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कचरे के नए पहाड़ को हटाने के लिए प्रशासक के सलाहकार ने मंजूर की 77 करोड़ की डीपीआर
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चंडीगढ़। डड्डूमाजरा में बने कचरे के दूसरे पहाड़ को खत्म करने के लिए नगर निगम की ओर से तैयार की गई 77 करोड़ रुपये की डटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को बुधवार को प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने स्वीकृति दे दी। अब निगम इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार करेगा। इसके बाद टेंडर लगाकर काम शुरू होगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस पहाड़ को हटाने के लिए निगम को 28.5 करोड़ रुपये मिलने हैं जिसकी पहली किस्त 11.36 करोड़ रुपये जारी भी हो गए हैं।
डड्डूमाजरा में लगभग आठ एकड़ भूमि पर 7.66 लाख मीट्रिक टन कचरे का अंबार लगा है। निगम ने केंद्र को बताया है कि जेपी समूह तय मानक के अनुसार कचरा निस्तारित नहीं कर रहा था। इस वजह से डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ बन गया। पुराना कचरा न होने के चलते अब इसके निस्तारण में अधिक खर्च आएगा। इस संबंध में स्मार्ट सिटी ने एक सर्वे भी कराया था, जिसमें पता चला था कि डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ तैयार हो गया है।
अधिकारी बोले- जेपी समूह की वजह से बना नया कचरे का पहाड़
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, लेकिन मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। इसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकने लगे। अदालत में जेपी समूह और निगम के बीच सुनवाई चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जेपी समूह की वजह से नया कचरे का पहाड़ बना है। इस कचरे के निस्तारण के रुपये कंपनी से लेंगे, लेकिन केंद्र जल्द ही स्मार्ट सिटी को अपने क्षेत्र में लगे कचरे के ढेर को हटाने का लक्ष्य देने वाला है। इस कारण निगम को ही अपने खर्चे पर कचरे का निस्तारण करना पड़ रहा है।
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प्लांट में पड़ा है लगभग 25 हजार मीट्रिक टन कचरा
प्लांट में भी इस समय 25 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिसे निगम को खाली करवाकर डंपिंग ग्राउंड पर ही भेजना है। इसके लिए एमओएच विभाग की ओर से टेंडर भी कॉल किया गया है। दूसरी ओर शहर का कचरा जो कि निस्तारित नहीं हो पा रहा है, वह भी डंपिंग ग्राउंड में जा रहा है।
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डड्डूमाजरा में लगभग आठ एकड़ भूमि पर 7.66 लाख मीट्रिक टन कचरे का अंबार लगा है। निगम ने केंद्र को बताया है कि जेपी समूह तय मानक के अनुसार कचरा निस्तारित नहीं कर रहा था। इस वजह से डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ बन गया। पुराना कचरा न होने के चलते अब इसके निस्तारण में अधिक खर्च आएगा। इस संबंध में स्मार्ट सिटी ने एक सर्वे भी कराया था, जिसमें पता चला था कि डंपिंग ग्राउंड पर 10 मीटर ऊंचा कचरे का नया पहाड़ तैयार हो गया है।
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अधिकारी बोले- जेपी समूह की वजह से बना नया कचरे का पहाड़
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को आधार बनाकर नगर निगम ने जून 2020 में जेपी प्लांट को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद निगम ने दावा किया था कि कचरे का निस्तारण कर देंगे, लेकिन मशीनों की क्षमता कम होने के कारण निगम 500 टन में से मात्र 40 प्रतिशत कचरा ही निस्तारित कर सका। इसके बाद बचे कचरे को डंपिंग ग्राउंड पर फेंकने लगे। अदालत में जेपी समूह और निगम के बीच सुनवाई चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जेपी समूह की वजह से नया कचरे का पहाड़ बना है। इस कचरे के निस्तारण के रुपये कंपनी से लेंगे, लेकिन केंद्र जल्द ही स्मार्ट सिटी को अपने क्षेत्र में लगे कचरे के ढेर को हटाने का लक्ष्य देने वाला है। इस कारण निगम को ही अपने खर्चे पर कचरे का निस्तारण करना पड़ रहा है।
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प्लांट में पड़ा है लगभग 25 हजार मीट्रिक टन कचरा
प्लांट में भी इस समय 25 हजार मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिसे निगम को खाली करवाकर डंपिंग ग्राउंड पर ही भेजना है। इसके लिए एमओएच विभाग की ओर से टेंडर भी कॉल किया गया है। दूसरी ओर शहर का कचरा जो कि निस्तारित नहीं हो पा रहा है, वह भी डंपिंग ग्राउंड में जा रहा है।