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हरियाणा में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बनाने का रास्ता हुआ साफ, हाईकोर्ट के 30 हजार केस होंगे कम

Fri, 26 Jul 2019 01:07 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 26 Jul 2019 01:07 PM IST
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administrative tribunal will establish in haryana beneficial for punjab haryana high court
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन का रास्ता साफ हो गया है। मनोहर लाल सरकार के टिब्यूनल बनाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार अब टिब्यूनल की स्थापना की प्रक्रिया शुरू करेगा। करनाल में ट्रिब्यूनल को स्थापित किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद हाईकोर्ट से हरियाणा के कर्मचारियों से जुड़े तीस हजार से ज्यादा केस कम हो जाएंगे।
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ट्रांसफर, पोस्टिंग, प्रमोशन, पेंशन, ग्रेच्युटी व एसीपी इत्यादि मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में ही होगी। हाईकोर्ट में केस का बोझ कम करने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है। बीते वर्ष विधानसभा में विधेयक पारित कर ट्रिब्यूनल गठन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को मंजूरी के लिए भेजा गया था। वैसे सीएम मनोहर लाल ने 2015 में इसके गठन को सैद्घांतिक सहमति दे दी थी।
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इसके सुनवाई शुरू करने के बाद कर्मचारियों को जल्दी राहत मिल सकेगी। हाईकोर्ट में केस का निपटारा होने में लंबा समय लग जाता है, जिससे कर्मचारियों को समय पर फायदा नहीं मिल पाता। जिससे सरकार पर भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। हिमाचल में भी पूर्व कांग्रेस सरकार ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित किया हुआ था, जिसे वर्तमान भाजपा सरकार ने हाल ही में भंग कर दिया है।
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ट्रिब्यूनल होने से कर्मचारियों को ट्रांसफर-प्रमोशन के केस में जल्दी राहत मिल जाती है।

इसलिए पड़ी ट्रिब्यूनल की जरूरत

सरकारी कर्मचारियों के अनेक मामलों से जुड़े हाईकोर्ट में 30,000 से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं। हाईकोर्ट में मुकदमों की लंबित इतनी है कि फैसले होने में काफी वक्त लग जाता है। कई बार नोटिस होने के बाद सालों तक सुनवाई ही नहीं होती। ट्रिब्यूनल बनने से सरकार, कर्मचारी और हाईकोर्ट को काफी राहत मिलने वाली है।

ऐसे काम करेगा ट्रिब्यूनल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ट्रिब्यूनल में कम से कम 2 लोगों की बेंच सुनवाई करेगी। इसके अन्य सदस्य भी होंगे। इसमें एक हाईकोर्ट जज रैंक का चेयरमैन और एक अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर का अधिकारी होगा। सदस्यों में भी रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे।

आईएएस अधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रिया की पूरी जानकारी होती है, इसलिए बेंच में रिटायर्ड अफसर भी शामिल रहेंगे। यह ट्रिब्यूनल मुख्य सचिव, प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों व सरकार के अन्य फैसलों के खिलाफ अपील की सुनवाई करेगा।

प्रशासनिक अभिकरण अधिनियम 1985 के तहत मिली मंजूरी कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी की है। हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को केंद्र सरकार ने प्रशासनिक अभिकरण अधिनियम 1985 (1985 का 13) की धारा 4 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा सरकार से अनुरोध प्राप्त होने पर भारत के राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से एतद् द्वारा हरियाणा प्रशासनिक अभिकरण की स्थापना करती है, जो इस अधिनियम के खंड 3 की धारा (ग) के प्रयोजन से नियत दिन होगा।

चेयरमैन हुए नियुक्त
हरियाणा प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन को मंजूरी के साथ ही केंद्र सरकार ने चेयरमैन की नियुक्ति भी कर दी है।  वकीलों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद हाईकोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस स्नेह पराशर को ट्रिब्यूनल का चेयरमैन नियुक्त किया है। वीरवार देर शाम उनकी नियुक्ति के आदेश भी जारी कर दिए। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं लोक शिकायत मंत्रालय की ओर से औपचारिक नोटिफिकेशन जारी कर दी गई है। नोटिफिकेशन के अनुसार जस्टिस स्नेह पराशर का कार्यकाल 5 वर्ष का रहेगा तथा ट्रिब्यूनल की चेयरमैन रहते हुए उन्हें 225000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।

 
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