता बनकर रह गई। खानपान तक भी कार्यालय में ही होता था। उनके साथी अधिवक्ताओं ने चार लेखकों द्वारा लिखित कुरान का बारीकी से अध्ययन किया।
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शिवानी ने अदालत के फैसले को संतुलित बताया है। हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन और के पाराशरन की सहयोगी रही सोनीपत के गढ़ी ब्राह्मणान की अधिवक्ता शिवानी तुषीर का कहना है कि उन्होंने अपने सीनियर अधिवक्ताओं के निर्देश पर अयोध्या विवाद के संबंध में कई पुराने केसों का रिसर्च किया। शिवानी ने माना कि इस केस के लिए लाखों रुपये की किताबें खरीदी गईं। सैकड़ों किताबों का बारीकी से अध्ययन किया गया। धार्मिक मामलों से जुड़ी किताबों को गहनता से पढ़ा गया।
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उन्होंने माना कि वह रिसर्च के लिए पुराने मामलों की किताब पढ़ती थीं। उनके पक्ष के अधिवक्ताओं ने बाबरनामा, आईने अकबरी, पवित्र कुरान तक पढ़ी। छोटे-छोटे बिंदुओं को सारबद्ध किया। शिवानी मुख्य रूप से पुराने मामले ही सर्च करती थीं, जिनसे केस की सुनवाई के दौरान मदद मिली। उन्होंने कहा कि 2 अगस्त को मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 6 अगस्त से प्रतिदिन मामले की सुनवाई की जाएगी। इसके बाद से पूरी टीम के लिए कोर्ट और ऑफिस में केस की तैयारी ही प्राथमिकता बनकर रह गई। खानपान तक भी कार्यालय में ही होता था। उनके साथी अधिवक्ताओं ने चार लेखकों द्वारा लिखित कुरान का बारीकी से अध्ययन किया।
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हाईकोर्ट का फैसला भी इलेक्ट्रानिक मोड में किया था तैयार
शिवानी तुषीर बताती हैं कि अयोध्या मामले को लेकर हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया था। वह फैसला करीब आठ हजार पेज का था, जिसे उन्होंने इलेक्ट्रिक मोड़ में तैयार किया। हर गवाह के लिए अलग से इलेक्ट्रिक पेज तैयार किया गया। पूरे फैसले की पीडीएफ फाइल तैयार की थी।
पूरी तरह से संतुलित है फैसला
शिवानी तुषीर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है। राम मंदिर बनाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए भी पांच एकड़ जमीन अलग से देने का फैसला लिया है, जिससे हर प्रबुद्ध व्यक्ति कह सकता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है।
पूरी तरह से संतुलित है फैसला
शिवानी तुषीर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है। राम मंदिर बनाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए भी पांच एकड़ जमीन अलग से देने का फैसला लिया है, जिससे हर प्रबुद्ध व्यक्ति कह सकता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है।